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लामबंद बीडीसी ने बनाई अविश्वास की रणनीति
Updated Wed, 27 Dec 2017 06:33 PM IST
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लामबंद बीडीसी ने बनाई अविश्वास की रणनीति
दो खेमे में बंटे अविश्वास लाने वाले बीडीसी सदस्य
एक होने के लिए कद्दावरों ने शुरू की गुणा-गणित
कड़ा (ब्यूरो)। ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ बीडीसी सदस्यों की लामबंदी तेज होती जा रही है। मंगलवार को सैनी में एक कद्दावर ने 27 बीडीसी सदस्यों के साथ बैठक की अविश्वास को लेकर सदस्यों में जोश भरा तो दूसरा खेमा भी लगभग 50 बीडीसी के साथ अविश्वास की गुणा-गणित में जुटा है। दोनों खेमे ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास लाने के लिए एक होने की गणित बैठा रहे हैं।
कड़ा ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास को लेकर शुरू हुई लामबंदी अब रफ्तार पकड़ने लगी है। बीडीसी सदस्य दो खेमें में बंटकर अविश्वास की रूप रेखा तैयार कर रहे हैं। मजेदार बात तो यह है कि अविश्वास को लेकर बगवात के स्वर खोलने वाले बीडीसी सदस्य भी दो खेमें में बंटे हैं। मंगलवार को एक खेमे के 27 बीडीसी सदस्यों ने सैनी में अविश्वास को लेकर एक कद्दावार के साथ रणनीति बनाई है। अविश्वास प्रस्ताव लाने से पहले दोनो खेमों को एक करने की कवायद की जा रही है। दोनो खेमें के बीडीसी सदस्यों को एकजुट करने के बाद ही अविश्वास प्रस्ताव के लिए डीएम के समक्ष परेड कराई जाएगी।
दो साल से ठप पांच राजकीय नलकूप, किसान हलाकान
निजी नलकूप से मंहगी सिंचाई करने को मजबूर किसान
-एक हजार एकड़ भूमि पर इन नलकूपों से होती थी खेती
कड़ा (ब्यूरो)। अलग-अलग गांवों में स्थापित पांच राजकीय नलकूप दो साल से बंद पड़े हैं। इन नलकूपों के पानी नहीं उगलने से एक हजार एकड़ भूमि पर सिंचाई का संकट खड़ा हो गया है। मजबूर होकर किसानों को मंहगी सिंचाई करनी पड़ रहा है या फिर वह अपने खेतों में असिंचित फसलों की बुवाई कर रहे हैं।
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कड़ा ब्लॉक अन्तर्गत कमालपुर स्थित 24 के, ननमई का 27 के, गनपा का 28 के, शहजादपुर का 30 के व सैनी का छह के राजकीय नलकूप का बोर लगभग दो साल से ब्रस्ट है। इन राजकीय नलकूपों से इलाके के सैकड़ों किसान लगभग एक हजार एकड़ भूमि पर बोई जाने वाली फसलों की सिंचाई करते थे। नलकूप के बंद होने के बाद से इलाकाई किसानों को निजी नलकूपों से महंगी सिंचाई करनी पड़ रही है। कुछ किसान हैं जो समय पर निजी नलकूपों से पानी न मिलने के कारण अपने खेतों में धान, गेहूं की जगह अरहर, ज्वार, बाजरा, चना आदि असिंचित फसलों की बुवाई करने लगे हैं। कमालपुर के किसान जीवन साहू, नू खां, सद्दन खां, रामबाबू आदि का कहना है कि नलकूप खराब होने के बाद से उनकी खेती प्रभावित है। निजी नलकूपों से अधिक पैसा देने के बाद भी समय से पानी नहीं मिल पाता। इसके चलते खेतों में असिंचित फसलों की बुवाई करना मजबूरी है। विभागीय जिम्मेदार हैं कि वह किसानों की समस्याओं को लेकर तनिक भी संजीदा नहीं दिख रहे हैं।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
बर्स्ट बोर वाले राजकीय नलकूपों की रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। बजट का इंतजार किया जा रहा है। धनराशि मिलने के बाद ही ब्रस्ट बोर वाले नलकूपों की बोरिंग हो सकेगी।
एके सिंह, जेई राजकीय नलकूप, कड़ा
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दो खेमे में बंटे अविश्वास लाने वाले बीडीसी सदस्य
एक होने के लिए कद्दावरों ने शुरू की गुणा-गणित
कड़ा (ब्यूरो)। ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ बीडीसी सदस्यों की लामबंदी तेज होती जा रही है। मंगलवार को सैनी में एक कद्दावर ने 27 बीडीसी सदस्यों के साथ बैठक की अविश्वास को लेकर सदस्यों में जोश भरा तो दूसरा खेमा भी लगभग 50 बीडीसी के साथ अविश्वास की गुणा-गणित में जुटा है। दोनों खेमे ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास लाने के लिए एक होने की गणित बैठा रहे हैं।
कड़ा ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास को लेकर शुरू हुई लामबंदी अब रफ्तार पकड़ने लगी है। बीडीसी सदस्य दो खेमें में बंटकर अविश्वास की रूप रेखा तैयार कर रहे हैं। मजेदार बात तो यह है कि अविश्वास को लेकर बगवात के स्वर खोलने वाले बीडीसी सदस्य भी दो खेमें में बंटे हैं। मंगलवार को एक खेमे के 27 बीडीसी सदस्यों ने सैनी में अविश्वास को लेकर एक कद्दावार के साथ रणनीति बनाई है। अविश्वास प्रस्ताव लाने से पहले दोनो खेमों को एक करने की कवायद की जा रही है। दोनो खेमें के बीडीसी सदस्यों को एकजुट करने के बाद ही अविश्वास प्रस्ताव के लिए डीएम के समक्ष परेड कराई जाएगी।
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दो साल से ठप पांच राजकीय नलकूप, किसान हलाकान
निजी नलकूप से मंहगी सिंचाई करने को मजबूर किसान
-एक हजार एकड़ भूमि पर इन नलकूपों से होती थी खेती
कड़ा (ब्यूरो)। अलग-अलग गांवों में स्थापित पांच राजकीय नलकूप दो साल से बंद पड़े हैं। इन नलकूपों के पानी नहीं उगलने से एक हजार एकड़ भूमि पर सिंचाई का संकट खड़ा हो गया है। मजबूर होकर किसानों को मंहगी सिंचाई करनी पड़ रहा है या फिर वह अपने खेतों में असिंचित फसलों की बुवाई कर रहे हैं।
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कड़ा ब्लॉक अन्तर्गत कमालपुर स्थित 24 के, ननमई का 27 के, गनपा का 28 के, शहजादपुर का 30 के व सैनी का छह के राजकीय नलकूप का बोर लगभग दो साल से ब्रस्ट है। इन राजकीय नलकूपों से इलाके के सैकड़ों किसान लगभग एक हजार एकड़ भूमि पर बोई जाने वाली फसलों की सिंचाई करते थे। नलकूप के बंद होने के बाद से इलाकाई किसानों को निजी नलकूपों से महंगी सिंचाई करनी पड़ रही है। कुछ किसान हैं जो समय पर निजी नलकूपों से पानी न मिलने के कारण अपने खेतों में धान, गेहूं की जगह अरहर, ज्वार, बाजरा, चना आदि असिंचित फसलों की बुवाई करने लगे हैं। कमालपुर के किसान जीवन साहू, नू खां, सद्दन खां, रामबाबू आदि का कहना है कि नलकूप खराब होने के बाद से उनकी खेती प्रभावित है। निजी नलकूपों से अधिक पैसा देने के बाद भी समय से पानी नहीं मिल पाता। इसके चलते खेतों में असिंचित फसलों की बुवाई करना मजबूरी है। विभागीय जिम्मेदार हैं कि वह किसानों की समस्याओं को लेकर तनिक भी संजीदा नहीं दिख रहे हैं।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
बर्स्ट बोर वाले राजकीय नलकूपों की रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। बजट का इंतजार किया जा रहा है। धनराशि मिलने के बाद ही ब्रस्ट बोर वाले नलकूपों की बोरिंग हो सकेगी।
एके सिंह, जेई राजकीय नलकूप, कड़ा