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यज्ञ से हाेते हैं इतने फायदे, शायद आपको न पता हो
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 04 Dec 2017 05:54 PM IST
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यज्ञ को सनातन संस्कृति में बहुत अधिक महत्व दिया गया है। आध्यात्मिक दृष्टि के साथ साथ ये शारीरिक और मानसिक लाभ भी पहुँचाते हैं। पाैराणिक कथाअाें में यज्ञ के माध्यम से निसन्तानो को संतान और कुरूप या रोगी को स्वस्थग और रूपवान जैसे विभिन्न कार्य सिद्ध किये।
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यज्ञ के बिना मानव जीवन निष्क्रिय है- महामंडलेश्वर
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हरदाेई जिले के भीखपुर ग्राम में चल रहे यज्ञ में कनखल हरिद्वार से आए स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती महाराज महामंडलेश्वर ने कहा यज्ञ के बिना मानव जीवन निष्क्रिय है। इससे समस्त भौतिक क्रियाओं का निष्पादन किया जा सकता है।
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यज्ञ से प्राप्त होती है बल और बुद्धि
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उन्हाेंने कहा सनातन संस्कृति में वसुधैव कुटुंबकम की आत्मा बसी है। उन्होंने कहा कि यज्ञ से बल और बुद्धि प्राप्त होती है। महामंडलेश्वर ने कहा कि हमें समय-समय पर यज्ञ करना चाहिए। प्रभु परम स्वरूप में जब आते हैं तो कहीं ना कहीं यज्ञ का प्रभाव होता है।
भारतीय संस्कृति में विराजती है वसुधैव कुटुंबकम की आत्मा
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स्वामी ने कहा कि वर्तमान में लोगों को अपनी आस्था व ऐतिहासिक समृद्धि, संस्कृति पर विश्वास ही नहीं रहा है। ये भारतीय सभ्यता और संस्कृति के लिए हानिकारक है। भारतीय संस्कृति में वसुधैव कुटुंबकम की आत्मा विराजती है।
यज्ञ के पीछे एक सांइटिफिक कारण होता है
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सनातन धर्म ही ऐसा धर्म है जो लोगों को बांटने की बजाए जोड़ता है। उन्हाेंने कहा यज्ञ के पीछे एक सांइटिफिक कारण होता है क्योंकि यज्ञ में सब जड़ी बूटियां ही डाली जाती हैं। आम की लकड़ी, देशी घी, तिल, जौं, शहद, कपूर, अगर तगर, गुग्गुल, लौंग, अक्षत, नारियल शक्कर और अन्य निर्धारित आहूतियां भी बनस्पतियां ही होती है।
आंतरिक बाह्य और मानसिक शुद्धि भी होती है
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नवग्रह के लिए आक, पलाश, खैर, शमी, आपामार्ग, पीपल, गूलर, कुश, दूर्वा आदि सब आयुर्वेद में प्रतिष्ठित अाैषधियां हैं। यज्ञ करने पर मंत्राेचार के द्वारा न सिर्फ ये और अधिक शक्तिशाली हो जाती हैं बल्कि मंत्राचार और इन जड़ी-बूटियों के धुएं से यज्ञकर्ता, रोगी की आंतरिक बाह्य और मानसिक शुद्धि भी होती है।
शारीरिक बल तथा सकारात्मक ऊर्जा भी मिलती है
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साथ ही मानसिक और शारीरिक बल तथा सकारात्मक ऊर्जा भी मिलती है। सभी वनस्पतियों में कुछ तरल, तैलीय द्रव्य होते हैं जिन्हे विज्ञानं की भाषा में एल्केलॉइड कहा जाता है। आज वैज्ञानिक इन्ही एल्केलॉइड पर शोध कर विभिन्न पौधों से कई नई दवाइयां बना रहे हैं।
हवन के धुएं से कई रोगों में ज्यादा फायदा होता है
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मनुष्य को दी जाने वाली तमाम तरह की दवाओं की तुलना में औषधीय जड़ी बूटियां और औषधियुक्त हवन के धुएं से कई रोगों में ज्यादा फायदा होता है। हवन में जब ये वनस्पतियां जलती हैं तो ये एल्केलॉइड्स धुएं के साथ उड़ कर अापके शरीर से चिपक जाते हैं और श्वास से भीतर जाते हैं।