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शीतलहर से बढ़ी गलन, कांप रहे लोग
Updated Tue, 02 Jan 2018 12:42 AM IST
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शीतलहर से ठिठुरा कौशाम्बी
जनजीवन प्रभावित, सड़कों पर पसरा रहा सन्नाटा
ठंड से बचने के लिए घरों में दुबकने को मजबूर हुए लोग
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। जिले में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। चार दिन से भगवान भाष्कर के दर्शन न होने और शीतलहर चलने से लोगों के हाड़ तक कांप रहे हैं। ठंड से जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा। लोग घरों में दुबके रहे। इसके चलते बाजारों और सड़कों पर दिन भर सन्नाटा पसरा रहा। गर्म कपड़ने पहनने के बाद भी राहत न मिलने पर लोग अलाव या रजाई का सहारा लेते देखे गए।
नववर्ष की पहली सुबह दोआबा में कड़ाके की ठंड लेकर आई। शीतलहर ने लोगों के हाड़ तक कंपा दिए। गर्म कपड़ों से पूरे बदन को ढंककर लोग नया साल मनाने के लिए सड़कों पर निकलना चाहा लेकिन ठंड ने उन्हें घराें में दुबकने को मजबूर कर दिया। गर्म कपड़ों में भी राहत नहीं मिलने पर लोग घरों में अलाव तापते रहे या रजाई में लिपटे नजर आए। मौसम विभाग के आंकड़ों पर जाएं तो पारा 10 डिग्री के नीचे रहा। धूप न निकलने और सर्द हवाओं के चलने से ठंड पूरे शबाब पर है। कड़के की ठंड से सोमवार को जनजीवन पूरी तरह प्रभावित दिखा तो कस्बों और गांवों की सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। इसका असर मवेशियों पर भी तेजी से पड़ रहा है।
फसलों पर भी दिखने लगा ठंड का असर
ठंड ने जनमानस को तो घरों में कैद ही कर दिया फसलों की भी रौनक छीन रही है। खेतों में बोए गए आलू की पछेती खेती धूप न निकलने और कोहरे की बूंदे पौधों को झुलसा रही हैं। आलू के अलावा सरसों और अरहर की फसलें भी फूल पर हैं। कड़ाके की ठंड और कोहरा से झुलस कर सरसों व अरहर के फूल बगैर परागण के ही गिर रहे हैं। इससे फली लगने में कमी आना तय है। नष्ट हो रही फसलों को देख किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें दिखने लगी हैं।
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चौराहों पर खोजे नहीं मिल रहे अलाव
शीतलहरी से सबसे अधिक फजीहत विक्रम, अप्पे और बस से सफर करने वाले लोगों का है। चौराहों पर पहुंचते ही लोग अलाव की तलाश में भटकने लगते हैं। अलाव न मिलने पर वह चाय पीने के बहाने भट्ठियों में हाथ सेंकने को मजबूर हो रहे हैं। मुख्यालय मंझनपुर हो या सैनी रोडवेज बस स्टॉप पर भी कहीं अलाव नहीं नजर आ रहा है। ऐसे में सफर में ठंड हवाओं का सामना कर प्रमुख बस अड्डों पर उतरने वाले लोगों को राहत नहीं मिल रही है।
गांवों में पत्ते जलाकर ठंड दूर कर रहे गरीब
पारा लुढ़कते ही ठंड पूरे शबाब पर पहुंच गई है। बढ़ी ठंड देख ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीब बचाव के लिए आम व महुआ की पत्तियां बटोर कर घर ला रहे हैं। इन पत्तियों को जलाकर ठंड भगाने का प्रयास किया जा रहा है। गांवों में अलाव का इंतजाम नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है।
क्या कहते हैं अधिकारी
अलाव जलवाने के लिए तीनों तहसीलों में डेढ़ लाख की लकड़ी खरीदी गई थी। तहसील प्रशासन को इसे चिन्हित स्थान पर जलवाने का निर्देश दिया गया था। जरूरतमंद को कंबल भी बंटवाए जा रहे हैं।
राकेश कुमार श्रीवास्तव, एडीएम
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जनजीवन प्रभावित, सड़कों पर पसरा रहा सन्नाटा
ठंड से बचने के लिए घरों में दुबकने को मजबूर हुए लोग
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। जिले में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। चार दिन से भगवान भाष्कर के दर्शन न होने और शीतलहर चलने से लोगों के हाड़ तक कांप रहे हैं। ठंड से जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा। लोग घरों में दुबके रहे। इसके चलते बाजारों और सड़कों पर दिन भर सन्नाटा पसरा रहा। गर्म कपड़ने पहनने के बाद भी राहत न मिलने पर लोग अलाव या रजाई का सहारा लेते देखे गए।
नववर्ष की पहली सुबह दोआबा में कड़ाके की ठंड लेकर आई। शीतलहर ने लोगों के हाड़ तक कंपा दिए। गर्म कपड़ों से पूरे बदन को ढंककर लोग नया साल मनाने के लिए सड़कों पर निकलना चाहा लेकिन ठंड ने उन्हें घराें में दुबकने को मजबूर कर दिया। गर्म कपड़ों में भी राहत नहीं मिलने पर लोग घरों में अलाव तापते रहे या रजाई में लिपटे नजर आए। मौसम विभाग के आंकड़ों पर जाएं तो पारा 10 डिग्री के नीचे रहा। धूप न निकलने और सर्द हवाओं के चलने से ठंड पूरे शबाब पर है। कड़के की ठंड से सोमवार को जनजीवन पूरी तरह प्रभावित दिखा तो कस्बों और गांवों की सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। इसका असर मवेशियों पर भी तेजी से पड़ रहा है।
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फसलों पर भी दिखने लगा ठंड का असर
ठंड ने जनमानस को तो घरों में कैद ही कर दिया फसलों की भी रौनक छीन रही है। खेतों में बोए गए आलू की पछेती खेती धूप न निकलने और कोहरे की बूंदे पौधों को झुलसा रही हैं। आलू के अलावा सरसों और अरहर की फसलें भी फूल पर हैं। कड़ाके की ठंड और कोहरा से झुलस कर सरसों व अरहर के फूल बगैर परागण के ही गिर रहे हैं। इससे फली लगने में कमी आना तय है। नष्ट हो रही फसलों को देख किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें दिखने लगी हैं।
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चौराहों पर खोजे नहीं मिल रहे अलाव
शीतलहरी से सबसे अधिक फजीहत विक्रम, अप्पे और बस से सफर करने वाले लोगों का है। चौराहों पर पहुंचते ही लोग अलाव की तलाश में भटकने लगते हैं। अलाव न मिलने पर वह चाय पीने के बहाने भट्ठियों में हाथ सेंकने को मजबूर हो रहे हैं। मुख्यालय मंझनपुर हो या सैनी रोडवेज बस स्टॉप पर भी कहीं अलाव नहीं नजर आ रहा है। ऐसे में सफर में ठंड हवाओं का सामना कर प्रमुख बस अड्डों पर उतरने वाले लोगों को राहत नहीं मिल रही है।
गांवों में पत्ते जलाकर ठंड दूर कर रहे गरीब
पारा लुढ़कते ही ठंड पूरे शबाब पर पहुंच गई है। बढ़ी ठंड देख ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीब बचाव के लिए आम व महुआ की पत्तियां बटोर कर घर ला रहे हैं। इन पत्तियों को जलाकर ठंड भगाने का प्रयास किया जा रहा है। गांवों में अलाव का इंतजाम नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है।
क्या कहते हैं अधिकारी
अलाव जलवाने के लिए तीनों तहसीलों में डेढ़ लाख की लकड़ी खरीदी गई थी। तहसील प्रशासन को इसे चिन्हित स्थान पर जलवाने का निर्देश दिया गया था। जरूरतमंद को कंबल भी बंटवाए जा रहे हैं।
राकेश कुमार श्रीवास्तव, एडीएम