World Tiger Day: चिड़ियाघर में छह साल से नहीं गूंजी किलकारी, अब तक भेजे जा चुके हैं 50 बाघ, ये हैं आंकड़ें
Kanpur News: वर्ष 2010 में फर्रुखाबाद के जंगल से बाघिन त्रुशा और बाघ अभय को लाया गया था। 2017 तक दोनों की मेटिंग से 10 शावकों ने जन्म लिया था।
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देश में बाघों की जनसंख्या बढ़ाने में कानपुर के चिड़ियाघर का नाम हमेशा आगे रहा है लेकिन पिछले छह साल में यहां पर एक भी बाघिन शावक को जन्म नहीं दे सकी है। 14 शावकों को जन्म देने वाली बाघिन त्रुशा वर्तमान में अस्पताल परिसर में अंतिम सांसें गिन रही है।
चिड़ियाघर प्रशासन ने कई बार बाघ-बाघिन की मेटिंग कराई लेकिन गर्भधारण में सफलता नहीं मिली। चार फरवरी 1974 को अस्तित्व में आए 3.2 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले चिड़ियाघर का प्राकृतिक माहौल यहां के जानवरों को खूब भाया। यह चिड़ियाघर धीरे-धीरे बाघों का प्रजनन सेंटर बनता रहा।
यहां से अब तक 50 से ज्यादा बाघ-बाघिन देश के विभिन्न शहरों में भेजे जा चुके हैं। 70 के दशक में यहां पहला बाघ लाया गया था। वर्तमान में चिड़ियाघर में 10 बाघ हैं, जिनमें चार नर और छह मादा हैं। अधिकारियों के अनुसार, बाघों की संख्या बढ़ाने के प्रयास लगातार जारी है।
ऐसे बढ़ा कुनबा
वर्ष 2010 में फर्रुखाबाद के जंगल से बाघिन त्रुशा और बाघ अभय को लाया गया था। 2017 तक दोनों की मेटिंग से 10 शावकों ने जन्म लिया था। इसके बाद पीलीभीत के जंगल से पकड़कर लाए गए आदमखोर बाघ प्रशांत और त्रुशा की मेटिंग कराई गई तो 2017 में चार शावकों का जन्म हुआ। इनका नाम अमर, अकबर, एंथोनी और अंबिका रखा गया।
वर्तमान में ये बाघ हैं चिड़ियाघर में
चिड़ियाघर में वर्तमान में 10 बाघ हैं। इनमें मादा बाघिन त्रुशा, मालती, लूना, सावित्री, दुर्गा, पुष्पा और नर बाघ प्रशांत, बघीरा, बादल, मल्लू हैं।
कई बार बाघों की मेटिंग कराई गई है पर 2017 के बाद से किसी भी बाघिन ने शावक को जन्म नहीं दिया है। -नावेद इकराम, प्रशासनिक अधिकारी, चिड़ियाघर