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गांव-गांव बुखार का कहर, महीनेभर में 70 मौतें, पंचायत चुनाव प्रचार और नतीजे आने के बीच गईं ज्यादातर की जान
Tue, 11 May 2021 12:59 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 11 May 2021 12:59 AM IST
सार
कानपुर के घाटमपुर क्षेत्र के गांव भदरस, जहांगीराबाद और पतारा में महीनेभर में 70 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।
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कोरोना से मचा कोहराम
- फोटो : PTI
विस्तार
गांवों में बुखार, कोरोना और इसके लक्षण वाले मरीजों की मौतों से दहशत है। कानपुर के घाटमपुर क्षेत्र के गांव भदरस, जहांगीराबाद और पतारा में महीनेभर में 70 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत चुनाव के लिए प्रचार शुरू होने से नतीजे आने तक ये मौतें हुई हैं। इससे पहले इतनी खराब स्थिति नहीं थी। अब भी इन गांवों में सैकड़ों लोग बुखार से पीड़ित हैं।
इतनी बड़ी संख्या में मौतों के बाद भी स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से बीमार लोगों की जांच और इलाज के लिए पर्याप्त इंतजाम तक नहीं किए गए हैं। भदरस गंाव में मतदान के बाद 24 अप्रैल को गांव निवासी विजयलक्ष्मी (63) पत्नी रघुवंश शुक्ला की बुखार के बाद हालत बिगड़ी तो अस्पताल में एंटीजन जांच में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई। इलाज के दौरान इनकी मौत हो गई।
इसी तरह संत कुमार शुक्ला की पत्नी रेखा (58) की भी कोरोना के चलते मौत हुई। इसके अलावा बुखार, खांसी-जुकाम के इलाज के दौरान सांस लेने में दिक्कत होने पर बहादुर (60), लालता सिंह (72), प्रकाश पांडेय (55), सुरेश शुक्ला (61), फकीरे सिंह (59), अर्जुन बाजपेयी (63), केशकांती बाजपेयी (60), रामकली (64), छोटेलाल (58) समेत करीब 40 और लोगों की जान चली गई।
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इतनी बड़ी संख्या में मौतों के बाद भी स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से बीमार लोगों की जांच और इलाज के लिए पर्याप्त इंतजाम तक नहीं किए गए हैं। भदरस गंाव में मतदान के बाद 24 अप्रैल को गांव निवासी विजयलक्ष्मी (63) पत्नी रघुवंश शुक्ला की बुखार के बाद हालत बिगड़ी तो अस्पताल में एंटीजन जांच में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई। इलाज के दौरान इनकी मौत हो गई।
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इसी तरह संत कुमार शुक्ला की पत्नी रेखा (58) की भी कोरोना के चलते मौत हुई। इसके अलावा बुखार, खांसी-जुकाम के इलाज के दौरान सांस लेने में दिक्कत होने पर बहादुर (60), लालता सिंह (72), प्रकाश पांडेय (55), सुरेश शुक्ला (61), फकीरे सिंह (59), अर्जुन बाजपेयी (63), केशकांती बाजपेयी (60), रामकली (64), छोटेलाल (58) समेत करीब 40 और लोगों की जान चली गई।
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जांच से बचे, मेडिकल स्टोर से दवा ली
भदरस के लोगों ने बताया कि बुखार से पीड़ित कई ग्रामीणों ने पॉजिटिव आने के भय के चलते कोरोना जांच नहीं कराई। पहले उन्होंने घर पर ही मेडिकल स्टोर से दवा लेकर खाई। सांस लेने में दिक्कत हुई और हालत बिगड़ी तो परिजनों ने इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनकी मौत हो गई।
वहीं मृतकों में कई ऐसे भी हैं, जिनकी घर पर ही मौत हुई। सभी में कोरोना जैसे लक्षण थे। घाटमपुर सीएचसी अधीक्षक कैलाश चंद्र ने बताया कि भदरस गांव में बीमारी से मौत की जानकारी नहीं है। गांव में कोरोना जांच का कैंप लगाया जा चुका है। आगे भी टीम भेजकर संदिग्धों व मरीजों की जांच कराएंगे।
एक-एक कर चल बसे, जांच कराई नहीं
जहांगीराबाद गांव में भी महीने भर में 20 लोगों की मौत हुई है। गांव की जौहरी (60) की बुखार आने के तीसरे दिन सांस लेने में तकलीफ हुई और मौत हो गई। बताया गया कि हफ्ते भर पहले उनके पति सुंदर की लिवर की बीमारी के साथ ही बुखार आने से मौत हुई थी। वहीं अचानक बुखार और अन्य बीमारियों की चपेट में आकर गांव के शीतल सहाय (55), सुभाष (55), अयोध्या कुशवाहा (68), सत्तार (60) और मोतीलाल (58) समेत 20 लोगों की मौत हो चुकी है। इन लोगों की भी कोरोना जांच नहीं हुई थी।
भदरस के लोगों ने बताया कि बुखार से पीड़ित कई ग्रामीणों ने पॉजिटिव आने के भय के चलते कोरोना जांच नहीं कराई। पहले उन्होंने घर पर ही मेडिकल स्टोर से दवा लेकर खाई। सांस लेने में दिक्कत हुई और हालत बिगड़ी तो परिजनों ने इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनकी मौत हो गई।
वहीं मृतकों में कई ऐसे भी हैं, जिनकी घर पर ही मौत हुई। सभी में कोरोना जैसे लक्षण थे। घाटमपुर सीएचसी अधीक्षक कैलाश चंद्र ने बताया कि भदरस गांव में बीमारी से मौत की जानकारी नहीं है। गांव में कोरोना जांच का कैंप लगाया जा चुका है। आगे भी टीम भेजकर संदिग्धों व मरीजों की जांच कराएंगे।
एक-एक कर चल बसे, जांच कराई नहीं
जहांगीराबाद गांव में भी महीने भर में 20 लोगों की मौत हुई है। गांव की जौहरी (60) की बुखार आने के तीसरे दिन सांस लेने में तकलीफ हुई और मौत हो गई। बताया गया कि हफ्ते भर पहले उनके पति सुंदर की लिवर की बीमारी के साथ ही बुखार आने से मौत हुई थी। वहीं अचानक बुखार और अन्य बीमारियों की चपेट में आकर गांव के शीतल सहाय (55), सुभाष (55), अयोध्या कुशवाहा (68), सत्तार (60) और मोतीलाल (58) समेत 20 लोगों की मौत हो चुकी है। इन लोगों की भी कोरोना जांच नहीं हुई थी।
अस्पताल गए नहीं, घर में ही चला इलाज
पतारा कस्बे में कोरोना से एक माह में दो महिलाओं व एक पुरुष की मौत हो चुकी है। इसके बाद से लोगों में दहशत का माहौल है। कस्बा निवासी नन्हे ने बताया कि उनकी पत्नी रुखसाना (42) को बुखार, जुकाम-खांसी की शिकायत थी। घर पर इलाज हो रहा था। तीन दिन बाद अचानक सांस लेने में दिक्कत होने लगी।
जब तक कुछ समझ पाते मौत हो गई। इसी तरह राकेश (50), प्रदीप (52), शिवकिशोर (60), तेज प्रकाश (43), लक्ष्मी शंकर (38), शिवराम सिंह (55), मंगल सिंह (57), सन्नो देवी (52), मनीराम (60) समेत 10 लोगों की मौत हुई है। परिजनों के मुताबिक, सभी को कुछ दिनों से बुखार आ रहा था। घर पर ही इलाज चल रहा था।
कुछ अस्पताल से इलाज कराकर ठीक भी हो गए। पतारा सीएचसी अधीक्षक पवन सचान ने बताया कि बीते दिनों जहांगीराबाद में कैंप लगाकर कोरोना की जांचें की गई थीं। इसमें एक भी संक्रमित नहीं मिला था। आज भी जांच शिविर लगा था, जिसमें एक युवक में संक्रमण की पुष्टि हुई है।
पतारा कस्बे में कोरोना से एक माह में दो महिलाओं व एक पुरुष की मौत हो चुकी है। इसके बाद से लोगों में दहशत का माहौल है। कस्बा निवासी नन्हे ने बताया कि उनकी पत्नी रुखसाना (42) को बुखार, जुकाम-खांसी की शिकायत थी। घर पर इलाज हो रहा था। तीन दिन बाद अचानक सांस लेने में दिक्कत होने लगी।
जब तक कुछ समझ पाते मौत हो गई। इसी तरह राकेश (50), प्रदीप (52), शिवकिशोर (60), तेज प्रकाश (43), लक्ष्मी शंकर (38), शिवराम सिंह (55), मंगल सिंह (57), सन्नो देवी (52), मनीराम (60) समेत 10 लोगों की मौत हुई है। परिजनों के मुताबिक, सभी को कुछ दिनों से बुखार आ रहा था। घर पर ही इलाज चल रहा था।
कुछ अस्पताल से इलाज कराकर ठीक भी हो गए। पतारा सीएचसी अधीक्षक पवन सचान ने बताया कि बीते दिनों जहांगीराबाद में कैंप लगाकर कोरोना की जांचें की गई थीं। इसमें एक भी संक्रमित नहीं मिला था। आज भी जांच शिविर लगा था, जिसमें एक युवक में संक्रमण की पुष्टि हुई है।