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Kaushambi News: निधि मिली भरपूर...विकास की राहें बेनूर
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जनता सड़क, नाली, खड़ंजा, इंटरलॉकिंग और दूसरी बुनियादी सुविधाओं के लिए जनप्रतिनिधियों की ओर उम्मीद से देखती है। सरकार विधायक और विधान परिषद सदस्यों को विकास निधि भी देती है, लेकिन खर्च करने में कंजूसी बरती जा रही है। कौशाम्बी की विकास निधि में पड़े पैसे इसका उदाहरण हैं।
वित्तीय प्रगति रिपोर्ट (30 जुलाई 2026 तक) पर नजर डालें तो जिले के तीन विधायकों और चार विधान परिषद सदस्यों की निधि में पिछले वित्तीय वर्ष की 3.99636 करोड़ रुपये की रकम बची थी। चालू वित्तीय वर्ष में इसमें 8.08020 करोड़ रुपये और जुड़ गए। यानी कुल उपलब्ध निधि बढ़कर 12.07656 करोड़ रुपये हो गई। इसके बावजूद 30 जुलाई तक महज 3.90487 करोड़ रुपये के कार्य ही स्वीकृत हो सके। कार्यदायी संस्थाओं को मात्र 2.35204 करोड़ रुपये अवमुक्त किए गए। संवाद
मंझनपुर में 4.50 करोड़ की निधि, विकास में फिसड्डी
मंझनपुर विधानसभा क्षेत्र में स्थिति सबसे ज्यादा चौंकाने वाली है। विधायक इंद्रजीत सरोज की निधि में एक अप्रैल 2026 को पिछले साल की 2.00940 करोड़ रुपये की रकम बची थी। चालू वित्तीय वर्ष में 2.50 करोड़ रुपये और मिलने के बाद कुल उपलब्ध निधि 4.50940 करोड़ रुपये हो गई। 30 जुलाई तक एक भी कार्य स्वीकृत नहीं हुआ। नए सत्र में विधायक की ओर से 11 कार्यों के प्रस्ताव जरूर दिए गए हैं, जिन्हें अभी मंजूरी नहीं मिल सकी है।
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सिराथू में मंजूरी मिली, जमीन पर विकास अभी दूर सिराथू विधायक डॉ. पल्लवी पटेल की निधि में पिछले वित्तीय वर्ष के 1.61524 करोड़ रुपये बचे थे। चालू वित्तीय वर्ष में 2.50 करोड़ रुपये और मिलने से कुल उपलब्ध निधि 4.11524 करोड़ रुपये हो गई। करीब 3.45 करोड़ रुपये की निधि अब भी नई परियोजनाओं की स्वीकृति की प्रतीक्षा में है। नए सत्र में 15 कार्य स्वीकृत हैं, लेकिन अभी तक धरातल पर काम शुरू नहीं हुआ।
चायल में पूजा पाल ने लगाई निधि की रफ्तार
तीनों विधानसभा क्षेत्रों में चायल की तस्वीर सबसे अलग है। विधायक पूजा पाल की निधि में पिछले वित्तीय वर्ष की 26.453 लाख रुपये की बचत थी। चालू वित्तीय वर्ष में 2.53020 करोड़ रुपये मिलने के बाद कुल उपलब्ध निधि 2.79473 करोड़ रुपये हुई। इसमें से 2.78666 करोड़ रुपये के कार्य स्वीकृत हो चुके हैं। नए सत्र में स्वीकृत 24 कार्य शुरू भी हो चुके हैं।
प्रस्ताव आने पर ही खर्च होती है निधि
परियोजना निदेशक दिनकर विद्यार्थी ने बताया कि माननीयों की निधि में उनकी तरफ से प्रस्ताव आने के बाद धनराशि खर्च की जाती है। जिनके प्रस्ताव आए हैं, उनके प्रस्ताव के हिसाब से निधि विकास कार्यों में खर्च की जा रही है। जिनका प्रस्ताव नहीं आया है, उनकी निधि का धन खाते में संचित है। प्रस्ताव तैयार होने के बाद उनके क्षेत्र में विकास कार्य कराया जाएगा।
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वित्तीय प्रगति रिपोर्ट (30 जुलाई 2026 तक) पर नजर डालें तो जिले के तीन विधायकों और चार विधान परिषद सदस्यों की निधि में पिछले वित्तीय वर्ष की 3.99636 करोड़ रुपये की रकम बची थी। चालू वित्तीय वर्ष में इसमें 8.08020 करोड़ रुपये और जुड़ गए। यानी कुल उपलब्ध निधि बढ़कर 12.07656 करोड़ रुपये हो गई। इसके बावजूद 30 जुलाई तक महज 3.90487 करोड़ रुपये के कार्य ही स्वीकृत हो सके। कार्यदायी संस्थाओं को मात्र 2.35204 करोड़ रुपये अवमुक्त किए गए। संवाद
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मंझनपुर में 4.50 करोड़ की निधि, विकास में फिसड्डी
मंझनपुर विधानसभा क्षेत्र में स्थिति सबसे ज्यादा चौंकाने वाली है। विधायक इंद्रजीत सरोज की निधि में एक अप्रैल 2026 को पिछले साल की 2.00940 करोड़ रुपये की रकम बची थी। चालू वित्तीय वर्ष में 2.50 करोड़ रुपये और मिलने के बाद कुल उपलब्ध निधि 4.50940 करोड़ रुपये हो गई। 30 जुलाई तक एक भी कार्य स्वीकृत नहीं हुआ। नए सत्र में विधायक की ओर से 11 कार्यों के प्रस्ताव जरूर दिए गए हैं, जिन्हें अभी मंजूरी नहीं मिल सकी है।
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सिराथू में मंजूरी मिली, जमीन पर विकास अभी दूर सिराथू विधायक डॉ. पल्लवी पटेल की निधि में पिछले वित्तीय वर्ष के 1.61524 करोड़ रुपये बचे थे। चालू वित्तीय वर्ष में 2.50 करोड़ रुपये और मिलने से कुल उपलब्ध निधि 4.11524 करोड़ रुपये हो गई। करीब 3.45 करोड़ रुपये की निधि अब भी नई परियोजनाओं की स्वीकृति की प्रतीक्षा में है। नए सत्र में 15 कार्य स्वीकृत हैं, लेकिन अभी तक धरातल पर काम शुरू नहीं हुआ।
चायल में पूजा पाल ने लगाई निधि की रफ्तार
तीनों विधानसभा क्षेत्रों में चायल की तस्वीर सबसे अलग है। विधायक पूजा पाल की निधि में पिछले वित्तीय वर्ष की 26.453 लाख रुपये की बचत थी। चालू वित्तीय वर्ष में 2.53020 करोड़ रुपये मिलने के बाद कुल उपलब्ध निधि 2.79473 करोड़ रुपये हुई। इसमें से 2.78666 करोड़ रुपये के कार्य स्वीकृत हो चुके हैं। नए सत्र में स्वीकृत 24 कार्य शुरू भी हो चुके हैं।
प्रस्ताव आने पर ही खर्च होती है निधि
परियोजना निदेशक दिनकर विद्यार्थी ने बताया कि माननीयों की निधि में उनकी तरफ से प्रस्ताव आने के बाद धनराशि खर्च की जाती है। जिनके प्रस्ताव आए हैं, उनके प्रस्ताव के हिसाब से निधि विकास कार्यों में खर्च की जा रही है। जिनका प्रस्ताव नहीं आया है, उनकी निधि का धन खाते में संचित है। प्रस्ताव तैयार होने के बाद उनके क्षेत्र में विकास कार्य कराया जाएगा।