फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Website closed, not getting housing benefit

वेबसाइट बंद, नहीं मिल रहा आवास का लाभ

Fri, 02 Jul 2021 12:48 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 02 Jul 2021 12:48 AM IST
विज्ञापन
Website closed, not getting housing benefit
कानपुर देहात। कच्चे घर या फिर झोपड़ी में रहने वाले परिवारों के लिए शासन की ओर से आवास योजना चलाई जा रही है। वहीं स्थायी सूची में पात्रों का नाम न होने से आवास आवंटन नहीं हो रहा है। पात्रों का नाम आवास प्लस वेबसाइट के जरिए शामिल किया जाता है, लेकिन यह वेबसाइट बंद है। इससे कई पात्र परिवार तिरपाल के नीचे गुजारा कर रहे हैं।
विज्ञापन

मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ स्थायी सूची में नाम दर्ज होने वाले गरीब परिवारों को मिलता है। आवास प्लस वेबसाइट के जरिए पात्र परिवार की मुखिया का नाम स्थायी सूची में शामिल करने का विकल्प है, लेकिन यह वेबसाइट अर्से से बंद है।
विज्ञापन

ऐसे में गरीब परिवार कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। अफसर जांच कराकर पात्र पाए जाने के बाद भी इन परिवारों को आवास नहीं दे पा रहे हैं। गरीब इसकी शिकायत करते हैं तो आवास प्लस वेबसाइट बंद होने का हवाला देकर अफसर किनारा कर लेते हैं। इधर पात्र परिवार की आवास पाने की उम्मीद टूट जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

आवास विहीन गरीब परिवारों के आवेदन करने पर सर्वे कराया जाता है। कई परिवार पात्र पाए गए हैं, लेकिन वेबसाइट बंद है। इसकी वजह से आवास आवंटन नहीं हो पा रहा है। - हरिश्चंद्र, प्रभारी बीडीओ अकबरपुर/डीसी मनरेगा
आवास प्लस वेबसाइट बंद होने की वजह से जिले में सर्वे के बाद पात्र पाए गए परिवारों को आवास का आवंटन नहीं किया जा पा रहा है। वेबसाइट शासन के स्तर पर ही खुलेगी। इसके बारे में कुछ कहना संभव नहीं है। - डीके यादव, प्रभारी आवास योजना/पीडी डीआरडीए
अफसरों की चौखट पर दी दस्तक, नहीं मिला आवास
कानपुर देहात। अकबरपुर ब्लॉक के भिखनापुर निवासी शिखा अवस्थी का परिवार तिरपाल के नीचे गुजर बसर कर रहा है। शिखा कहती हैं कि पति सोमनाथ मजदूरी करते हैं। तीन बच्चे और बुजुर्ग सास है। लकड़ी व उपले जलाकर चूल्हे पर खाना बनता है। बारिश के दिनों में बहुत मुश्किल होती है।

अनाज व गृहस्थी का सामान भी भीग जाता है। पिछले साल फरवरी में आवास के लिए आवेदन किया। जांच में पात्र पाया गया, लेकिन स्थायी सूची में नाम दर्ज नहीं था। वेबसाइट बंद होने से सूची में नाम भी नहीं बढ़ सका। तहसील व ब्लॉक कार्यालय के कई चक्कर लगाने के बाद भी आवास नहीं मिला है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed