{"_id":"5bb5193c867a553da22cdbf6","slug":"91538595132-kaushambi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दोआबा के किसानों में भी सुलग रही आग बन सकती है सोला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दोआबा के किसानों में भी सुलग रही आग बन सकती है सोला
Updated Thu, 04 Oct 2018 01:02 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मंझनपुर। अघोषित बिजली कटौती, नहर में पानी नहीं होने और भूमि अधिग्रहण समेत अन्य समस्याओं को लेकर दोआबा के किसानों में भी आग सुलग रही है। जो कभी भी शोले का रूप ले सकती है। महीनों से चल रहे आंदोलन के बावजूद प्रशासन की ओर से समस्याओं का निस्तारण नहीं हो सका है।
उद्योग विहीन कौशाम्बी जिले की दो तिहाई से अधिक आबादी खेती पर निर्भर है, लेकिन संसाधन नहीं मिलने से किसान परेशान हैं। वर्तमान में किसान सबसे ज्यादा नहर में पानी और बाधित विद्युत आपूर्ति से जूझ रहे हैं। कहने को तो जिले में रामगंगा, निजली रामगंगा तथा किशुनपुर पंप कैनाल नहर के माइनर और रजबहों का जाल बिछा है, लेकिन भारतीय किसान यूनियन और स्वामी समर्थ किसान पार्टी के तमाम आंदोलनों के बावजूद तकरीबन तीन सौ किलोमीटर क्षेत्रफल वाली नहर की आधी से अधिक माइनरें सूखी हैं। 16 जून को नहर की तलहटी पर बैठकर भाकियू नेता नूरुल इस्लाम व बलवीर सिंह चौहान की अगुवाई में सैकड़ों किसानों ने धरना भी दिया था। इसके बाद डीएम मनीष कुमार वर्मा ने निचली रामगंगा नहर जरौली पंप कैनाल के एक्सईएन की पगार रोक दी थी। नतीजतन नहर में पानी आ गया। पर, निचली रामगंगा नहर नरोरा अभी भी सूखी है। तीन साल से सफाई नहीं होने के कारण इस नहर में बड़े-बड़े पेड़ उग आए हैं। सिंचाई का दूसरा विकल्प नलकूप भी बिजली के अभाव में ठप हैं।
बिजली विभाग की ओर से नलकूपों के लिए बनवाए गए अलग फीडरों में से 80 फीसदी चालू हो चुके हैं, लेकिन महज आठ घंटे मिलने वाली बिजली में भी लो-वोल्टेज के साथ ही अघोषित कटौती के कारण ट्यूबवेलों से सिंचाई नहीं हो पा रही है। इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग-2 को चार से छह लाइन बनाने के लिए कोखराज से कनवार तक अधिगृहीत भूमि की पैमाइश व मनमाने मुआवजे को लेकर किसान आंदोलित हैं। इसे लेकर किसानों ने पैदल मार्च, धरना-प्रदर्शन करने के साथ कलक्ट्रेट तक एनएचएआई के पुतले की शवयात्रा भी निकाल चुके हैं। कई चक्रों में प्रशासन और किसानों के बीच वार्ता भी हो चुकी है। इसके बावजूद सार्थक समाधान नहीं निकला। पिछले हफ्ते सर्वे करने पहुंचे एनएचएआई के कर्मचारियों को त्रिलोकपुर के किसानों ने पीट भी दिया था। इन सभी मुद्दों को लेकर यहां के किसानों में महीनों से आग सुलग रही है। बताया जाता है कि वक्त रहते समस्याओं का निस्तारण नहीं हुआ तो जिले के किसान भी आंदोलन कर सकते हैं।
विज्ञापन
प्रदेश सरकार की कर्ज माफी योजना जिले के डेढ़ हजार किसानों के लिए छलावा साबित हो रही है। यहां के 24 हजार किसानों में से 22500 को ही अब तक योजना से लाभान्वित कराया जा सका है। एलडीएम दिनेश कुमार मिश्र का कहना है कि तकनीकी दिक्कतों की वजह से करीब 15 सौ किसानों का कर्ज माफ नहीं किया जा सका है। इनमें से किसी का खाता नंबर गलत है तो किसी के आधार कार्ड संख्या में समस्या है। जिला प्रशासन को इसकी रिपोर्ट भेजी जा चुकी है।
विज्ञापन
उद्योग विहीन कौशाम्बी जिले की दो तिहाई से अधिक आबादी खेती पर निर्भर है, लेकिन संसाधन नहीं मिलने से किसान परेशान हैं। वर्तमान में किसान सबसे ज्यादा नहर में पानी और बाधित विद्युत आपूर्ति से जूझ रहे हैं। कहने को तो जिले में रामगंगा, निजली रामगंगा तथा किशुनपुर पंप कैनाल नहर के माइनर और रजबहों का जाल बिछा है, लेकिन भारतीय किसान यूनियन और स्वामी समर्थ किसान पार्टी के तमाम आंदोलनों के बावजूद तकरीबन तीन सौ किलोमीटर क्षेत्रफल वाली नहर की आधी से अधिक माइनरें सूखी हैं। 16 जून को नहर की तलहटी पर बैठकर भाकियू नेता नूरुल इस्लाम व बलवीर सिंह चौहान की अगुवाई में सैकड़ों किसानों ने धरना भी दिया था। इसके बाद डीएम मनीष कुमार वर्मा ने निचली रामगंगा नहर जरौली पंप कैनाल के एक्सईएन की पगार रोक दी थी। नतीजतन नहर में पानी आ गया। पर, निचली रामगंगा नहर नरोरा अभी भी सूखी है। तीन साल से सफाई नहीं होने के कारण इस नहर में बड़े-बड़े पेड़ उग आए हैं। सिंचाई का दूसरा विकल्प नलकूप भी बिजली के अभाव में ठप हैं।
विज्ञापन
बिजली विभाग की ओर से नलकूपों के लिए बनवाए गए अलग फीडरों में से 80 फीसदी चालू हो चुके हैं, लेकिन महज आठ घंटे मिलने वाली बिजली में भी लो-वोल्टेज के साथ ही अघोषित कटौती के कारण ट्यूबवेलों से सिंचाई नहीं हो पा रही है। इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग-2 को चार से छह लाइन बनाने के लिए कोखराज से कनवार तक अधिगृहीत भूमि की पैमाइश व मनमाने मुआवजे को लेकर किसान आंदोलित हैं। इसे लेकर किसानों ने पैदल मार्च, धरना-प्रदर्शन करने के साथ कलक्ट्रेट तक एनएचएआई के पुतले की शवयात्रा भी निकाल चुके हैं। कई चक्रों में प्रशासन और किसानों के बीच वार्ता भी हो चुकी है। इसके बावजूद सार्थक समाधान नहीं निकला। पिछले हफ्ते सर्वे करने पहुंचे एनएचएआई के कर्मचारियों को त्रिलोकपुर के किसानों ने पीट भी दिया था। इन सभी मुद्दों को लेकर यहां के किसानों में महीनों से आग सुलग रही है। बताया जाता है कि वक्त रहते समस्याओं का निस्तारण नहीं हुआ तो जिले के किसान भी आंदोलन कर सकते हैं।
विज्ञापन
प्रदेश सरकार की कर्ज माफी योजना जिले के डेढ़ हजार किसानों के लिए छलावा साबित हो रही है। यहां के 24 हजार किसानों में से 22500 को ही अब तक योजना से लाभान्वित कराया जा सका है। एलडीएम दिनेश कुमार मिश्र का कहना है कि तकनीकी दिक्कतों की वजह से करीब 15 सौ किसानों का कर्ज माफ नहीं किया जा सका है। इनमें से किसी का खाता नंबर गलत है तो किसी के आधार कार्ड संख्या में समस्या है। जिला प्रशासन को इसकी रिपोर्ट भेजी जा चुकी है।