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बैंक फ्रॉड से बचाएगी वाइस रिकगनिशन सर्विस
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Mon, 13 Apr 2015 02:54 AM IST
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बैंक खाताधारकों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए वाइस रिकगनिशन सिस्टम को लागू किया जा रहा है। यह हाइटेक सुरक्षा तकनीकी विदेशों में काफी लोकप्रिय है। इस खास तंत्र में ग्राहक की जुबान से निकले शब्द पासवर्ड का काम करेंगे। इस दशा में खाताधारक को अपनी गोपनीय जानकारियां साझा नहीं करनी होंगी।
देश में सबसे पहले आईसीआईसीआई बैंक इस सुविधा को लागू करने जा रहा है। जल्द ही कई अन्य बैंक भी इसे शुरू करेंगे। बैंक खाताधारकों की गोपनीय जानकारियां जुटाकर फंड ट्रांसफर करने समेत कई तरह के फ्रॉड करना हैकर्स के लिए अब आम बात हो गई है।
इस पर रोक लगाने के लिए बैंक जागरूकता अभियान चलाते हैं इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग धोखाधड़ी का शिकार बन रहे हैं। इसे देखते हुए विश्व के प्रमुख देशों की तर्ज पर अब देश में वाइस रिकगनिशन सर्विस की शुरुआत होने जा रही है।
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इस खास तकनीकी में ग्राहकों को फोन बैंकिंग के जरिए अपनी गोपनीय जानकारियां जैसे अपना खाता संख्या, सोलह डिजिट का डेबिट-क्रेडिट कार्ड नंबर या पासवर्ड आदि नहीं बताना होता है। खाताधारक सिर्फ रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से फोन करता है।
वहां उससे कुछ खास शब्दों का उच्चारण करने को कहा जाता है, यह शब्द बोलते ही फोन नंबर से कनेक्ट सर्वर उसका मिलान खाताधारक की असल आवाज से करेगा। दस सेकेंड के भीतर आवाज मैच होने पर खाताधारक फंड ट्रांसफर, कार्ड ब्लॉक, बिल पेमेंट से लेकर अन्य लेनदेन कर सकेगा।
यह तकनीकि बायोमैट्रिक सर्टिफिकेशन के लिए जानी जाती है। इसमें जब तक असल खाताधारक के वाइस सैंपल नहीं दिए जाते हैं, तब तक बैंकिंग ट्रांजेक्शन की अनुमति नहीं मिलती है। जल्द ही कई अन्य लेनदेन इसी तकनीकि के साथ उपलब्ध होंगे।
एडवोकेट हेमंत गुप्ता, बैंकिंग एक्सपर्ट
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देश में सबसे पहले आईसीआईसीआई बैंक इस सुविधा को लागू करने जा रहा है। जल्द ही कई अन्य बैंक भी इसे शुरू करेंगे। बैंक खाताधारकों की गोपनीय जानकारियां जुटाकर फंड ट्रांसफर करने समेत कई तरह के फ्रॉड करना हैकर्स के लिए अब आम बात हो गई है।
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इस पर रोक लगाने के लिए बैंक जागरूकता अभियान चलाते हैं इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग धोखाधड़ी का शिकार बन रहे हैं। इसे देखते हुए विश्व के प्रमुख देशों की तर्ज पर अब देश में वाइस रिकगनिशन सर्विस की शुरुआत होने जा रही है।
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इस खास तकनीकी में ग्राहकों को फोन बैंकिंग के जरिए अपनी गोपनीय जानकारियां जैसे अपना खाता संख्या, सोलह डिजिट का डेबिट-क्रेडिट कार्ड नंबर या पासवर्ड आदि नहीं बताना होता है। खाताधारक सिर्फ रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से फोन करता है।
वहां उससे कुछ खास शब्दों का उच्चारण करने को कहा जाता है, यह शब्द बोलते ही फोन नंबर से कनेक्ट सर्वर उसका मिलान खाताधारक की असल आवाज से करेगा। दस सेकेंड के भीतर आवाज मैच होने पर खाताधारक फंड ट्रांसफर, कार्ड ब्लॉक, बिल पेमेंट से लेकर अन्य लेनदेन कर सकेगा।
यह तकनीकि बायोमैट्रिक सर्टिफिकेशन के लिए जानी जाती है। इसमें जब तक असल खाताधारक के वाइस सैंपल नहीं दिए जाते हैं, तब तक बैंकिंग ट्रांजेक्शन की अनुमति नहीं मिलती है। जल्द ही कई अन्य लेनदेन इसी तकनीकि के साथ उपलब्ध होंगे।
एडवोकेट हेमंत गुप्ता, बैंकिंग एक्सपर्ट