World Rabies Day: बंदर और कुत्ते के काटने पर एंटी रैबीज का टीका है बचाव, इन लक्षणों से करें बीमारी की पहचान
रैबीज एक विषाणुजनित संक्रामक बीमारी है। यह वायरस संक्रमित पशुओं के काटने और खरोंचने से मनुष्यों में फैलता है। यह एक जानलेवा रोग है। इसकी रोकथाम के लिए एंटी रैबीज का टीका ही बचाव का तरीका है।
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औरैया जिले में बंदरों और कुत्तों का आंतक बदस्तूर जारी है। दोनों जिला अस्पताल में बंदर और कुत्ते के काटने के करीब 60 से अधिक मरीज इलाज कराने पहुंचते है। अस्पतालों में मरीजों को एंटी रैबीज का टीका लगाया जाता है। टीका ही बचाव का तरीका है।
जिला औरैया में बीते पांच सालों में बंदर, कुत्ता, बिल्ली समेत अन्य जानवरों का आतंक बढ़ा है। पहले दोनों जिला अस्पताल में चार से पांच सौ मरीज इलाज कराने पहुंचते है। अब दोनों जिला अस्पताल में एक महीने में करीब सात सौ मरीज एंटी रैबीज का टीका लगवाने अस्पताल में पहुंच रहे हैं।
बात करें सातों सीएचसी की, तो यहां भी प्रतिदन 15 से अधिक मरीज एंटी रैबिज का टीका लगवाने आते है। सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में एंटी रैबीज की वैक्सीन है। डीप्टी सीएमओ व नोडल संक्रामक रोग के डॉ. मनोज ने बताया कि रैबीज एक तरह का संक्रमण है, जो संक्रमित जानवरों के काटने से मानव शरीर में फैलता है।
संक्रमण मानव के मस्तिष्क तक पहुंच जाए, तो उसके दिमाग में सूजन आ जाती है। जिससे व्यक्ति कोमा तक में चला जाता है। उसे कभी-कभी पानी से डर लगता है, इसके अलावा लकवा भी हो सकता है। सही समय में इलाज न कराने पर संक्रमित व्यक्ति की जान तक जा सकती है।
बीते माह 1653 कुत्ते काटे, 213 बंदर, 57 बिल्ली व 14 अन्य जानवरों के मरीज अस्पतालों में पहुंचे। चिचौली स्थित 100 शैया युक्त जिला अस्पताल के चीफ फार्मासिस्ट प्रमोद चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि अस्पताल में करीब चार से पांच सौ एंटी रैबीज की वैक्सीन है।
एक क्वाइल में पांच मरीजों को वैक्सीन लगाई जाती है। वही, 50 शैया संयुक्त जिला अस्पताल के चीफ फार्मासिस्ट सत्यपाल कटियार ने बताया कि अस्पताल में 250 एंटी रैबीज वैक्सीन है। सातों सीएचसी में 2004 एंटी रैबीज वैक्सीन है।
ये हैं मुख्य लक्षण
बुखार आना, सिर दर्द, घबराहट, बेचैनी, चिंता और व्याकुल रहना, भ्रम की स्थिति में रहना, खाना निगलने में मुश्किल होना, बहुत अधिक लार निकला रैबीज के लक्षण है। इसके आलावा पानी से डर लगना, पागलपन करना व अनिद्रा की समस्या भी संक्रमित व्यक्ति को होती है।
ऐसे करें अपना बचाव
सीएमओ डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने बताया कि जिस जगह पर जानवर ने काटा हो, वहां पर तुरंत पानी या साबुन से अच्छी तरह से धोना चाहिए। इसके बाद रोगी को एंटी रैबिज का टीका लगवाना चाहिए। दोनों जिला अस्पताल व सातों सीएचसी में पर्याप्त मात्रा में एंटी रैबीज की वैक्सीन है।
नहीं लग रही है वैक्सीन
नगर पालिका औरैया के अधिशासी अधिकारी रामआसरे कमल ने बताया कि जिले में बंदर व कुत्तों को पकडने का अभी कोई अभियान नहीं चल रहा है। न ही वैक्सीन लगाई जा रही है। शासन से कोई निर्देश नहीं मिले है। निर्देश मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।