{"_id":"699718944f5aa86bf704d2f8","slug":"victim-mother-said-that-hope-of-justice-has-increased-now-due-to-supreme-court-order-2026-02-19","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"UP: 'सलवार का नाला तोड़ना दुष्कर्म की कोशिश', SC के फैसले पर पीड़िता की मां बोली- अब न्याय की उम्मीद बढ़ी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP: 'सलवार का नाला तोड़ना दुष्कर्म की कोशिश', SC के फैसले पर पीड़िता की मां बोली- अब न्याय की उम्मीद बढ़ी
Thu, 19 Feb 2026 08:00 PM IST
अरुन पाराशर
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
Published by: अरुन पाराशर
Updated Thu, 19 Feb 2026 08:00 PM IST
सार
युवकों ने 14 वर्षीय किशोरी के साथ अश्लील हरकत की थी। किशोरी की सलवार का नाड़ा तोड़कर दुष्कर्म की कोशिश की। रास्ते से निकले सतीश और भूरे ने युवकों को टोका तो आरोपी तमंचा दिखाकर उन्हें भयभीत कर भाग गए थे।
विज्ञापन
आदेश
- फोटो : ANI
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द दिया, जिसमें कासगंज की एक किशोरी के मामले में हाईकोर्ट ने दो आरोपियों के खिलाफ दुष्कर्म के प्रयास के आरोपों को कम गंभीर अपराध में बदल दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने महिला के निजी अंग पकड़ने, नाड़ा खोलने और उसे नाले के नीचे घसीटने की हरकतों को दुष्कर्म का प्रयास नहीं, बल्कि तैयारी माना था, जो कि गलत था। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों आरोपियों के खिलाफ ट्रायल कोर्ट की ओर से तय दुष्कर्म के प्रयास के आरोपों को बहाल कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट के हाईकोर्ट का फैसला पलटने पर कासगंज निवासी पीड़िता की मां ने संतोष जाहिर किया। किशोरी की मां ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से हमें न्याय मिला है। सुप्रीम कोर्ट का बहुत-बहुत धन्यवाद है। हाईकोर्ट से जब हमारा केस कमजोर हो गया था तो हम अकेले पड़ गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने ही मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए हमें सहारा दिया। हमें दोबारा न्याय का भरोसा दिलाया। अब सुप्रीम कोर्ट की ओर से हाईकोर्ट का फैसला पलटने पर हमें संतोष महसूस हो रहा है। अब बिटिया को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। हम उसे न्याय दिलाकर ही दम लेंगे।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट के हाईकोर्ट का फैसला पलटने पर कासगंज निवासी पीड़िता की मां ने संतोष जाहिर किया। किशोरी की मां ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से हमें न्याय मिला है। सुप्रीम कोर्ट का बहुत-बहुत धन्यवाद है। हाईकोर्ट से जब हमारा केस कमजोर हो गया था तो हम अकेले पड़ गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने ही मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए हमें सहारा दिया। हमें दोबारा न्याय का भरोसा दिलाया। अब सुप्रीम कोर्ट की ओर से हाईकोर्ट का फैसला पलटने पर हमें संतोष महसूस हो रहा है। अब बिटिया को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। हम उसे न्याय दिलाकर ही दम लेंगे।
विज्ञापन
ये था पूरा मामला
10 नवंबर 2021 को किशोरी जब अपनी मां के साथ गांव जा रही थी, तभी दो जानकार युवकों ने किशोरी को गांव तक छोड़ने के बहाने अपनी बाइक पर बैठा लिया था। बाइक पर किशोरी को अपने साथ ले जाने वाले युवक पवन निवासी ब्रिसिंगपुर, आकाश निवासी उतरना ने सरावल से खजुरा मार्ग पर पुलिया के पास बाइक रोक ली थी और 14 वर्षीय किशोरी के साथ अश्लील हरकत की थी। किशोरी की सलवार का नाड़ा तोड़कर दुष्कर्म की कोशिश की। रास्ते से निकले सतीश और भूरे ने युवकों को टोका तो आरोपी तमंचा दिखाकर उन्हें भयभीत कर भाग गए थे।
10 नवंबर 2021 को किशोरी जब अपनी मां के साथ गांव जा रही थी, तभी दो जानकार युवकों ने किशोरी को गांव तक छोड़ने के बहाने अपनी बाइक पर बैठा लिया था। बाइक पर किशोरी को अपने साथ ले जाने वाले युवक पवन निवासी ब्रिसिंगपुर, आकाश निवासी उतरना ने सरावल से खजुरा मार्ग पर पुलिया के पास बाइक रोक ली थी और 14 वर्षीय किशोरी के साथ अश्लील हरकत की थी। किशोरी की सलवार का नाड़ा तोड़कर दुष्कर्म की कोशिश की। रास्ते से निकले सतीश और भूरे ने युवकों को टोका तो आरोपी तमंचा दिखाकर उन्हें भयभीत कर भाग गए थे।
किशोरी के परिजनों ने सिढ़पुरा थाने में शिकायत की थी, लेकिन पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज नहीं की थी। इसके बाद परिवार के लोग न्यायालय की शरण में पहुंचे थे। किशोरी की मां ने न्यायालय विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट के यहां 12 जनवरी 2022 को दंड संहिता की धारा 156/3 के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए प्रार्थना पत्र दिया। न्यायालय ने इसका परिवाद 21 मार्च 2022 को दर्ज कर लिया था। 23 जून 2023 को दुष्कर्म की धारा 376, पॉक्सो एक्ट की धारा 18, धारा 504, 506 के अंतर्गत आरोपी पवन व आकाश को न्यायालय में तलब किया।
जिसके बाद आरोपी हाईकोर्ट की शरण में चले गए थे। हाईकोर्ट ने 17 मार्च 2025 को दिए फैसले में कहा था कि स्तन पकड़ने और नाड़ा तोड़ने मात्र से दुष्कर्म या दुष्कर्म के प्रयास का अपराध स्वत: सिद्ध नहीं होता। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट की टिप्पणियों को असंवेदशील व अमानवीय दृष्टिकोण बताया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर व्यापक दिशा-निर्देश तैयार करने को कहा है।
ये भी पढ़ें-आगरा में दर्दनाक हादसा: सड़क पर गड्ढे के चलते गिरा बाइक सवार, रॉन्ग साइड आ रहे ट्रक ने राैंदा; माैके पर माैत
ये भी पढ़ें-आगरा में दर्दनाक हादसा: सड़क पर गड्ढे के चलते गिरा बाइक सवार, रॉन्ग साइड आ रहे ट्रक ने राैंदा; माैके पर माैत