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पुत्रों के दीर्घायु के लिए महिलाओं ने की ललही छठ की पूजा
Updated Sun, 02 Sep 2018 12:25 AM IST
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करारी। दोआबा में ललही छट की पूजा शनिवार को परंपरागत तरीके से की गई। इस मौके पर महिलाओं ने पुत्रों के दीर्घायु के लिए ललही देवी की विधि-विधान से पूजा कर सारा दिन का व्रत रखा। पूजन के बाद ईष्ट मित्रों के घर प्रसाद का वितरण किया गया।
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि ललही छठ के नाम से जानी जाती है। इसे हलषष्ठी व भादौं छठ भी कहते हैं। भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम जी का जन्म भी इसी दिन हुआ था। शनिवार को ललही छठ पर महिलाएं सुबह से ही स्ननादि से निवृत्त होकर पूजन की तैयारी में जुट गईं। चना, अरहर, गेहूं, जौ, जोंधरी, चावल व धान के भूने दाने को मिट्टी के कुढ़वे में भरकर पूजन सामग्री के साथ पूजन स्थल पर गईं। वहां बनाए गए गड्ढे में जल भर कर ललही देवी की विधि-विधान से पूजा किया। इसके बाद गड्ढे के जल से पुत्रों का मुंह धोकर आंचल से पोछा। मान्यता है कि जो स्त्री इस दिन विधि-विधान से व्रत रखकर पूजन करती है। उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। पुत्रों की उम्र लंबी होती है और किसी प्रकार अनिष्ट नहीं होने पाता।
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भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि ललही छठ के नाम से जानी जाती है। इसे हलषष्ठी व भादौं छठ भी कहते हैं। भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम जी का जन्म भी इसी दिन हुआ था। शनिवार को ललही छठ पर महिलाएं सुबह से ही स्ननादि से निवृत्त होकर पूजन की तैयारी में जुट गईं। चना, अरहर, गेहूं, जौ, जोंधरी, चावल व धान के भूने दाने को मिट्टी के कुढ़वे में भरकर पूजन सामग्री के साथ पूजन स्थल पर गईं। वहां बनाए गए गड्ढे में जल भर कर ललही देवी की विधि-विधान से पूजा किया। इसके बाद गड्ढे के जल से पुत्रों का मुंह धोकर आंचल से पोछा। मान्यता है कि जो स्त्री इस दिन विधि-विधान से व्रत रखकर पूजन करती है। उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। पुत्रों की उम्र लंबी होती है और किसी प्रकार अनिष्ट नहीं होने पाता।
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