फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kaushambi News ›   आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिले स्मार्ट फोन बने खिलौना

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिले स्मार्ट फोन बने खिलौना

Thu, 21 Feb 2019 12:41 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 21 Feb 2019 12:41 AM IST
विज्ञापन
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिले स्मार्ट फोन बने खिलौना
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिले स्मार्ट फोन बने खिलौना
विज्ञापन

तकनीकी जानकारों की लगी लॉटरी, डाटा अपडेट के लिए वसूल रहे पैसे
वर्ष 1987 में भर्ती कार्यकर्ताओं को हाईटेक बनने में छूट रहा पसीना
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को हाईटेक बनाने के लिए दिया गया स्मार्ट फोन खिलौना बन कर रह गया है। मोबाइल पर डाटा इंट्री कराने के लिए कार्यकर्ता जानकारों का सहारा ले रहे हैं। इसके अलावा नौकरी बचाने के लिए बेटा-बेटी अथवा बहू से मोबाइल पर डाटा इंट्री करा रहा है।
जिले में वर्ष 1987 में आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थापना की गई। उस दौरान कक्षा आठ पास को भी आंगनबाड़ी में कार्यकर्ता की नौकरी मिल जाती थी। इसके बाद मेरिट आधारित भर्ती होने लगी। इसमें भी न्यूनतम योग्यता इंटर पास रखी गई थी। जिले में मौजूदा समय 1775 पद के सापेक्ष 1657 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं। इसमें से ज्यादातर सबसे पहले हुई भर्ती के हैं। पिछले दिनों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को स्मार्ट फोन थमा दिया गया। यह मोबाइल फोन आंगनबाड़ी के सारे डाटा को ऑटोमेटिक अपडेट करता है। बस इसके लिए कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर परिवार के मुखिया व उसके सदस्यों की उम्र समेत संख्या फीड करनी होगी। यह सारी अपलोडिंग ऑन लाइन होगी। ऐसे में पुराने कार्यकर्ताओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कार्यकर्ताओं में किसी का बेटा तो किसी की बेटी मोबाइल एप पर अपलोडिंग कर रही हैं। बहू भी किसी कार्यकर्ता के नौकरी का सहारा बनी है। इसके अलावा जिन लोगों के यहां इस तरह के जानकार नहीं है वे मोबाइल फोन के जानकारों को सहारा ले रहे हैं।
विज्ञापन

इंसेट
पांच सौ से लेकर एक हजार तक सर्वे का ठेका
मंझनपुर। इन दिनों पहले चरण में आंगनबाड़ी केंद्र के तहत आने वाले परिवारों का सर्वे किया जा रहा है। परिवार के मुखिया व उसके सदस्यों का नाम व जन्मतिथि फीड की जा रही है। इसके लिए कार्यकर्ता को घर-घर जाना होता है। बताया जाता हे कि कार्यकर्ताओं ने इस काम का ठेका दे रखा है। पढ़े-लिखे और इंटरनेट के जानकार पांच सौ से एक हजार रुपये में ठेका लेकर सर्वे का काम कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

इंसेट
मैनुअल से ज्यादा होगी सहूलियत
मंझनपुर। बाल विकास विभाग के जिम्मेदारों का कहना है कि पहले आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को यह सारा काम रजिस्टर पर करना होता था। इसके लिए 12 से 14 रजिस्टर बनाए जाते थे। अब यह काम मोबाइल फोन करेगा। एक बार डाटा फीड होने के बाद किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी। पुष्टाहार वितरण करने के बाद मोबाइल पर डाउन साफ्टवेयर खुद बता देगा कि केंद्र पर कितना स्टाक बचा है। इसके अलावा जन्मतिथि भी ऑटोमेटिक अपडेट होती रहेगी।

वर्जन
मोबाइल फोन पर आईसीडीएस का विशेष प्रोग्राम अपलोड है। इससे कार्यकर्ताओं को कई-कई रजिस्टर नहीं बनाना पड़ेगा। फोन चलाना आसान है। कार्यकर्ताओं को फोन चलाने की ट्रेनिंग दी गई है।
राकेश मिश्र, जिला कार्यक्रम अधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed