{"_id":"5d835b8d8ebc3e93a9532085","slug":"vikas-from-kanpur-registered-name-in-asia-book-of-records-by-riding-5278-km","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"विकास ने 75 जिलों का भ्रमण कर बाइक से तय की 5278 किलोमीटर की दूरी, बनाया रिकॉर्ड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विकास ने 75 जिलों का भ्रमण कर बाइक से तय की 5278 किलोमीटर की दूरी, बनाया रिकॉर्ड
Thu, 19 Sep 2019 04:56 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 19 Sep 2019 04:56 PM IST
विज्ञापन
विकास सिंह चौहान
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने वाले कानपुर के विकास सिंह चौहान अब 35 साल पुरानी राजदूत से चार हजार किलो मीटर का भ्रमण कर गिनीज बुक में अपना नाम दर्ज कराएंगे। विकास ने इसके लिए अपनी तैयारियां भी शुरू कर दी हैं।
विकास सिंह चौहान
- फोटो : अमर उजाला
पनकी निवासी सचेंद्र सिंह चौहान के पुत्र विकास सिंह चौहान ने यूपी के 75 जिलों का भ्रमण कर 5278 किलो मीटर की दूरी बाइक से तय कर अपना नाम एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज कराया है। विकास ने कहा कि शुरू से कुछ अलग करने की इच्छा थी।
विकास सिंह चौहान
- फोटो : अमर उजाला
जिसके चलते आज यह मुकाम हासिल करने में सफलता मिली है। विकास वर्तमान में सिविल सर्विसेस की तैयारी कर रहे हैं। 12 साल पूर्व हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण करने पर पिता ने विकास को उपहार में बाइक भेंट की थी। उसी बाइक से विकास ने यह रिकॉर्ड बनाया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विकास सिंह चौहान
- फोटो : अमर उजाला
बनानी शुरू कर दी राजदूत
विकास ने बताया कि एक रिकॉर्ड बन चुका है। अब दूसरे रिकॉर्ड के लिए तैयारियां शुरू कर दी है। 35 साल पुरानी राजदूत को मैं खुद बना रहा हूं। राजदूत काफी पुरानी है, जिसके कारण वह कबाड़ हो चुकी हैं। इसकी मरम्मत कर दोबारा से तैयार करूंगा। इसमें करीब चार से पांच माह का समय लगेगा। मार्च 2020 में फिर से एक बार रिकॉर्ड बनाने के लिए निकलूंगा।
विकास ने बताया कि एक रिकॉर्ड बन चुका है। अब दूसरे रिकॉर्ड के लिए तैयारियां शुरू कर दी है। 35 साल पुरानी राजदूत को मैं खुद बना रहा हूं। राजदूत काफी पुरानी है, जिसके कारण वह कबाड़ हो चुकी हैं। इसकी मरम्मत कर दोबारा से तैयार करूंगा। इसमें करीब चार से पांच माह का समय लगेगा। मार्च 2020 में फिर से एक बार रिकॉर्ड बनाने के लिए निकलूंगा।
विज्ञापन
विकास सिंह चौहान
- फोटो : अमर उजाला
पिता को दिया श्रेय
विकास ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय पिता सचेंद्र सिंह चौहान व अन्य परिजनों को दिया है। विकास ने कहा कि जब कभी मैं मुसीबत में फंसा तो पिता ने हर मोड़ पर मेरा साथ दिया और हौसला बढ़ाया है। इसी तरफ अन्य परिजनों ने भी मेरी मदद की है।
विकास ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय पिता सचेंद्र सिंह चौहान व अन्य परिजनों को दिया है। विकास ने कहा कि जब कभी मैं मुसीबत में फंसा तो पिता ने हर मोड़ पर मेरा साथ दिया और हौसला बढ़ाया है। इसी तरफ अन्य परिजनों ने भी मेरी मदद की है।