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नवंबर से हरदोई में बनेगी ब्रिटेन की नामी वेबले स्कॉट रिवॉल्वर, दो लाख रुपये से कम रहेगी कीमत
Thu, 24 Sep 2020 10:36 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 24 Sep 2020 10:36 AM IST
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इंग्लैंड की वेबले एंड स्कॉट कंपनी बनाएगी .32 बोर की रिवाल्वर
- फोटो : फेसबुक
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाली इंग्लैंड की वेबले एंड स्कॉट कंपनी के असलहे अब संडीला के औद्योगिक क्षेत्र में भी बनेंगे। लखनऊ के स्याल ग्रुप के साथ हुए तकनीकी समझौते के तहत संडीला औद्योगिक क्षेत्र में फैक्ट्री का निर्माण पूरा हो गया है।
असलहे के विभिन्न पार्ट्स बनाने का कार्य भी चल रहा है। फिलहाल यहां .32 बोर की रिवाल्वर बनाई जाएंगी। जिसकी कीमत 1.6 लाख होगी। दो विश्व युद्धों के दौरान विभिन्न सेनाओं को शस्त्र उपलब्ध कराने वाली वेबले एंड स्कॉट कंपनी ने लखनऊ के स्याल ग्रुप के साथ संडीला में फैक्टरी स्थापित की है।
भारत में पहली बार वेबले एंड स्कॉट कंपनी ने अपनी प्रोडक्शन यूनिट लगाने का निर्णय कर संडीला औद्योगिक क्षेत्र को चुना है। स्याल मैन्यूफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक सुरेंद्र पाल सिंह का कहना है कि 100 करोड़ रुपये की परियोजना अब अंतिम दौर में है।
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असलहे के विभिन्न पार्ट्स बनाने का कार्य भी चल रहा है। फिलहाल यहां .32 बोर की रिवाल्वर बनाई जाएंगी। जिसकी कीमत 1.6 लाख होगी। दो विश्व युद्धों के दौरान विभिन्न सेनाओं को शस्त्र उपलब्ध कराने वाली वेबले एंड स्कॉट कंपनी ने लखनऊ के स्याल ग्रुप के साथ संडीला में फैक्टरी स्थापित की है।
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भारत में पहली बार वेबले एंड स्कॉट कंपनी ने अपनी प्रोडक्शन यूनिट लगाने का निर्णय कर संडीला औद्योगिक क्षेत्र को चुना है। स्याल मैन्यूफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक सुरेंद्र पाल सिंह का कहना है कि 100 करोड़ रुपये की परियोजना अब अंतिम दौर में है।
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संडीला औद्योगिक क्षेत्र के फेज दो में बनी फैक्ट्री और फैक्ट्री में असलहे के निर्माण में लगे कर्मचारी
- फोटो : अमर उजाला
2017 में स्याल ग्रुप ने वेबले एंड स्कॉट के साथ तकनीकी समझौता होने के बाद आयुध निर्माण के संबंध में आवेदन कर अनुमति मांगी थी। मार्च 2019 में इसके लिए अनुमति देकर सरकार ने लाइसेेंस भी जारी कर दिया था।
लगभग एक वर्ष में ही फैक्ट्री का निर्माण पूरा कर लिया गया। निदेशक का कहना है कि 22 लोगों को इसमें रोजगार भी मिला है। फिलहाल .32 बोर के रिवाल्वर का निर्माण यहां किया जाएगा। बॉडी, बैरल आदि का निर्माण हो रहा है, नवंबर में इसे बाजार में उतार दिया जाएगा।
अगले फेज में एयर गन, शॉट गन, पिस्टल और कारतूस भी बनाए जाएंगे। यहां बनाए जाने वाले शस्त्रों की टेस्टिंग फिलहाल आर्डिनेंस फैक्ट्री में होगी। सुरेंद्र पाल सिंह ने बताया कि निर्माण इकाई में 49 फीसदी की हिस्सेदारी वेबले एंड स्कॉट ग्रुप की है, जबकि 51 फीसदी हिस्सेदारी स्याल ग्रुप की है। भविष्य में अगर अनुमति मिली तो सेना के लिए भी शस्त्रों का निर्माण यहां किया जाएगा।
लगभग एक वर्ष में ही फैक्ट्री का निर्माण पूरा कर लिया गया। निदेशक का कहना है कि 22 लोगों को इसमें रोजगार भी मिला है। फिलहाल .32 बोर के रिवाल्वर का निर्माण यहां किया जाएगा। बॉडी, बैरल आदि का निर्माण हो रहा है, नवंबर में इसे बाजार में उतार दिया जाएगा।
अगले फेज में एयर गन, शॉट गन, पिस्टल और कारतूस भी बनाए जाएंगे। यहां बनाए जाने वाले शस्त्रों की टेस्टिंग फिलहाल आर्डिनेंस फैक्ट्री में होगी। सुरेंद्र पाल सिंह ने बताया कि निर्माण इकाई में 49 फीसदी की हिस्सेदारी वेबले एंड स्कॉट ग्रुप की है, जबकि 51 फीसदी हिस्सेदारी स्याल ग्रुप की है। भविष्य में अगर अनुमति मिली तो सेना के लिए भी शस्त्रों का निर्माण यहां किया जाएगा।
टेस्टिंग रेंज के लिए भी किया है आवेदन
सुरेंद्र पाल सिंह ने बताया कि संडीला की फैक्ट्री में बनने वाले असलहों की टेस्टिंग के लिए टेस्टिंग रेंज बनाने की अनुमति के लिए भी गृह मंत्रालय को आवेदन भेजा जा चुका है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद अनुमति भी मिल जाएगी।
अब मिलेगी संडीला को आधुनिक पहचान
आदिकाल से ही संडीला की अलग पहचान रही है। द्वापर युग में महर्षि शांडिल्य हुए थे। उनसे जुड़ा होने के कारण ही इस कस्बे का नाम संडीला पड़ा। यहां शांडिल्य टीला अब भी है। 16वीं सदी में महाराज सल्लीह का जिक्र आता है। एक जाति विशेष से ताल्लुक रखने वाले लोग संडीला को महाराज सल्लीह की नगरी बताते हैं। संडीला की पहचान लड्डुओं से भी रही है, लेकिन अब इसे आधुनिक पहचान मिली है। अब कहा जाएगा कि संडीला वही जहां वेबले स्कॉट वाले असलहे बनते हैं।
32 हजार स्क्वायर मीटर में बनी है फैक्ट्री
यूपीसीडा और उद्योग उपायुक्त कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक संडीला के फेज दो में 32 हजार स्क्वायर मीटर क्षेत्रफल में आर्म्स फैक्ट्री का निर्माण किया गया है।
सुरेंद्र पाल सिंह ने बताया कि संडीला की फैक्ट्री में बनने वाले असलहों की टेस्टिंग के लिए टेस्टिंग रेंज बनाने की अनुमति के लिए भी गृह मंत्रालय को आवेदन भेजा जा चुका है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद अनुमति भी मिल जाएगी।
अब मिलेगी संडीला को आधुनिक पहचान
आदिकाल से ही संडीला की अलग पहचान रही है। द्वापर युग में महर्षि शांडिल्य हुए थे। उनसे जुड़ा होने के कारण ही इस कस्बे का नाम संडीला पड़ा। यहां शांडिल्य टीला अब भी है। 16वीं सदी में महाराज सल्लीह का जिक्र आता है। एक जाति विशेष से ताल्लुक रखने वाले लोग संडीला को महाराज सल्लीह की नगरी बताते हैं। संडीला की पहचान लड्डुओं से भी रही है, लेकिन अब इसे आधुनिक पहचान मिली है। अब कहा जाएगा कि संडीला वही जहां वेबले स्कॉट वाले असलहे बनते हैं।
32 हजार स्क्वायर मीटर में बनी है फैक्ट्री
यूपीसीडा और उद्योग उपायुक्त कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक संडीला के फेज दो में 32 हजार स्क्वायर मीटर क्षेत्रफल में आर्म्स फैक्ट्री का निर्माण किया गया है।