{"_id":"59f085654f1c1bb6678b7672","slug":"71508935013-kaushambi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"माइनरों में उड़ रही धूल ने बढ़ाई किसानों की मुसीबत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
माइनरों में उड़ रही धूल ने बढ़ाई किसानों की मुसीबत
Updated Wed, 25 Oct 2017 06:06 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
माइनरों में उड़ रही धूल ने बढ़ाई किसानों की मुसीबत
प्रमुख नहर में पश्चिमशरीरा के आगे नहीं बढ़ पा रहा पानी
कई हेक्टेयर भूमि के बंजर पड़े रहने का खतरा
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर।
सिंचाई के लिए वरदान कही जाने वाली किशनपुर पंप कैनाल की माइनरों में तीन माह से धूल उड़ रही है। खरीफ की खेती तो किसानों ने किसी तरह कर ली पर रबी में सैकड़ों हेक्टेयर भूमि के बंजर पड़े रहने का खतरा दिख रहा है। प्रमुख नहर में टेल तक पानी न पहुंच पाने से किसानों की मुसीबत बढ़ गई है। इसे लेकर इलाकाई किसान चिंतित हैं।
किशनपुर कैंनाल की माइनरें व रजबहे फसलों की सिंचाई के लिए बेहद मुफीद हैं। 28 माइनरों और छह रजबहों के भरोसे जिले के दक्षिणी हिस्से की 80 फीसदी खेती होती है। इस साल किशनपुर पंप कैनाल किसानों को खरीफ की खेती से दगा दे रही है। जुलाई महीने में धान की रोपाई के दौरान कुछ माइनरों में एक बार पानी छोड़ा गया। रोपाई हो जाने के बाद पश्चिमशरीरा के आगे निकली बंधुरी रसूलीपुर, म्योहर, घोषिया, कनैली, कोड़ारी सहित एक दर्जनभर माइनरों में पानी ही नहीं छोड़ा गया। इसका शिकार बेरौंचा माइनर भी है। धान की कटाई के बाद अब किसान गेहूं की बुवाई के लिए खेतों का पलेवा करना चाह रहे हैं। माइनरों में उड़ रही धूल के चलते खेतों का पलेवा नहीं हो पा रहा है। जिन स्थानों पर नलकूप हैं वहां के किसान तो किसी तरह पलेवा कर ले रहे हैं पर असिंचित एरिया धाने, आइगवां, बेरौचा, गुरौली, दाई का पुरवा सहित दर्जनभर गांवों की सैकड़ो बीघा भूमि के बंजर पड़े रहने का खतरा मंडराने लगा है। इसे लेकर इलाकाई किसान हैरान-परेशान हैं। विभागीय जिम्मेदार हैं कि शासन के टेल तक पानी पहुंचाने के निर्देश को ठेंगा दिखा रहे हैं।
इनसेट
सिल्ट सफाई के नाम पर माह भर बंद रहेगी कैनाल
किशनपुर पंप कैनाल खरीफ की खेती शुरू होने के बाद लगातार चल रही है। अगस्त से लेकर अब तक जिम्मेदार लो-वोल्टेज का बहाना बना रहे थे। महज तीन से चार पंप चलने की वजह से माइनरों में पानी नहीं पहुंच रहा था। इधर बीच वोल्टेज में सुधार हुआ तो भी माइनरों में पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। अब विभाग 30 अक्तूबर से पंप बंदकर प्रमुख नहर व माइनरों की सिल्ट सफाई कराएगा। ऐसे में नवंबर माह में भी माइनरों में पानी नहीं पहुंच सकेगा। कुल मिलाकर बुवाई खत्म होने के बाद ही किशनपुर पंप कैनाल की माइनरों व रजबहों में पानी छोड़ा जाएगा। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि विभाग फसलों की सिंचाई को लेकर कितना संजीदा है।
विज्ञापन
क्या कहते हैं अधिकारी
किशनपुर पंप कैनाल के छह पंप चलाए जा रहे हैं। 30 अक्तूबर तक नहर चलेगी। इसके बाद सिल्ट सफाई कराई जाएगी। दिसंबर से नहर चालू कर माइनरों में टेल तक पानी पहुंचाने की कोशिश की जाएगी।
आर के निरंजन, एक्सईएन, सिंचाई
विज्ञापन
प्रमुख नहर में पश्चिमशरीरा के आगे नहीं बढ़ पा रहा पानी
कई हेक्टेयर भूमि के बंजर पड़े रहने का खतरा
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर।
सिंचाई के लिए वरदान कही जाने वाली किशनपुर पंप कैनाल की माइनरों में तीन माह से धूल उड़ रही है। खरीफ की खेती तो किसानों ने किसी तरह कर ली पर रबी में सैकड़ों हेक्टेयर भूमि के बंजर पड़े रहने का खतरा दिख रहा है। प्रमुख नहर में टेल तक पानी न पहुंच पाने से किसानों की मुसीबत बढ़ गई है। इसे लेकर इलाकाई किसान चिंतित हैं।
किशनपुर कैंनाल की माइनरें व रजबहे फसलों की सिंचाई के लिए बेहद मुफीद हैं। 28 माइनरों और छह रजबहों के भरोसे जिले के दक्षिणी हिस्से की 80 फीसदी खेती होती है। इस साल किशनपुर पंप कैनाल किसानों को खरीफ की खेती से दगा दे रही है। जुलाई महीने में धान की रोपाई के दौरान कुछ माइनरों में एक बार पानी छोड़ा गया। रोपाई हो जाने के बाद पश्चिमशरीरा के आगे निकली बंधुरी रसूलीपुर, म्योहर, घोषिया, कनैली, कोड़ारी सहित एक दर्जनभर माइनरों में पानी ही नहीं छोड़ा गया। इसका शिकार बेरौंचा माइनर भी है। धान की कटाई के बाद अब किसान गेहूं की बुवाई के लिए खेतों का पलेवा करना चाह रहे हैं। माइनरों में उड़ रही धूल के चलते खेतों का पलेवा नहीं हो पा रहा है। जिन स्थानों पर नलकूप हैं वहां के किसान तो किसी तरह पलेवा कर ले रहे हैं पर असिंचित एरिया धाने, आइगवां, बेरौचा, गुरौली, दाई का पुरवा सहित दर्जनभर गांवों की सैकड़ो बीघा भूमि के बंजर पड़े रहने का खतरा मंडराने लगा है। इसे लेकर इलाकाई किसान हैरान-परेशान हैं। विभागीय जिम्मेदार हैं कि शासन के टेल तक पानी पहुंचाने के निर्देश को ठेंगा दिखा रहे हैं।
विज्ञापन
इनसेट
सिल्ट सफाई के नाम पर माह भर बंद रहेगी कैनाल
किशनपुर पंप कैनाल खरीफ की खेती शुरू होने के बाद लगातार चल रही है। अगस्त से लेकर अब तक जिम्मेदार लो-वोल्टेज का बहाना बना रहे थे। महज तीन से चार पंप चलने की वजह से माइनरों में पानी नहीं पहुंच रहा था। इधर बीच वोल्टेज में सुधार हुआ तो भी माइनरों में पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। अब विभाग 30 अक्तूबर से पंप बंदकर प्रमुख नहर व माइनरों की सिल्ट सफाई कराएगा। ऐसे में नवंबर माह में भी माइनरों में पानी नहीं पहुंच सकेगा। कुल मिलाकर बुवाई खत्म होने के बाद ही किशनपुर पंप कैनाल की माइनरों व रजबहों में पानी छोड़ा जाएगा। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि विभाग फसलों की सिंचाई को लेकर कितना संजीदा है।
विज्ञापन
क्या कहते हैं अधिकारी
किशनपुर पंप कैनाल के छह पंप चलाए जा रहे हैं। 30 अक्तूबर तक नहर चलेगी। इसके बाद सिल्ट सफाई कराई जाएगी। दिसंबर से नहर चालू कर माइनरों में टेल तक पानी पहुंचाने की कोशिश की जाएगी।
आर के निरंजन, एक्सईएन, सिंचाई