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आस्था की डुबकी को गंगा घाटों पर उमड़ा जन सैलाब
Updated Mon, 22 Jan 2018 09:08 PM IST
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आस्था की डुबकी को गंगा घाटों पर उमड़ा जन सैलाब
वसंत पंचमी:
दर्जनभर गंगा घाटों पर सवा लाख लोगों ने किया स्नान
जगह-जगह मां सरस्वती वंदना व पूजन का हुआ कार्यक्रम
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। बसंत पंचमी पर्व के मौके पर गंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाने के लिए भक्तों का जन सैलाब उमड़ा। जिले के दर्जनभर गंगा घाटों पर भोर से लेकर शाम तक स्नानार्थियों का तांता लगा रहा। गंगा स्नान के बाद लोगों ने मां सरस्वती का पूजन व अन्न धन दान देकर पुण्य कमाया। इस दौरान शिक्षण संस्थाओं में मां सरस्वती वंदना व पूजन का जगह-जगह कार्यक्रम हुआ।
बसंत पंचमी का पर्व पूरे हिन्दुस्तान में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं पर जाएं तो विष्णु की आज्ञा पाकर ब्रम्हा जी ने मनुष्य योनि की रचना की पर वह सन्नाटे से विह्वल हो उठे। इसके बाद उन्होंने विष्णु से आज्ञा लेकर कमंडल से जल छिड़का तो एक वृक्ष के बीच से अद्भुत शक्ति एक हाथ में वीणा दूसरे हाथ वर मुद्रा में, तीसरे हाथ में पुस्तक व चौथे हाथ में माला लेकर प्रकट हुई। ब्रम्हा जी ने देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे ही वीणा बजा संसार के सभी जीव जंतुओं को जुबान मिल गई। पंचमी के दिन प्रकट हुई देवी मां सरस्वती को इसी लिए वाणी की देवी कहा गया है। इसीलिए इस तिथि को मां सरस्वती के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। इतना ही नहीं इसी दिन से छह ऋतुओं में सबसे प्रिय मौसम वसंत का आगाज होता है और फूलों पर बहार आ जाती है। खेतों में सरसों सोने की तरह चमकने लगती है तो आम के पेड़ों में बौर आने लगते हैं। यानि कि पूरी प्रकृति झूमने लगती है और कणकण खिल उठता है। पर्व के इसी महत्व को देखते हुए भोेर में उठकर लोग गंगा स्नान करते हैं और घरों में वाणी, बुद्धि व संयम की देवी मां सरस्वती की पूजा अर्चना करते हैं। सोमवार को पर्व के मौके पर जिले भर के दर्जन भर गंगा घाटों पहुंचे भक्तों ने आस्था की डुबकी लगाई और मां सरस्वती को पूजन-अर्चन किया। सभी घाटों पर लगभग सवा लाख लोगों ने गंगा स्नान कर पुर्ण्याजन किया।
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वसंत पंचमी:
दर्जनभर गंगा घाटों पर सवा लाख लोगों ने किया स्नान
जगह-जगह मां सरस्वती वंदना व पूजन का हुआ कार्यक्रम
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। बसंत पंचमी पर्व के मौके पर गंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाने के लिए भक्तों का जन सैलाब उमड़ा। जिले के दर्जनभर गंगा घाटों पर भोर से लेकर शाम तक स्नानार्थियों का तांता लगा रहा। गंगा स्नान के बाद लोगों ने मां सरस्वती का पूजन व अन्न धन दान देकर पुण्य कमाया। इस दौरान शिक्षण संस्थाओं में मां सरस्वती वंदना व पूजन का जगह-जगह कार्यक्रम हुआ।
बसंत पंचमी का पर्व पूरे हिन्दुस्तान में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं पर जाएं तो विष्णु की आज्ञा पाकर ब्रम्हा जी ने मनुष्य योनि की रचना की पर वह सन्नाटे से विह्वल हो उठे। इसके बाद उन्होंने विष्णु से आज्ञा लेकर कमंडल से जल छिड़का तो एक वृक्ष के बीच से अद्भुत शक्ति एक हाथ में वीणा दूसरे हाथ वर मुद्रा में, तीसरे हाथ में पुस्तक व चौथे हाथ में माला लेकर प्रकट हुई। ब्रम्हा जी ने देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे ही वीणा बजा संसार के सभी जीव जंतुओं को जुबान मिल गई। पंचमी के दिन प्रकट हुई देवी मां सरस्वती को इसी लिए वाणी की देवी कहा गया है। इसीलिए इस तिथि को मां सरस्वती के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। इतना ही नहीं इसी दिन से छह ऋतुओं में सबसे प्रिय मौसम वसंत का आगाज होता है और फूलों पर बहार आ जाती है। खेतों में सरसों सोने की तरह चमकने लगती है तो आम के पेड़ों में बौर आने लगते हैं। यानि कि पूरी प्रकृति झूमने लगती है और कणकण खिल उठता है। पर्व के इसी महत्व को देखते हुए भोेर में उठकर लोग गंगा स्नान करते हैं और घरों में वाणी, बुद्धि व संयम की देवी मां सरस्वती की पूजा अर्चना करते हैं। सोमवार को पर्व के मौके पर जिले भर के दर्जन भर गंगा घाटों पहुंचे भक्तों ने आस्था की डुबकी लगाई और मां सरस्वती को पूजन-अर्चन किया। सभी घाटों पर लगभग सवा लाख लोगों ने गंगा स्नान कर पुर्ण्याजन किया।
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