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Kasganj News: जिला कारागार में सात कुष्ठ रोगी मिले, कुल 18 चिह्नित
Sat, 21 Mar 2026 12:41 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
Updated Sat, 21 Mar 2026 12:41 AM IST
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कासगंज। जिला कारागार में सात कुष्ठ रोगियों की पहचान होने से स्वास्थ्य विभाग में हलचल है। जिले में चल रहे विशेष अभियान के तहत अब तक कुल 18 मरीज चिह्नित किए जा चुके हैं। यह अभियान 23 मार्च तक जारी रहेगा।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजीव अग्रवाल ने बताया कि कुष्ठ रोगियों की खोज के लिए विशेष अभियान चल रहा है। जिला कारागार में लगाए गए जांच शिविर में सात मरीज मिले हैं। अभियान के दौरान कुल 18 नए रोगियों की पहचान हुई है जिनका उपचार शुरू कर दिया गया है। कुष्ठ रोग माइकोबैक्टीरियम लेप्रे नामक जीवाणु से फैलने वाला संक्रामक रोग है। यह संक्रमित व्यक्ति से सांस के जरिए दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है। समय पर इलाज से यह रोग पूरी तरह ठीक हो सकता है, पर देरी से दिव्यांगता का खतरा बढ़ता है। अभियान के तहत टीमें घर-घर जाकर लोगों की जांच कर रही हैं। पुष्टि होने पर छह माह से एक वर्ष तक आवश्यकतानुसार उपचार दिया जाएगा। सीएमओ ने बताया कि शरीर पर हल्के, चपटे और फीके धब्बे दिखें, जिनमें खुजली न हो और सुन्नता महसूस हो तो यह कुष्ठ का प्रारंभिक लक्षण हो सकता है। इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर इसका निशुल्क उपचार उपलब्ध है।
ये अंग होते हैं प्रभावित
कुष्ठ रोग परिधीय तंत्रिका तंत्र, त्वचा, आंखों, हड्डियों, जोड़ों, श्लेष्मा झिल्ली, मांसपेशियों, वृषण और अधिवृक्क ग्रंथियों को प्रभावित कर सकता है।
रोग के प्रमुख लक्षण
-शरीर पर ठीक न होने वाले दाग-धब्बे
-धब्बों में खुजली या पसीना न आना
-हथेली, तलवों और धब्बों का सुन्न होना
-चेहरे या कान के आसपास बिना दर्द की गांठ या सूजन
-हल्के और फीके रंग के चपटे धब्बे
-पैरों के तलवों में बिना दर्द के घाव
-मांसपेशियों में कमजोरी
-छाती पर बड़े या असामान्य रंग के निशान
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजीव अग्रवाल ने बताया कि कुष्ठ रोगियों की खोज के लिए विशेष अभियान चल रहा है। जिला कारागार में लगाए गए जांच शिविर में सात मरीज मिले हैं। अभियान के दौरान कुल 18 नए रोगियों की पहचान हुई है जिनका उपचार शुरू कर दिया गया है। कुष्ठ रोग माइकोबैक्टीरियम लेप्रे नामक जीवाणु से फैलने वाला संक्रामक रोग है। यह संक्रमित व्यक्ति से सांस के जरिए दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है। समय पर इलाज से यह रोग पूरी तरह ठीक हो सकता है, पर देरी से दिव्यांगता का खतरा बढ़ता है। अभियान के तहत टीमें घर-घर जाकर लोगों की जांच कर रही हैं। पुष्टि होने पर छह माह से एक वर्ष तक आवश्यकतानुसार उपचार दिया जाएगा। सीएमओ ने बताया कि शरीर पर हल्के, चपटे और फीके धब्बे दिखें, जिनमें खुजली न हो और सुन्नता महसूस हो तो यह कुष्ठ का प्रारंभिक लक्षण हो सकता है। इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर इसका निशुल्क उपचार उपलब्ध है।
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ये अंग होते हैं प्रभावित
कुष्ठ रोग परिधीय तंत्रिका तंत्र, त्वचा, आंखों, हड्डियों, जोड़ों, श्लेष्मा झिल्ली, मांसपेशियों, वृषण और अधिवृक्क ग्रंथियों को प्रभावित कर सकता है।
रोग के प्रमुख लक्षण
-शरीर पर ठीक न होने वाले दाग-धब्बे
-धब्बों में खुजली या पसीना न आना
-हथेली, तलवों और धब्बों का सुन्न होना
-चेहरे या कान के आसपास बिना दर्द की गांठ या सूजन
-हल्के और फीके रंग के चपटे धब्बे
-पैरों के तलवों में बिना दर्द के घाव
-मांसपेशियों में कमजोरी
-छाती पर बड़े या असामान्य रंग के निशान