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Kasganj News: तीखेपन का कमाल...पीली मिर्च कर रही लाल
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पंकज पाराशरी
सोरोंजी। तीर्थनगरी में उगाई जा रही पीली मिर्च अपने तीखे स्वाद से लोगों के आंख और कान लाल कर रही है। यही वजह है कि मसाला कंपनियाें में इसकी मांग बढ़ गई है। तीखे स्वाद, गंध और उच्च गुणवत्ता वाली इस मिर्च को खरीदने के लिए कई राज्यों के व्यापारी यहां पहुंच रहे हैं। कछला गेट से सटे बरेली-आगरा हाईवे पर लगने वाली मिर्च मंडी में राैनक बढ़ गई है। सोरोंजी के किसान लाल और पीली, दोनों प्रकार की मिर्च की खेती करते हैं। लाल मिर्च घरों और होटलों में खाना बनाते समय तड़का लगाने के काम आती है जबकि पीली मिर्च का मुख्य उपयोग नमकीन और मसालों में मिलाने के लिए किया जाता है। अपने इसी व्यावसायिक उपयोग के कारण पीली के सामने लाल मिर्च की चमक फीकी पड़ रही है। यही वजह है कि पीली मिर्च, लाल की अपेक्षा महंगी बिक रही है।
इस साल मंडी में गत वर्ष के मुकाबले मिर्च के रेट में कोई खास वृद्धि नहीं हुई है। मंडी में लाल मिर्च 11 हजार रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है, वहीं पीली मिर्च का भाव 17 हजार रुपये प्रति क्विंटल है। मसाला और नमकीन बनाने वाली बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधि मंडी पहुंचकर उच्च गुणवत्ता वाली इस मिर्च की जमकर खरीदारी कर रहे हैं। नगला खुशहाली निवासी किसान रविंद्र मौर्य ने बताया कि मिर्च की पौध लहसुन की बुवाई के समय (दिवाली के आसपास) ही लगा दी जाती है, जो जुलाई में पककर तैयार हो जाती है। साल में एक बार ही, करीब एक महीने के लिए मिर्च का यह बड़ा व्यापार होता है।
मिर्च व्यापारी करन सिंह ने बताया कि सोरोंजी के न्योली, श्यामसर, रामनगर, नगला सेडू, मिलकनियां, बहादुरनगर, शाहपुर माफी, गऊपुरा, दतलाना, कादरवाड़ी, पाठकपुर, ठठेरपुर, फतेहपुर, पटकिया, होड़लपुर, फरीदनगर, आनंदीपुर, हिमायूंपुर और नगला भूतल आदि गांवों में किसान बड़े पैमाने पर मिर्च की खेती करते हैं।
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सोरोंजी। तीर्थनगरी में उगाई जा रही पीली मिर्च अपने तीखे स्वाद से लोगों के आंख और कान लाल कर रही है। यही वजह है कि मसाला कंपनियाें में इसकी मांग बढ़ गई है। तीखे स्वाद, गंध और उच्च गुणवत्ता वाली इस मिर्च को खरीदने के लिए कई राज्यों के व्यापारी यहां पहुंच रहे हैं। कछला गेट से सटे बरेली-आगरा हाईवे पर लगने वाली मिर्च मंडी में राैनक बढ़ गई है। सोरोंजी के किसान लाल और पीली, दोनों प्रकार की मिर्च की खेती करते हैं। लाल मिर्च घरों और होटलों में खाना बनाते समय तड़का लगाने के काम आती है जबकि पीली मिर्च का मुख्य उपयोग नमकीन और मसालों में मिलाने के लिए किया जाता है। अपने इसी व्यावसायिक उपयोग के कारण पीली के सामने लाल मिर्च की चमक फीकी पड़ रही है। यही वजह है कि पीली मिर्च, लाल की अपेक्षा महंगी बिक रही है।
इस साल मंडी में गत वर्ष के मुकाबले मिर्च के रेट में कोई खास वृद्धि नहीं हुई है। मंडी में लाल मिर्च 11 हजार रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है, वहीं पीली मिर्च का भाव 17 हजार रुपये प्रति क्विंटल है। मसाला और नमकीन बनाने वाली बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधि मंडी पहुंचकर उच्च गुणवत्ता वाली इस मिर्च की जमकर खरीदारी कर रहे हैं। नगला खुशहाली निवासी किसान रविंद्र मौर्य ने बताया कि मिर्च की पौध लहसुन की बुवाई के समय (दिवाली के आसपास) ही लगा दी जाती है, जो जुलाई में पककर तैयार हो जाती है। साल में एक बार ही, करीब एक महीने के लिए मिर्च का यह बड़ा व्यापार होता है।
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मिर्च व्यापारी करन सिंह ने बताया कि सोरोंजी के न्योली, श्यामसर, रामनगर, नगला सेडू, मिलकनियां, बहादुरनगर, शाहपुर माफी, गऊपुरा, दतलाना, कादरवाड़ी, पाठकपुर, ठठेरपुर, फतेहपुर, पटकिया, होड़लपुर, फरीदनगर, आनंदीपुर, हिमायूंपुर और नगला भूतल आदि गांवों में किसान बड़े पैमाने पर मिर्च की खेती करते हैं।
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