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जलपरी के जज्बे को देखने उमड़े लोग
Kaushambi
Updated Sun, 30 Mar 2014 05:30 AM IST
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कड़ा/कल्यानपुर। जिस उम्र में लड़कियां गुड्डे-गुड़ियों से खेलती हैं। उसी उमर में कानपुर की करीब नौ साल की श्रद्धा (नन्हीं जलपरी ) लोगों को अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। जलपरी इन दिनों गंगा की लहरों से खेलते हुए कानपुर से इलाहाबाद के सफर में निकली हैं। करीब 280 किलोमीटर के सफर का गवाह बनने के लिए घरवालों के साथ 40 सदस्यीय दल भी स्टीमर के साथ है। शुक्रवार रात नन्हीं जलपरी कड़ा पहुंची। मां शीतला का दर्शन किया। इसने बताया कि वह दुनियाभर में देश का नाम रौशन करना चाहती है। जलपरी को देखने के लिए लोग उमड़ पड़े।
कानपुर के मैसरघाट के रहने वाले ललित कुमार शुक्ला की करीब नौ वर्षीय श्रद्धा को तैराकी विरासत में मिली है। 25 मार्च की सुबह कानपुर से तैरते हुए शुक्रवार रात वह कड़ा घाट पहुंची। इसके साथ पिता ललित कुमार, दादा मुन्नूलाल, मां वंदना और मामा शिवम के अलावा 35 सदस्यीय दल स्टीमर से चल रही है। कड़ा में रात्रि विश्राम करने के बाद नन्हीं जलपरी ने शनिवार सुबह शीतला मां का दर्शन किया। कानपुर के सेंट मेरीज स्कूल में चौथी क्लास में श्रद्धा पढ़ती है। पिता ललित कुमार ने बताया कि जब श्रद्धा करीब दो साल की थी, तो उसके दादा तैरने के लिए गंगा जाते थे, तब वह उनकी पीठ पर सवार हो जाती थी। वहीं से उसने तैराकी का हुनर सीखा। उसने अपनी प्रतिभा का पहला प्रदर्शन 22 अगस्त 2011 को गोलाघाट से मैसरघाट के बीच किया था। इसके बाद उसने करीब छह किलोमीटर की तैराकी शुक्लागंज से अग्रसेन वेदशाला, चित्रकूट महोत्सव में 7 किलोमीटर की तैराकी, गंगा बैराज से मैसरघाट 10 किलोमीटर और फिर सरसैया घाट से सिद्धनागघाट 16 किलोमीटर तैर चुकी है।
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कानपुर के मैसरघाट के रहने वाले ललित कुमार शुक्ला की करीब नौ वर्षीय श्रद्धा को तैराकी विरासत में मिली है। 25 मार्च की सुबह कानपुर से तैरते हुए शुक्रवार रात वह कड़ा घाट पहुंची। इसके साथ पिता ललित कुमार, दादा मुन्नूलाल, मां वंदना और मामा शिवम के अलावा 35 सदस्यीय दल स्टीमर से चल रही है। कड़ा में रात्रि विश्राम करने के बाद नन्हीं जलपरी ने शनिवार सुबह शीतला मां का दर्शन किया। कानपुर के सेंट मेरीज स्कूल में चौथी क्लास में श्रद्धा पढ़ती है। पिता ललित कुमार ने बताया कि जब श्रद्धा करीब दो साल की थी, तो उसके दादा तैरने के लिए गंगा जाते थे, तब वह उनकी पीठ पर सवार हो जाती थी। वहीं से उसने तैराकी का हुनर सीखा। उसने अपनी प्रतिभा का पहला प्रदर्शन 22 अगस्त 2011 को गोलाघाट से मैसरघाट के बीच किया था। इसके बाद उसने करीब छह किलोमीटर की तैराकी शुक्लागंज से अग्रसेन वेदशाला, चित्रकूट महोत्सव में 7 किलोमीटर की तैराकी, गंगा बैराज से मैसरघाट 10 किलोमीटर और फिर सरसैया घाट से सिद्धनागघाट 16 किलोमीटर तैर चुकी है।
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