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Kanpur News: 48 घंटे में 4.47 मीटर बढ़ा यमुना का जलस्तर, कटान शुरू

Wed, 09 Sep 2026 01:44 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर Updated Wed, 09 Sep 2026 01:44 AM IST
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Yamuna water level rises by 4.47 meters in 48 hours; erosion begins.
राजपुर। चंबल नदी के कैचमेंट क्षेत्र में हो रही लगातार बारिश से यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। मंगलवार सुबह आठ बजे तक 48 घंटे में 4.47 मीटर जलस्तर बढ़ गया है। इससे नदी किनारे की तरफ मिट्टी कटाव शुरू हो गया है। लोगों को फसलों के साथ पशुओं के सुरक्षा की चिंता सताने लगी है। राजस्व टीमों ने ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की है।
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जिला आपदा प्रबंधन कार्यालय के अनुसार मंगलवार सुबह 8 बजे यमुना का जलस्तर 107.21 मीटर दर्ज किया गया। रविवार को यह 102.74 मीटर था। फिलहाल जलस्तर खतरे के निशान से करीब आठ मीटर दूर है। बाढ़ की संभावना को देखते हुए तहसील प्रशासन ने राजस्व टीमों और निगरानी समिति को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। यमुना नदी में अभी और जलस्तर बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
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मंगलवार को राजस्व निरीक्षक सगीर अहमद ने बैजामऊ बांगर गांव का निरीक्षण कर ग्रामीणों से बातचीत कर यमुना के जलस्तर की स्थिति की जानकारी ली। ग्रामीणों को संभावित बाढ़ से बचाव के लिए आवश्यक सावधानियां बरतने को कहा। ग्रामीणों से विशेष रूप से पशुओं की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की अपील की। कहा पशुओं के लिए भूसा, चारा और अन्य आवश्यक सामग्री को निचले स्थानों पर रखने के बजाय ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया जाए।
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जिससे बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने पर पशुओं के सामने चारे की समस्या न आए। तहसीलदार दीपक कुमार ने लेखपालों एवं कानूनगो को यमुना के जलस्तर पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि बाढ़ की स्थिति को लेकर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। यमुना तटवर्ती क्षेत्रों में बाढ़ राहत चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है।
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फोटो- 27 बंदरहा में मंदिर के चारों तरफ जलभराव। संवाद
नाला चोक होने से बंदरहा में तीन मंदिर जलभराव से घिरे
रसूलाबाद। बैरीसाल ग्राम पंचायत का मजरा बंदरहा में नाला चोक होने से संकरी बाबा मंदिर, चौबे बाबा मंदिर और शनि देव बाबा मंदिर के चारों ओर जलभराव है। पानी से होकर कुछ श्रद्धालु की मंदिर में पहुंचकर पूजा कर पा रहे हैं। बंदरहा निवासी नीरज यादव, अवनीश राजपूत, जयराम, विकास शर्मा, श्याम सिंह, दिनेश कुमार, सुनील, राकेश चंद्र, आनंद कुमार, रंजीत कुमार आदि ने बताया कि तीनों मंदिर के इर्द-गिर्द पानी भरा है। नालों की सफाई न होने के चलते जलभराव की समस्या बनी है। अब अधिक बारिश हुई तो पानी मंदिर की सीढ़ियों तक पहुंच जाएगा। बीडीओ विपुल विक्रम सिंह ने बताया कि ग्राम सचिव को निर्देशित किया गया है। नाले की साफ-सफाई कराकर पानी निकासी दुरुस्त कराई जाएगी। (संवाद)
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यमुना का जलस्तर बढ़ने से डूबी तिल व ज्वार की फसलें
फोटो- 32-पथार गांव के पास खेतों में भरा पानी। संवाद
मूसानगर। यमुना नदी का जलस्तर पिछले मूसानगर में आढ़न-पथार की रपटा पुलिया जलमग्न है। तिल व ज्वार की फसल जलमग्न होकर बर्बाद हो गई हैं। मूसानगर गेज के अनुसार मंगलवार को यमुना का जलस्तर 102.67 मीटर दर्ज किया गया। केंद्रीय जल आयोग के स्थल प्रभारी अनिल गुप्ता ने बताया कि नदी का जलस्तर करीब दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। हालांकि अब जलस्तर बढ़ने की गति कुछ कम हुई है। पथार गांव निवासी लल्लू सिंह ने बताया कि गांव के बाहर रपटा पुलिया के पास उनका खेत है। उन्होंने खेत में तिल की फसल बोई थी। पुलिया डूबने के कारण करीब आधा बीघा खड़ी तिल की फसल पानी में डूबकर नष्ट हो गई। गांव के ही प्रेमू की करीब दो बीघा ज्वार की फसल बर्बाद हो गई। बाबूराम निषाद की एक बीघा ज्वार की फसल भी पानी की चपेट में आ गई। अन्य किसानों की फसलें भी जलमग्न होकर खराब हो गई हैं। एसडीएम भोगनीपुर देवेंद्र सिंह ने बताया कि ऊपर के इलाकों में जलस्तर घटना शुरू हो गया है। एक-दो दिन में भोगनीपुर तहसील के यमुना किनारे के गांव में भी पानी कम हो जाएगा। पानी उतरने पर लेखपाल फसल नुकसान का सर्वे करेंगे। (संवाद)
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फोटो-16 तोरना में सड़क पर भरे पानी में खड़े लोग। संवाद
धीमी गति से उतर रहा पांडु नदी का पानी, जलभराव से राहत नहीं
- पानी में डूबी फसलों की बर्बादी देख किसान मायूस
संवाद न्यूज एजेंसी
रसूलाबाद। क्षेत्र से निकली पांडु नदी का जलस्तर कुछ कम जरूर हुआ है लेकिन मुश्किलें जस की तस हैं। जलभराव से सड़कें जलमग्न हैं। इससे आवाजाही में परेशानी हो रही है। इधर पानी में डूबी फसलों की बर्बादी देख किसान मायूस हैं।
कानपुर नगर और कानपुर देहात की सीमा से होकर गुजरी पांडु नदी का जलस्तर सोमवार को कुछ कम हुआ था। हालांकि यह बहुत धीमी गति से घटने की वजह से मंगलवार को भी अधिकांश सड़कें जलमग्न रहीं। पलिया बासखेडा-अंता मार्ग जलमग्न है। वहीं, तोरना गांव में सड़क पर पानी भरा है। कुर्सी खेड़ा निवासी दीपेंद्र यादव ने बताया कि पांडु नदी के जलस्तर में बहुत थोड़ी कमी आई है लेकिन जलभराव की समस्या जस की तस है। खेतों में पानी भरा होने के कारण किसानों की फसलें डूबी हुई हैं।
वहीं, तोरना निवासी मोंटी दीक्षित, भग्गा निवादा निवासी जयचंद और भीतरगांव निवासी रामकुमार पांडेय आदि ने बताया कि गांवों में भी जलभराव की स्थिति बनी हुई है। कई जगह गलियों में गंदा पानी भरा होने से लोगों को उसी से होकर आवागमन करना पड़ रहा है। जलभराव के कारण बच्चे विद्यालय भी नहीं पहुंच पा रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि खेतों में धान और बाजरा की फसलें पानी में डूबी हैं। जिससे फसलें गलने लगी हैं।

यदि पांडु नदी का जलस्तर जल्द कम नहीं हुआ तो फसलें बर्बाद हो जाएंगी। तहसीलदार पंकज उपाध्याय ने बताया कि पांडु नदी का जलस्तर अब बढ़ नहीं रहा है। जलस्तर में और कमी आने की संभावना है। क्षेत्रीय लेखपालों को पानी में डूबी फसलों का सर्वे कर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। पानी उतरने पर फसलों का सर्वे हो सकेगा। नियमानुसार फसल नुकसान का मुआवजा दिलाया जाएगा।
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