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चित्रकूट: सतीअनुसुइया आश्रम के जंगल में लकड़हाराें ने देखा बाघ तो डर के कारण भाग खड़े हुए
Sat, 16 Nov 2019 11:39 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट
यूपी डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 16 Nov 2019 11:39 PM IST
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बाघ
- फोटो : amar ujala
यूपी और एमपी के तराई क्षेत्र के अंतर्गत सती अनसूइया आश्रम के जंगल में कई दिनों से बाघ की दहाड़ गूंज रही है। वन अमले को सती अनुसुईया जंगल के नदी किनारे मिले पैरों के निशान से साबित होता है कि यह पूर्ण वयस्क मेल बाघ है। अनुसुइया जंगल में होने की पुष्टि तब हुई जब जंगल लकड़ी बीनने गए आसपास के गांवों के लोगों का बाघ से उनका सामना हो गया।
बाघ को देख लकड़हारे सरगठ्ठे फेंककर जान बचाकर दूर भाग खडे़ हुए। सनुसुइया आश्रम के आसपास दुकान लगाने वाले दुकानदारों डरकर शाम ढलते ही अपनी दुकानें बंद कर दीं। वन विभाग के एसडीओ जीआर सिंह ने बाघ की मौजूदगी की पुष्टि करते हुए कहा की संभावना है की यह बाघ पन्ना की ओर से ही यहां आ पहुंचा।
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बाघ को देख लकड़हारे सरगठ्ठे फेंककर जान बचाकर दूर भाग खडे़ हुए। सनुसुइया आश्रम के आसपास दुकान लगाने वाले दुकानदारों डरकर शाम ढलते ही अपनी दुकानें बंद कर दीं। वन विभाग के एसडीओ जीआर सिंह ने बाघ की मौजूदगी की पुष्टि करते हुए कहा की संभावना है की यह बाघ पन्ना की ओर से ही यहां आ पहुंचा।
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बाघ
- फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2016 मे पन्ना टाईगर रिजर्व की बाघिन मझगवां रेंज मे आ गई थी। अभी भी कई अन्य बाघों के साथ रह रही है। सती अनुसुइया जंगल मे पहुंचे बाघ के गले मे कालर आईडी नहीं लगी है। नजदीक से देखने वाले लकहारों ने भी गले मे कुछ न होने की पुष्टि की है। वन विभाग का कहना है मिले पदचिह्न वर्गाकार हैं। काफी बड़े हैं। जिसे देखते हुए पुष्टि होती है की यह पगमार्क किसी पूर्ण वयस्क मेल बाघ के हैं। फीमेल बाघ के पग आयताकार होते हैं।
वन अमला अलर्ट मोड पर
बाघ के आने की सूचना मिलते ही वन अमला अलर्ट मोड पर है। खास तौर से जंगल के बीच जहां से भी बिजली की लाइने गुजरती है और जो भी जल स्रोत है उन जगहों पर विशेष रूप से निगरानी की जा रही है। वनकर्मियों को बिलकुल सजग रहने के निर्देश दिए गाए हैं। कहा गया है किसी भी अतिरिक्त गतिविधि को देखते हुए संदिग्धों पर तत्काल कार्यवाही की जाय। लोग खेतों के आसपास बिजली की तारों मे करंट फैलाकर वन्यजीवों का शिकार भी करते हैं। जलस्रोतों पर भी शिकारी जहर मिलाकर शिकार करते हैं।
वयस्क होते ही तलाशते हैं अड्डा
वन क्षेत्र व जंगली जानवरों के मामले के विशेषज्ञों का कहना है कि पन्ना टाइगर रिजर्व का जो प्रस्तावित रकबा है उसमें केवल 25 बाघों के लिए ही जगह है। जबकि मौजूदा समय में यह 40 से भी अधिक बाघ के मौजूद होने की खबर है। जगह कम पड़ने के कारण ही यहां से मेल और फीमेल बाघ वयस्क होते ही अपने लिए नए रहवास की तलाश में इधर-उधर निकल पड़ते हैं। इसी का नतीजा है कि अभी परसमनिया पठार में तो कभी चित्रकूट और मझगवां रेंज, मारकुंडी रेंज के जंगलों में यह पहुंच जाते हैं। जहां-जहां इनके पूर्वज आते जाते थे यह आज भी उन्हीं रास्तों से गुजरते हुए अपने रहने के लिए अनुकूल जगह तलाशते हैं।
वन अमला अलर्ट मोड पर
बाघ के आने की सूचना मिलते ही वन अमला अलर्ट मोड पर है। खास तौर से जंगल के बीच जहां से भी बिजली की लाइने गुजरती है और जो भी जल स्रोत है उन जगहों पर विशेष रूप से निगरानी की जा रही है। वनकर्मियों को बिलकुल सजग रहने के निर्देश दिए गाए हैं। कहा गया है किसी भी अतिरिक्त गतिविधि को देखते हुए संदिग्धों पर तत्काल कार्यवाही की जाय। लोग खेतों के आसपास बिजली की तारों मे करंट फैलाकर वन्यजीवों का शिकार भी करते हैं। जलस्रोतों पर भी शिकारी जहर मिलाकर शिकार करते हैं।
वयस्क होते ही तलाशते हैं अड्डा
वन क्षेत्र व जंगली जानवरों के मामले के विशेषज्ञों का कहना है कि पन्ना टाइगर रिजर्व का जो प्रस्तावित रकबा है उसमें केवल 25 बाघों के लिए ही जगह है। जबकि मौजूदा समय में यह 40 से भी अधिक बाघ के मौजूद होने की खबर है। जगह कम पड़ने के कारण ही यहां से मेल और फीमेल बाघ वयस्क होते ही अपने लिए नए रहवास की तलाश में इधर-उधर निकल पड़ते हैं। इसी का नतीजा है कि अभी परसमनिया पठार में तो कभी चित्रकूट और मझगवां रेंज, मारकुंडी रेंज के जंगलों में यह पहुंच जाते हैं। जहां-जहां इनके पूर्वज आते जाते थे यह आज भी उन्हीं रास्तों से गुजरते हुए अपने रहने के लिए अनुकूल जगह तलाशते हैं।