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मल्हीपुर गांव में कटान तेज, ग्रामीणों ने घर छोड़े
Updated Wed, 12 Sep 2018 12:55 AM IST
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नेवादा। यमुना के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से जिले की किलनहाई नदी उफान पर है। इसके चलते कछारी इलाके की सैकड़ों बीघा फसलें जलमग्न हो गई हैं। मल्हीपुर में तेजी से कटान के कारण तट पर बसे ग्रामीणों ने घर छोड़ दिया है।
मध्यप्रदेश की बेतवा नदी में बाढ़ से यमुना का जलस्तर के तेजी के साथ बढ़ रहा है। 24 घंटे के भीतर दो फिट तक यमुना में पानी बढ़ा है। सिंचाई विभाग के अधिशाषी अभियंता आरके निरंजन ने बताया कि मंगलवार को नैनी में यमुना का जलस्तर 82.78 मीटर तक पहुंच गया। जो खतरे के निशान 84.73 से महज दो मीटर कम है। यमुना में बाढ़ का असर दोआबा की किलनहाई नदी पर पड़ रहा है। चायल तहसील से होकर गुजरने वाली किलनहाई उफान पर है। तटवर्ती गांव पिपरहटा, नंदापुरवा, मल्हीपुर, सैदपुर, पठनपुरवा मे बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। यमुना का पानी वापस किलनहाई में जाने से नदी में तेजी के साथ कटान शुरू हो गया है। इससे तट पर बसे मल्हीपुर निवासी रामसुंदर, भैयन, जगदीश, सूरत तथा बच्चन आदि के घर जमींदोज होने की कगार पर हैं। दहशत के ग्रामीण घर छोड़कर गांव से पलायन कर गए हैं। गांव के तुलसी, अशर्फीलाल, प्रमोद, रामनेवाज, सूरत, बच्चूलाल, गीता देवी, सूर्यभान समेत चार दर्जन किसानों की सैकड़ों बीघा तिल, अरहर, ज्वार, बाजरा की फसलें डूब गई हैं। चरागाहों में पानी भर जाने से पशुओं के लिए चारे का संकट पैदा हो गया है।
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मध्यप्रदेश की बेतवा नदी में बाढ़ से यमुना का जलस्तर के तेजी के साथ बढ़ रहा है। 24 घंटे के भीतर दो फिट तक यमुना में पानी बढ़ा है। सिंचाई विभाग के अधिशाषी अभियंता आरके निरंजन ने बताया कि मंगलवार को नैनी में यमुना का जलस्तर 82.78 मीटर तक पहुंच गया। जो खतरे के निशान 84.73 से महज दो मीटर कम है। यमुना में बाढ़ का असर दोआबा की किलनहाई नदी पर पड़ रहा है। चायल तहसील से होकर गुजरने वाली किलनहाई उफान पर है। तटवर्ती गांव पिपरहटा, नंदापुरवा, मल्हीपुर, सैदपुर, पठनपुरवा मे बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। यमुना का पानी वापस किलनहाई में जाने से नदी में तेजी के साथ कटान शुरू हो गया है। इससे तट पर बसे मल्हीपुर निवासी रामसुंदर, भैयन, जगदीश, सूरत तथा बच्चन आदि के घर जमींदोज होने की कगार पर हैं। दहशत के ग्रामीण घर छोड़कर गांव से पलायन कर गए हैं। गांव के तुलसी, अशर्फीलाल, प्रमोद, रामनेवाज, सूरत, बच्चूलाल, गीता देवी, सूर्यभान समेत चार दर्जन किसानों की सैकड़ों बीघा तिल, अरहर, ज्वार, बाजरा की फसलें डूब गई हैं। चरागाहों में पानी भर जाने से पशुओं के लिए चारे का संकट पैदा हो गया है।
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