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पुरदर्द सदाओं के बीच दफनाए अकीदत के फूल
Updated Sat, 22 Sep 2018 01:02 AM IST
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मंझनपुर/करारी। दस मुहर्रम शुक्रवार को पुरदर्द सदाओं के बीच करबला में अकीदत के फूलों को दफनाया गया। अजाखानों से हाय हुसैन की सदाएं गूंजीं तो पुरदर्द नौहों पर आंखें भी नम हुईं। अजाखानों और इमाम चौक से ताजिया लेकर अजादार ‘या हुसैन अलविदा’ की सदाओं के साथ करबला पहुंचे, जहां अकीदत के फूलों को दफनाने के बाद अजादार करबला के शहीदों का पैगाम लेकर घरों को लौट आए।
सुबह से ही अजाखानों में मजलिस-मातम का सिलसिला शुरू हुआ जो दोपहर तक चला। फिर अजाखानों और इमाम चौक से ताजिया उठाने का सिलसिला शुरू हुआ। अजादार अलविदा, अलविदा, या हुसैन अलविदा पढ़ते हुए करबला की ओर चले। मंझनपुर और सेलरहा में अजादारों ने हैरतअंगेज करतब दिखाए। करारी में सबसे पहले हजरतगंज के सदर इमाम बारगाह से ताजिया उठा। दूसरा हुसैनिया शरीफाबाद और तीसरा ताजिया अंसारगंज के इमाम बारगाह से उठाकर अकीदतमंद करबला चले। पूरे रास्ते अजादारों की ओर से मर्सिया का दौर जारी था।।
वही, नयागंज में जावेद रिजवी, नैयर रिजवी. जवाद हैदर. एहसान हैदर, हसन रिजवी ने मर्सिया, रौशन करारवी ने नौहा पढ़ा। फिर करबला में अकीदत के फूलों को दफनाया गया। भैला मकदूमपुर,संवरो,रक्सवरा,कटरा आदि गांवों में भी मुहर्रम पर ताजिया निकाला गया। गमे हुसैन के तहत शुक्रवार को अंजुमने मोहम्मदिया की सरपरस्ती में ताजिया का जूलूस निकाला। मर्सियाख्वानी आफताब हैदर ने की जबकि मौलाना जफर अब्बास गोरखपुरी ने मजलिस को खिताब किया। इमाम के मसायब सुनकर अजादारों की आंखें नम हुईं। अंजुमने मोहम्मदिया के साहबे बयाज शैजी, सोनू, जफर अब्बास ने नौहाख्वानी की। जुलूस अपने कदीमी रास्ते से होता हुआ पंचायती करबला कलां में जाकर अलविदाई नौहा के साथ पूरा हुआ। पंचायती बड़ा ताजिया के साथ मादपुर, महमूदपुर और फतेहपुर का भी ताजिया पंचायती करबला में दफन हुआ।
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दारानगर गांव में दसवी मुहर्रम का जुलूस अकीदत के साथ उठाया गया। सुबह अलम ताजिया दुलदुल शबीहे ताबूत के साथ करबला पहुंचा। शाम को जुलूस दारानगर बाजार से उठाया गया, जहां जंजीर का मातम और कमाजनी हुई। इस मौके पर मौलाना सैयद जीशान हैदर रिजवी ने तकरीर पेश की। इसके बाद मो अब्बास, गुलाम अब्बास, साहबजादे आदि नौहाख्वानों ने नए नौहे पेश किए। जुलूस अपने कदीमी रास्ते से होता हुआ सैयद वाड़ा दारानगर पहुँचा। जुलूस के साथ-साथ दारानगर चौक, कटरा और शादीपुर के ताजियादार भी ताजिया ले कर चले। जुलूस में अंजुमन असदिया के सदर असद सगीर,कासिम हुसैन,आगा सफदर,आबिद हुसैन ,शमशीर हैदर, मुख्तार मेंहदी, मो बाकर, वसी हैदर आदि शामिल थे। दसवीं मुहर्रम को नगर पालिका भरवारी में नया इमामबाड़ा खल्लाबाद से ताजिया उठाई गई।
ताजिया अपनी कदीमी रास्ते से होते हुए पुरानी बाजार गौरा रोडं पर रखा गया। इसके बाद कर्बला पहुंचकर ताजिया दफन की गई। ताजिया रोही, दरवेशपुर, मुरादपुर, जलालपुर, आदि गांव से भरवारी नगर पालिका में सम्मिलित हुई। इस मौके पर आफताब अहमद, मो अकरम जाका, हाजी महमूद अहमद, अबरार अहमद, वहीद अहमद, महबूब आलम उर्फ सज्जू, मो. असद, मुस्ताक अहमद, गुलाम हुसैन, मो. अकरम, गंगा प्रसाद केसरवानी,कैलाश केसरवानी, जगदीश शिवहरे समेत तमाम हिंदू मुसलमान शामिल हुए। मूरतगंज कस्बा समेत इलाके में शुक्रवार को कड़ी सुरक्षा के बीच मुहर्रम मनाया गया। सैता, शेरगढ पल्हाना, पठनपुरवा, कशिया पूर्व, बलियावॉ, मितवापुर, सकाढा, धन्नी, छोटी धन्नी, पट्टी परवेजाबाद, जलालपुर बोरियो, आलमचन्द्र आदि गांवों में ताजिया का जुलूस निकाला गया। एसडीएम चायल, कई थानों की पुलिस फोर्स के साथ मुस्तैद रहे। कशिया गांव में ताजियादारी को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती गई।
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सुबह से ही अजाखानों में मजलिस-मातम का सिलसिला शुरू हुआ जो दोपहर तक चला। फिर अजाखानों और इमाम चौक से ताजिया उठाने का सिलसिला शुरू हुआ। अजादार अलविदा, अलविदा, या हुसैन अलविदा पढ़ते हुए करबला की ओर चले। मंझनपुर और सेलरहा में अजादारों ने हैरतअंगेज करतब दिखाए। करारी में सबसे पहले हजरतगंज के सदर इमाम बारगाह से ताजिया उठा। दूसरा हुसैनिया शरीफाबाद और तीसरा ताजिया अंसारगंज के इमाम बारगाह से उठाकर अकीदतमंद करबला चले। पूरे रास्ते अजादारों की ओर से मर्सिया का दौर जारी था।।
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वही, नयागंज में जावेद रिजवी, नैयर रिजवी. जवाद हैदर. एहसान हैदर, हसन रिजवी ने मर्सिया, रौशन करारवी ने नौहा पढ़ा। फिर करबला में अकीदत के फूलों को दफनाया गया। भैला मकदूमपुर,संवरो,रक्सवरा,कटरा आदि गांवों में भी मुहर्रम पर ताजिया निकाला गया। गमे हुसैन के तहत शुक्रवार को अंजुमने मोहम्मदिया की सरपरस्ती में ताजिया का जूलूस निकाला। मर्सियाख्वानी आफताब हैदर ने की जबकि मौलाना जफर अब्बास गोरखपुरी ने मजलिस को खिताब किया। इमाम के मसायब सुनकर अजादारों की आंखें नम हुईं। अंजुमने मोहम्मदिया के साहबे बयाज शैजी, सोनू, जफर अब्बास ने नौहाख्वानी की। जुलूस अपने कदीमी रास्ते से होता हुआ पंचायती करबला कलां में जाकर अलविदाई नौहा के साथ पूरा हुआ। पंचायती बड़ा ताजिया के साथ मादपुर, महमूदपुर और फतेहपुर का भी ताजिया पंचायती करबला में दफन हुआ।
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दारानगर गांव में दसवी मुहर्रम का जुलूस अकीदत के साथ उठाया गया। सुबह अलम ताजिया दुलदुल शबीहे ताबूत के साथ करबला पहुंचा। शाम को जुलूस दारानगर बाजार से उठाया गया, जहां जंजीर का मातम और कमाजनी हुई। इस मौके पर मौलाना सैयद जीशान हैदर रिजवी ने तकरीर पेश की। इसके बाद मो अब्बास, गुलाम अब्बास, साहबजादे आदि नौहाख्वानों ने नए नौहे पेश किए। जुलूस अपने कदीमी रास्ते से होता हुआ सैयद वाड़ा दारानगर पहुँचा। जुलूस के साथ-साथ दारानगर चौक, कटरा और शादीपुर के ताजियादार भी ताजिया ले कर चले। जुलूस में अंजुमन असदिया के सदर असद सगीर,कासिम हुसैन,आगा सफदर,आबिद हुसैन ,शमशीर हैदर, मुख्तार मेंहदी, मो बाकर, वसी हैदर आदि शामिल थे। दसवीं मुहर्रम को नगर पालिका भरवारी में नया इमामबाड़ा खल्लाबाद से ताजिया उठाई गई।
ताजिया अपनी कदीमी रास्ते से होते हुए पुरानी बाजार गौरा रोडं पर रखा गया। इसके बाद कर्बला पहुंचकर ताजिया दफन की गई। ताजिया रोही, दरवेशपुर, मुरादपुर, जलालपुर, आदि गांव से भरवारी नगर पालिका में सम्मिलित हुई। इस मौके पर आफताब अहमद, मो अकरम जाका, हाजी महमूद अहमद, अबरार अहमद, वहीद अहमद, महबूब आलम उर्फ सज्जू, मो. असद, मुस्ताक अहमद, गुलाम हुसैन, मो. अकरम, गंगा प्रसाद केसरवानी,कैलाश केसरवानी, जगदीश शिवहरे समेत तमाम हिंदू मुसलमान शामिल हुए। मूरतगंज कस्बा समेत इलाके में शुक्रवार को कड़ी सुरक्षा के बीच मुहर्रम मनाया गया। सैता, शेरगढ पल्हाना, पठनपुरवा, कशिया पूर्व, बलियावॉ, मितवापुर, सकाढा, धन्नी, छोटी धन्नी, पट्टी परवेजाबाद, जलालपुर बोरियो, आलमचन्द्र आदि गांवों में ताजिया का जुलूस निकाला गया। एसडीएम चायल, कई थानों की पुलिस फोर्स के साथ मुस्तैद रहे। कशिया गांव में ताजियादारी को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती गई।