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रेफरल सेंटर बना आधुनिक जिला महिला चिकित्सालय
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रेफरल सेंटर बना आधुनिक जिला महिला चिकित्सालय
अस्पताल में अब तक नहीं पोस्ट हो रहे एक भी डॉक्टर
25 स्टाफ नर्स के भरोसे कराया जा रहा प्रसव
फोटो नं-13
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। कौशाम्बी जिले में अभी भी महिलाओं और बच्चों की सेहत भगवान भरोसे है। यहां महिला अस्पताल का संचालन तो आचार संहिता के पहले कर दिया गया, लेकिन चिकित्सकों की तैनाती नहीं की गई। 25 स्टाफ नर्स के भरोसे सिर्फ प्रसव कराने का जिम्मा है। ऐसे में यहां प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं की हालत बिगड़ने पर उन्हें रेफर करने के सिवा कोई चारा नहीं बचता।
संयुक्त जिला चिकित्सालय परिसर में एक नया भवन महिला अस्पताल के लिए बना है। जच्चा-बच्चा को सारी सहूलियत इस अस्पताल के माध्यम से दी जानी है। इसके बावजूद अस्पताल सिर्फ रेफर सेंटर बनकर रह गया है। अस्पताल में चिकित्सकों के 18 पद सृजित हैं, लेकिन अब तक किसी की तैनाती नहीं हुई है। अस्पताल में आने वाले मरीजों के आंकड़ों पर नजर डालें तो चौंकाने वाली हकीकत सामने आ रही है। इस अस्पताल में आठ अप्रैल को 14 महिलाएं प्रसव के लिए आई जिसमें से दो को रेफर किया गया। नौ को यहां 12 महिलाएं भर्ती हुई, जिसमें दो रेफर और एक का जिला अस्पताल के चिकित्सक ने ऑपरेशन किया। इसी तरह 10 को नौ मरीज आए, जिसमें चार रेफर किए गए। 11 को छह मरीज आए जिसमें तीन रेफर किए गए। इसी तरह इस महीने में अब तक महिला अस्पताल में प्रसव के लिए 104 महिलाओं को भर्ती किया गया है। जिसमें से 25 महिलाओं को रेफर किया जा चुका है।
इनका कहना है
महिला अस्पताल में 25 स्टाफ नर्सों की तैनाती की गई है।18 चिकित्सकों के पद सृजित है, लेकिन शासन से स्टाफ की तैनाती नहीं हो सकी है। इसकी वजह से दिक्कत आ रही है। सामान्य प्रसव नहीं होने की स्थित में महिलाओं को जिला अस्पताल में भर्ती कर प्रसव कराया जाता है।
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डॉ. दीपक सेठ, सीएमएस
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अस्पताल में अब तक नहीं पोस्ट हो रहे एक भी डॉक्टर
25 स्टाफ नर्स के भरोसे कराया जा रहा प्रसव
फोटो नं-13
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। कौशाम्बी जिले में अभी भी महिलाओं और बच्चों की सेहत भगवान भरोसे है। यहां महिला अस्पताल का संचालन तो आचार संहिता के पहले कर दिया गया, लेकिन चिकित्सकों की तैनाती नहीं की गई। 25 स्टाफ नर्स के भरोसे सिर्फ प्रसव कराने का जिम्मा है। ऐसे में यहां प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं की हालत बिगड़ने पर उन्हें रेफर करने के सिवा कोई चारा नहीं बचता।
संयुक्त जिला चिकित्सालय परिसर में एक नया भवन महिला अस्पताल के लिए बना है। जच्चा-बच्चा को सारी सहूलियत इस अस्पताल के माध्यम से दी जानी है। इसके बावजूद अस्पताल सिर्फ रेफर सेंटर बनकर रह गया है। अस्पताल में चिकित्सकों के 18 पद सृजित हैं, लेकिन अब तक किसी की तैनाती नहीं हुई है। अस्पताल में आने वाले मरीजों के आंकड़ों पर नजर डालें तो चौंकाने वाली हकीकत सामने आ रही है। इस अस्पताल में आठ अप्रैल को 14 महिलाएं प्रसव के लिए आई जिसमें से दो को रेफर किया गया। नौ को यहां 12 महिलाएं भर्ती हुई, जिसमें दो रेफर और एक का जिला अस्पताल के चिकित्सक ने ऑपरेशन किया। इसी तरह 10 को नौ मरीज आए, जिसमें चार रेफर किए गए। 11 को छह मरीज आए जिसमें तीन रेफर किए गए। इसी तरह इस महीने में अब तक महिला अस्पताल में प्रसव के लिए 104 महिलाओं को भर्ती किया गया है। जिसमें से 25 महिलाओं को रेफर किया जा चुका है।
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इनका कहना है
महिला अस्पताल में 25 स्टाफ नर्सों की तैनाती की गई है।18 चिकित्सकों के पद सृजित है, लेकिन शासन से स्टाफ की तैनाती नहीं हो सकी है। इसकी वजह से दिक्कत आ रही है। सामान्य प्रसव नहीं होने की स्थित में महिलाओं को जिला अस्पताल में भर्ती कर प्रसव कराया जाता है।
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डॉ. दीपक सेठ, सीएमएस