Kanpur: पान-मसाला बनाने में कितनी खपाई बिजली, बताना होगा, फाइनल रीडिंग जीएसटी पोर्टल पर करनी होगी अपलोड
पान-मसाला बनाने में कितनी बिजली खपाई अब इसका हिसाब देना होगा। साथ ही फाइनल रीडिंग जीएसटी पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। इसके लिए जल्द ही दिशा-निर्देश जारी होंगे।
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पान-मसाला उत्पादन करने वाले कारोबारियों पर और शिकंजा कसने की तैयारी है। अब उन्हें इकाइयों में रोजाना की बिजली खपत और रीडिंग का डाटा जीएसटी पोर्टल पर अपलोड करना होगा। उत्पादन रजिस्टर फार्म के साथ ही कच्चे माल और पैकिंग मटीरियल की जानकारी भी देनी होगी। इस संबंध में जल्द ही दिशा-निर्देश लागू किए जाएंगे। शहर में राष्ट्रीय स्तर के ब्रांडेड पान मसाला के निर्माता हैं। कुल 12 इकाइयों में पान मसाले व तंबाकू का उत्पादन हो रहा है।
इससे पहले अंतरिम बजट में पान मसाला उत्पादकों के लिए मशीनों की संख्या भी जीएसटी में घोषित करना अनिवार्य किया गया था। धारा 122ए के तहत मशीनों की सही संख्या न बताने पर प्रति मशीन एक लाख रुपये का अर्थदंड लगाए जाने का प्रावधान है। यह व्यवस्था एक अप्रैल 2024 से लागू होगी और पान मसाला उत्पादकों को 30 अप्रैल 2024 तक मशीनों की संख्या की का घोषणा करनी होगी।
वरिष्ठ कर अधिवक्ता संतोष कुमार गुप्ता ने बताया कि अब कारोबारियों को पैकिंग मशीन का उपयोग, मशीन का मॉडल, निर्माता का नाम, कहां स्थापित हैं, पैकिंग क्षमता आदि जानकारियां जीएसटी पोर्टल पर अपलोड करनी होंगी। कच्चे माल, प्रोसेसिंग समेत हर प्रक्रिया पर निगरानी बढ़ाई जा रही है। उन्होंने बताया कि पान मसाला, गुटखा, जर्दा, खैनी, तंबाकू, सुरती व अन्य तंबाकू उत्पादों की इकाइयां इसमें शामिल हैं।
- पंजीकृत व्यापारी के कारोबारी स्थल पर कितनी पाउच पैकिंग मशीन का उपयोग किया जा रहा है। इसका विवरण जीएसटी पोर्टल पर अपलोड करना होगा।
- नए पान मसाला उत्पादक को जीएसटी पंजीयन में पाउच पैकिंग, मशीन का विवरण फार्म एसआर एक अपलोड करना होगा।
- नई मशीन स्थापित करने के मामले में चौबीस घंटे के भीतर विवरण देना होगा। पंजीकृत उत्पादक द्वारा यदि किसी अन्य विभाग में उत्पादन संबंधी विवरण प्रस्तुत किए गए हैं। उसकी जानकारी भी देनी होगी।
- यदि व्यापारी के पंजीकृत कारोबारी स्थल से कोई पाउच पैकिंग मशीन हटाई जाती है। तब इसकी सूचना चौबीस घंटे के अंदर जीएसटीएन पोर्टल पर देनी होगी।
- प्रत्येक पंजीकृत निर्माता को निर्माण में इस्तेमाल होने वाले सभी इनपुट जिसमें कच्चा माल, पैकिंग मैटेरियल, प्रोसेसिंग उत्पाद इनपुट का एक रजिस्टर व्यापार स्थल पर रखना होगा।
- बिजली मीटर की रीडिंग का रिकाॅर्ड भी प्रतिदिन के हिसाब से रखना होगा। फाइनल मीटर रीडिंग का रिकार्ड रखा जाएगा। इसी तर्ज पर जेनरेटर की मीटर रीडिंग का रिकार्ड भी रखना होगा।
- महीने के खत्म होने के 10 दिन भीतर मासिक विवरण फार्म अपलोड करना होगा।
जीएसटी आने से पहले हर मशीन पर सरकार ने 18 लाख रुपये कंपाउंडिंग फिक्स करते हुए टैक्स लगाया था। इसके चलते छोटे कारोबारी बाजार से बाहर हो गए। बड़े कारोबारी काम करते रहे। 2017 में जीएसटी आने के बाद इसे संवेदनशील उद्योग में शामिल कर लिया गया। इसके बाद छोटे कारोबारियों ने चोरी-छिपे काम शुरू कर दिया। करीब तीन हजार करोड़ से ज्यादा का सालाना कारोबार है। इसमें दो हजार करोड़ का कारोबार चोरी-छिपे चल रहा है। कर चोरी भी की जा रही है। इसकी वजह से निगरानी बढ़ाई जा रही है।
एक मशीन पांच घंटे में तैयार करती 15 हजार पाउच
मशीनों पर सरकार इसलिए निगरानी बढ़ा रही है ताकि कर चोरी खत्म की जा सकी। दरअसल, एक मशीन यदि पांच घंटे तक लगातार चलती है तो 15 हजार पाउच तैयार होते हैं। इससे जुड़े कारोबारी कई शिफ्टों में माल तैयार करते हैं या फिर आर्डर के अनुरूप लगातार मशीनें चलवाते हैं, लेकिन कारोबारी आंकड़ों में हमेशा कम मशीन चलना दिखाता है। इसके चलते तैयार और कच्चा माल, पैक माल में भी कर चोरी की जाती है।
ट्रांसपोर्टरों, कारोबारियों और वाहन पास कराने वालों का गठजोड़
पान-मसाला कारोबारी ट्रांसपोर्टरों के साथ मिलकर इस कारोबार में लगे हुए हैं। माल लदे वाहनों को एक शहर से दूसरे शहर में पहुंचाने के लिए पासरों को ठेका दिया जाता है। जो जीएसटी, पुलिस विभाग से बचाकर माल कारोबारी तक पहुंचाते हैं। इस नई व्यवस्था से गठजोड़ भी खत्म होगा। मशीनों की निगरानी बढ़ने के बाद विभाग केस्को या बिजली कंपनी से डाटा मंगाकर कारोबारी का उत्पादन जांच सकेगा। इससे कर चोरी रोकने में मदद मिल सकेगी।