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कई बार कॉल करने के बाद भी नहीं पहुंची एंबुलेंस, फिर सास ने कराया प्रसव
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 24 Nov 2018 11:34 PM IST
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यूपी के हमीरपुर जिले में दिन भर सभी ब्लाकों में चल रही महिला सशक्तीकरण की गोष्ठियों के बीच एक शक्ति स्वरूपा को उसकी मां ने जन्म घर पर ही सास की मदद से दिया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि बेटी के पिता ने एंबुलेंस 108 के लिए फोन किया, गांव की आशा का भी पता लगाया। लेकिन जहां आशा सरकारी कार्यक्रम में भाग लेने ब्लाक गई थी, वहीं एंबुलेंस दो घंटे बाद भी नहीं आई। जिससे दादी ने चिकित्सा की व्यवस्था संभाल नातिन को दुनिया में लाने का काम किया।
मौदहा मामला कस्बे से 11 किलोमीटर दूर भवानी गांव का है। यहां के निवासी लल्लू के पुत्र रामकरन की पत्नी मंजू को शनिवार सुबह आठ बजे प्रसव पीड़ा शुरू हुई। तभी उसने पहले सहायता के लिए गांव की आशा कार्यकर्ता की तलाश की। आशा के न मिलने पर उसने सीएचसी जाने के लिए 108 नंबर एंबुलेंस को फोन किया। वह बार-बार एंबुलेंस को फोन करता रहा, लेकिन एंबुलेंस नहीं पहुंची। बाद में उसकी मां ने ही बेटी को जन्म दिलानेे का काम किया।
सरकारी अव्यवस्था की हद तब हो गई, जब बेटी के पैदा होने के बाद रामकरन अपनी पत्नी व नवजात को लेकर सीएचसी पहुंचा तो वहां पर तैनात स्टाफ ने कहा कि हम मरीज को भर्ती नहीं करेंगे, यहां पर बच्चे का जन्म नहीं हुआ है। वह भागकर अधीक्षक के कमरे में गया तो पता चला कि वह महिला सशक्तीकरण गोष्ठी में भाग लेने गए हैं। वह गोष्ठी में पहुंचा और अपनी व्यथा सीएचसी के प्रभारी डॉ. अनिल सचान से बताई। डॉ. सचान के हस्तक्षेप के बाद जच्चा व बच्चा को अस्पताल में भर्ती कर इलाज प्रारंभ किया गया। अधीक्षक ने कहा कि वास्तव में यह दुर्भाग्यपूर्ण है। एंबुलेंस बुलाने के दो घंटे बाद भी नहीं पहुंची। इस मामले को वह उच्चाधिकारियों को अवगत कराएंगे।
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मौदहा मामला कस्बे से 11 किलोमीटर दूर भवानी गांव का है। यहां के निवासी लल्लू के पुत्र रामकरन की पत्नी मंजू को शनिवार सुबह आठ बजे प्रसव पीड़ा शुरू हुई। तभी उसने पहले सहायता के लिए गांव की आशा कार्यकर्ता की तलाश की। आशा के न मिलने पर उसने सीएचसी जाने के लिए 108 नंबर एंबुलेंस को फोन किया। वह बार-बार एंबुलेंस को फोन करता रहा, लेकिन एंबुलेंस नहीं पहुंची। बाद में उसकी मां ने ही बेटी को जन्म दिलानेे का काम किया।
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सरकारी अव्यवस्था की हद तब हो गई, जब बेटी के पैदा होने के बाद रामकरन अपनी पत्नी व नवजात को लेकर सीएचसी पहुंचा तो वहां पर तैनात स्टाफ ने कहा कि हम मरीज को भर्ती नहीं करेंगे, यहां पर बच्चे का जन्म नहीं हुआ है। वह भागकर अधीक्षक के कमरे में गया तो पता चला कि वह महिला सशक्तीकरण गोष्ठी में भाग लेने गए हैं। वह गोष्ठी में पहुंचा और अपनी व्यथा सीएचसी के प्रभारी डॉ. अनिल सचान से बताई। डॉ. सचान के हस्तक्षेप के बाद जच्चा व बच्चा को अस्पताल में भर्ती कर इलाज प्रारंभ किया गया। अधीक्षक ने कहा कि वास्तव में यह दुर्भाग्यपूर्ण है। एंबुलेंस बुलाने के दो घंटे बाद भी नहीं पहुंची। इस मामले को वह उच्चाधिकारियों को अवगत कराएंगे।
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