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दवाएं न होने पर मौतों पर पर्दा डाल रहा स्वास्थ्य विभाग

Wed, 06 Sep 2017 01:05 AM IST
Updated Wed, 06 Sep 2017 01:05 AM IST
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दवाएं न होने पर मौतों पर पर्दा डाल रहा स्वास्थ्य विभाग
मौतों पर पर्दा डाल रहा स्वास्थ्य विभाग
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जिला अस्पताल का स्टोर खाली, बाहर से खरीदी जा रही दवाएं
90 फीसदी दवाओं का टोटा, पटरी से उतरी स्वास्थ्य विभाग की गाड़ी
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर।
बिछौरा गांव के तीन मासूमों की मौत बुखार से हो गई। इसके पहले भी मासूमों की जान जा चुकी है। मौतों के सच पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी सिर्फ पर्दा डालने का काम कर रहे हैं। हकीकत यह है कि जीवन रक्षक दवाएं हैं ही नहीं। जिला अस्पताल में दस फीसदी दवाएं हैं, 90 फीसदी दवाओं का टोटा है। इसको लेकर डॉक्टर भी परेशान हैं।
जिला अस्पताल में प्रतिदिन 60 से 70 बच्चे इलाज के लिए आते हैं। डिलेवरी के बाद बच्चों का इलाज भी यहीं होता है। करीब दस दिन से जिला अस्पताल के स्टोर में जीवन रक्षक दवाएं नहीं हैं। हर वह जरूरी दवा गायब है जिसकी बच्चों को जरूरत होती है। बिछौरा गांव के तीन मासूमों की मौत हो गई तो हड़कंप मच गया। जांच के लिए टीम भेजी गई। टीम ने बीमारी से मौत होने की पुष्टि की लेकिन यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि उनका इलाज निजी अस्पतालों में हुआ। हकीकत यह है कि लोग अपने बच्चों को जिला अस्पताल ले जाते हैं लेकिन दवाएं न होने के कारण निजी अस्पताल जाना मजबूर हो जाती है। अमर उजाला ने पड़ताल की तो यही सच्चाई खुलकर सामने आई। कई डॉक्टरों ने बताया कि बच्चों के लिए मात्र दस फीसदी दवाएं हैं जिनसे काम नहीं चल रहा है। मजबूरन उन्हें बच्चों की हालत को देखते हुए बाहर से दवाएं मंगवाकर देनी पड़ रही हैं।
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सीएचसी सिराथू और सरायअकिल की भी स्थिति बदतर
जिला अस्पताल जैसी ही स्थिति सीएचसी सिराथू और सरायअकिल की भी है। सिराथू सीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञ ही नहीं है। एक हफ्ते के भीतर यहां 70 बच्चे आए। सबको लाल-पीली गोली देकर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। नतीजतन लोगों को निजी अस्पतालों में जाना पड़ा। सरायअकिल सीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञ की सोमवार को तैनाती हुई है। वह दो दिन से लगातार बैठ रहे हैं लेकिन यहां भी दवाओं का टोटा है। इमरजेंसी वार्ड में ऑक्सीजन आदि का इंतजाम तो पुख्ता है लेकिन बिना दवाओं के डॉक्टर भी असहाय हैं।
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बिछौरा में अभी भी दर्जनों हैं बीमार
जिला मुख्यालय से चार किमी दूरी पर स्थित बिछौरा गांव में तीन मासूमों की बुखार से मौत हो चुकी है जबकि दर्जनों बीमार हैं। गांव की पुष्पा, उसकी बहन ऊषा, दीपू, भाई गुड़िया, नीलू, मनदीप, लखन, रेशमा समेत एक दर्जन से ज्यादा लोग बीमार हैं। सबका इलाज चल रहा है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग सच से पीछा छुड़ाने की कोशिश कर रहा है।

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जिला अस्पताल में इन दवाओं का है अभाव
0 एंटीबायोटिक
0 स्टेरायड
0 पेन किलर
0 सांस की बीमारी से संबंधित दवाएं
0 दाद, खाद, ,खुजली की दवाएं
0 खांसी की दवाएं
0 कैल्शियम
0 विटामिन
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क्या कहते हैं जिम्मेदार
जिला अस्पताल के स्टोर में कुछ दवाओं की कमी है, लेकिन ऐसा नहीं है कि बच्चों का इलाज नहीं हो पा रहा है। दवाएं दी जा रही हैं। जो दवाएं नहीं हैं, उनके बारे में स्टोर से रिपोर्ट मांगी गई है, जल्द ही उनको मंगवाया जाएगा।
डॉ. दीपक सेठ-सीएमएस
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