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जिला पंचायत सदस्यों ने अध्यक्ष पर जताया अविश्वास
Updated Sat, 08 Sep 2018 12:50 AM IST
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मंझनपुर। जिला पंचायत अध्यक्ष अनामिका सिंह पटेल पर सदस्यों ने अविश्वास व्यक्त किया है। 29 सदस्यीय सदन के 25 सदस्यों ने शुक्रवार को कलक्ट्रेट में एडीएम को अविश्वास का हलफनामा सौंपा। सदस्यों की अगुवाई पूर्व अध्यक्ष एवं वार्ड 14 की सदस्य मधुपति वाचस्पति ने किया। इसके चलते जिले की सियासत एक बार फिर गरमा गई है।
कौशाम्बी में जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर एक बार फिर शह-मात का खेल शुरू हो गया है। अध्यक्ष अनामिका सिंह पटेल के खिलाफ विरोध कर रहे सदस्यों ने शुक्रवार को खुली मुखालफत करने लगे हैं। पूर्व अध्यक्ष एवं वार्ड नं 14 की सदस्य मधुपति वाचस्पति की अगुवाई में साजन मौर्या, अनिमा सिंह, अश्वनी द्विवेदी, शिवमोहन मौर्या, अंबुज भारतीय, आशीष मौर्या, नरेंद्र मौर्या, स्नेहा सरोज, भोला सरोज समेत 25 सदस्यों ने कलक्ट्रेट पहुंच गए। डीएम मनीष कुमार वर्मा की गैरमौजूदगी में सदस्यों ने एडीएम राकेश श्रीवास्तव को हलफनामा प्रस्तुत कर अविश्वास व्यक्त किया। एडीएम ने मामले को डीएम के संज्ञान में लाने का आश्वासन दिया है।
जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ दाखिल अविश्वास में नगर पालिका भरवारी का पेच फंस सकता है। दरअसल मौजूदा सदन में चुने हुए अंबुज भारतीय, स्नेहा सरोज और संगीता चौधरी जिन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैँ व क्षेत्र अब नगर पालिका भरवारी में शामिल हो गया है। इसलिए मतदान में इनके भाग लेने अथवा न ले पाने को लेकर उहापोह है। पिछले दिनों ब्लॉक प्रमुख जितेंद्र सोनकर के खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव दाखिल किया गया था। इसमें भी कुछ क्षेत्र पंचायत सदस्यों का गांव नगर पालिका भरवारी में होने के कारण इनको लेकर शासन से मार्गदर्शन मांगा गया है। पर, दो महीने बाद भी शासन की ओर से कोई गाइड लाइन नहीं प्राप्त हुई है। इसके चलते सिराथू का मामला अटक गया है। माना जा रहा है कि यही हाल जिला पंचायत अध्यक्ष के अविश्वास का भी हो सकता है।
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चार जनवरी 2016 को मधुपति वाचस्पति ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद की शपथ ली थी। एक साल बाद से ही सदस्यों ने उनका विरोध शुरू कर दिया था। जून 2017 में उनके खिलाफ अविश्वास आया तो मतदान से पहले ही उन्होंने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। उसके बाद हुए चुनाव में अनामिका सिंह अध्यक्ष निर्वाचित हुईं। 28 अगस्त 2017 को शपथ लेने के कुछ दिन बाद से ही अनामिका का भी विरोध शुरू हो गया। सदस्य अविश्वास के लिए जरूरी वक्त एक साल के गुजरने का इंतजार कर रहे थे। समय पूरा होते ही शुक्रवार को पूर्व अध्यक्ष मधुपति ने शिकस्त का बदला लेने के लिए 25 सदस्यों के साथ अविश्वास का हलफनामा प्रस्तुत कर दिया। सालभर पहले धोखा खा चुकी मधुपति वाचस्पति इस बार फूंक-फूंक कर कदम रख रही हैं। उन्होंने जिले की सियासत में तोड़भांज के माहिर एक नेता को कमान सौंप दी है। दरअसल जिनके हाथ कमान सौंपी गई है वह खुद अपने कार्यकाल में अविश्वास का सामना कर चुके हैं। उस दौरान सियासी गुणा-गणित में वह सफल हुए थे। मधुपति उनके इसी अनुभव के सहारे नैया पार कराने की रणनीति में है।
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कौशाम्बी में जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर एक बार फिर शह-मात का खेल शुरू हो गया है। अध्यक्ष अनामिका सिंह पटेल के खिलाफ विरोध कर रहे सदस्यों ने शुक्रवार को खुली मुखालफत करने लगे हैं। पूर्व अध्यक्ष एवं वार्ड नं 14 की सदस्य मधुपति वाचस्पति की अगुवाई में साजन मौर्या, अनिमा सिंह, अश्वनी द्विवेदी, शिवमोहन मौर्या, अंबुज भारतीय, आशीष मौर्या, नरेंद्र मौर्या, स्नेहा सरोज, भोला सरोज समेत 25 सदस्यों ने कलक्ट्रेट पहुंच गए। डीएम मनीष कुमार वर्मा की गैरमौजूदगी में सदस्यों ने एडीएम राकेश श्रीवास्तव को हलफनामा प्रस्तुत कर अविश्वास व्यक्त किया। एडीएम ने मामले को डीएम के संज्ञान में लाने का आश्वासन दिया है।
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जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ दाखिल अविश्वास में नगर पालिका भरवारी का पेच फंस सकता है। दरअसल मौजूदा सदन में चुने हुए अंबुज भारतीय, स्नेहा सरोज और संगीता चौधरी जिन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैँ व क्षेत्र अब नगर पालिका भरवारी में शामिल हो गया है। इसलिए मतदान में इनके भाग लेने अथवा न ले पाने को लेकर उहापोह है। पिछले दिनों ब्लॉक प्रमुख जितेंद्र सोनकर के खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव दाखिल किया गया था। इसमें भी कुछ क्षेत्र पंचायत सदस्यों का गांव नगर पालिका भरवारी में होने के कारण इनको लेकर शासन से मार्गदर्शन मांगा गया है। पर, दो महीने बाद भी शासन की ओर से कोई गाइड लाइन नहीं प्राप्त हुई है। इसके चलते सिराथू का मामला अटक गया है। माना जा रहा है कि यही हाल जिला पंचायत अध्यक्ष के अविश्वास का भी हो सकता है।
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चार जनवरी 2016 को मधुपति वाचस्पति ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद की शपथ ली थी। एक साल बाद से ही सदस्यों ने उनका विरोध शुरू कर दिया था। जून 2017 में उनके खिलाफ अविश्वास आया तो मतदान से पहले ही उन्होंने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। उसके बाद हुए चुनाव में अनामिका सिंह अध्यक्ष निर्वाचित हुईं। 28 अगस्त 2017 को शपथ लेने के कुछ दिन बाद से ही अनामिका का भी विरोध शुरू हो गया। सदस्य अविश्वास के लिए जरूरी वक्त एक साल के गुजरने का इंतजार कर रहे थे। समय पूरा होते ही शुक्रवार को पूर्व अध्यक्ष मधुपति ने शिकस्त का बदला लेने के लिए 25 सदस्यों के साथ अविश्वास का हलफनामा प्रस्तुत कर दिया। सालभर पहले धोखा खा चुकी मधुपति वाचस्पति इस बार फूंक-फूंक कर कदम रख रही हैं। उन्होंने जिले की सियासत में तोड़भांज के माहिर एक नेता को कमान सौंप दी है। दरअसल जिनके हाथ कमान सौंपी गई है वह खुद अपने कार्यकाल में अविश्वास का सामना कर चुके हैं। उस दौरान सियासी गुणा-गणित में वह सफल हुए थे। मधुपति उनके इसी अनुभव के सहारे नैया पार कराने की रणनीति में है।