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पानी चाहिए तो पैसा दो या प्यासे रहो
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 21 Apr 2016 01:26 AM IST
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बस्ती के एकमात्र सही हैंडपंप पर लगी भीड़।
- फोटो : AMARUJALA
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कानपुर। जेके मंदिर के बगल की राजा का पुरवा मलिन बस्ती में पानी को शौचालय के कर्मचारियों ने कमाई का साधन बना रखा है। बस्ती में बने एक मात्र सार्वजनिक शौचालय में पानी के लिए डीप बोरिंग कराई गई है। यहां बने सार्वजनिक नल से अंडरग्राउंड लाइनें डाली गईं और घरों के बाहर नल निकाले गए, जिनसे सुबह-शाम पानी की सप्लाई दी जाती है। इसके एवज में 200 रुपये प्रति माह लोगों से वसूले जाते हैं। अधिकारियों को इसका पता ही नहीं है।
बसपा सरकार में राजा का पुरवा बस्ती को आदर्श बस्ती के रूप में डेवलप किया गया था। सड़कंे बनाई गईं थीं, स्ट्रीट लाइटों से पूरी बस्ती जगमगा उठी थी। सार्वजनिक शौचालय 1992 में नेडा ने बनवाया था। धीरे-धीरे बस्ती के हैंडपंप सूखते गए। पानी की कमी को देखते हुए कुछ लोगों को कमाई की सूझी। नेडा की योजना में बस्ती के अंदर अंडरग्राउंड पाइप लाइनें डाली गई थीं। लेकिन बाद में घर-घर कनेक्शन देने की योजना बंद कर दी गई। जहां-जहां लाइनें गईं थीं वहां अवैध रूप से नल निकाल दिए गए। आज हर घर से पानी के एवज में 200 रुपये वसूले जा रहे हैं। शौचालय का कर्मचारी वसूली करता है जिसकी कोई रसीद भी नहीं दी जाती है। शौचालय पर बने सार्वजनिक नल से सुबह शाम पानी की सप्लाई होती है। जिन लोगों ने 200 रुपये वाले कनेक्शन नहीं लिए हैं, वे शौचालय में ही नहाना-धोना करते हैं। इसका 42 रुपये महीने शुल्क लिया जाता है।
पेयजल संकट पर कांग्रेसियों का धरना
कानपुर साउथ। पेयजल संकट पर कांग्रेसियों ने बाकरगंज चौराहे पर धरना दिया। नेताओं ने कहा कि पूरे शहर में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है, लीकेज लाइनों से रोजाना लाखों लीटर पानी बहकर नालियों में जा रहा है। हैंडपंप खराब पड़े हैं, और लोगों को परिवार की प्यास बुझाने के लिए पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। इसके बावजूद न तो कोई अधिकारी और न ही प्रदेश सरकार का कोई नेता अथवा मंत्री इसको गंभीरता से ले रहा है। इसी तरह केंद्र ने मंहगाई खत्म करने का दावा किया था, लेकिन आज लोगों को दाल-सब्जी खाना मुश्किल हो रहा है। पार्टी नेताओं के मुताबिक पेयजल संकट को लेकर जल्द ही कमिश्नर दफ्तर पर भी प्रदर्शन किया जाएगा। इस मौके पर पार्टी के प्रदेश महासचिव ओपी श्रीवास्तव. पूर्व सांसद राजाराम पाल, हर प्रकाश अग्निहोत्री, इंटक के मनोज सिंह, अब्दुल मन्नान, पवन गुप्ता, राजीव द्विवेदी, इकबाल अहमद, दीपक त्रिवेदी, इजहारुल अंसारी, संदीप साइलस, सुहैल अंसारी आदि मौजूद रहे।
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बसपा सरकार में राजा का पुरवा बस्ती को आदर्श बस्ती के रूप में डेवलप किया गया था। सड़कंे बनाई गईं थीं, स्ट्रीट लाइटों से पूरी बस्ती जगमगा उठी थी। सार्वजनिक शौचालय 1992 में नेडा ने बनवाया था। धीरे-धीरे बस्ती के हैंडपंप सूखते गए। पानी की कमी को देखते हुए कुछ लोगों को कमाई की सूझी। नेडा की योजना में बस्ती के अंदर अंडरग्राउंड पाइप लाइनें डाली गई थीं। लेकिन बाद में घर-घर कनेक्शन देने की योजना बंद कर दी गई। जहां-जहां लाइनें गईं थीं वहां अवैध रूप से नल निकाल दिए गए। आज हर घर से पानी के एवज में 200 रुपये वसूले जा रहे हैं। शौचालय का कर्मचारी वसूली करता है जिसकी कोई रसीद भी नहीं दी जाती है। शौचालय पर बने सार्वजनिक नल से सुबह शाम पानी की सप्लाई होती है। जिन लोगों ने 200 रुपये वाले कनेक्शन नहीं लिए हैं, वे शौचालय में ही नहाना-धोना करते हैं। इसका 42 रुपये महीने शुल्क लिया जाता है।
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पेयजल संकट पर कांग्रेसियों का धरना
कानपुर साउथ। पेयजल संकट पर कांग्रेसियों ने बाकरगंज चौराहे पर धरना दिया। नेताओं ने कहा कि पूरे शहर में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है, लीकेज लाइनों से रोजाना लाखों लीटर पानी बहकर नालियों में जा रहा है। हैंडपंप खराब पड़े हैं, और लोगों को परिवार की प्यास बुझाने के लिए पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। इसके बावजूद न तो कोई अधिकारी और न ही प्रदेश सरकार का कोई नेता अथवा मंत्री इसको गंभीरता से ले रहा है। इसी तरह केंद्र ने मंहगाई खत्म करने का दावा किया था, लेकिन आज लोगों को दाल-सब्जी खाना मुश्किल हो रहा है। पार्टी नेताओं के मुताबिक पेयजल संकट को लेकर जल्द ही कमिश्नर दफ्तर पर भी प्रदर्शन किया जाएगा। इस मौके पर पार्टी के प्रदेश महासचिव ओपी श्रीवास्तव. पूर्व सांसद राजाराम पाल, हर प्रकाश अग्निहोत्री, इंटक के मनोज सिंह, अब्दुल मन्नान, पवन गुप्ता, राजीव द्विवेदी, इकबाल अहमद, दीपक त्रिवेदी, इजहारुल अंसारी, संदीप साइलस, सुहैल अंसारी आदि मौजूद रहे।
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