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ठंड से सिकुड़ रहीं नसें, सात की गई जान, हार्ट अटैक से चार ब्रेन अटैक से तीन की मौत
Tue, 21 Jan 2020 07:21 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 21 Jan 2020 07:21 PM IST
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ठंड का सितम
- फोटो : अमर उजाला
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कानपुर में तापमान के उतार-चढ़ाव ने ब्लड प्रेशर (बीपी) के मरीजों की हालत बिगाड़ दी है। नसों का रास्ता संकरा हो जाने से शरीर में खून का थक्का जम रहा है। इससे हार्ट और ब्रेन अटैक के मामले बढ़ गए हैं। मंगलवार शाम तक सात मरीजों की जान चली गई।
इनमें हार्ट अटैक से चार और ब्रेन अटैक से तीन मरीजों की मौत हुई। इसके अलावा ब्रेन अटैक, सीओपीडी और अस्थमा अटैक के 12 मरीजों को गंभीर हालत में हैलट की इमरजेंसी में भर्ती किया गया है। बीपी बढ़ने से गुर्दे भी फेल हो जा रहे हैं।
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इनमें हार्ट अटैक से चार और ब्रेन अटैक से तीन मरीजों की मौत हुई। इसके अलावा ब्रेन अटैक, सीओपीडी और अस्थमा अटैक के 12 मरीजों को गंभीर हालत में हैलट की इमरजेंसी में भर्ती किया गया है। बीपी बढ़ने से गुर्दे भी फेल हो जा रहे हैं।
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इससे डायलिसिस कराने वाले मरीजों की संख्या बढ़ गई है। चमनगंज के अनीस (47) की हार्ट अटैक से मौत हो गई। बाहर चाय की दुकान पर अचानक तबियत बिगड़ी और पसीना आने लगा। लोग पास के एक नर्सिंगहोम ले गए, जहां कुछ देर बाद मौत हो गई।
डॉक्टरों का कहना था कि बीपी अधिक होने से हार्ट अटैक पड़ गया। इसी तरह रावतपुर के रामआसरे (65), मंधना के शिवकुमार (61) और बिठूर रोड की देवकुमारी (60) की भी हार्ट अटैक से मौत हो गई। क्षेत्रीय डॉक्टरों ने इन मरीजों को कार्डियोलॉजी रेफर किया था।
वहीं बेकनगंज के गुड्डा (42), फजलगंज के पुनीत (51) और स्वरूपनगर के राजेंद्र पाल (62) की ब्रेन अटैक से जान चली गई। इन्हें हैलट लाया गया, लेकिन नहीं बचाए जा सके। हैलट के मेडिसिन विभाग के डॉ. कुणाल सहाय का कहना है कि तापमान के उतार-चढ़ाव का बीपी पर असर पड़ता है। इससे खून का थक्का जमने का खतरा रहता है।
डॉक्टरों का कहना था कि बीपी अधिक होने से हार्ट अटैक पड़ गया। इसी तरह रावतपुर के रामआसरे (65), मंधना के शिवकुमार (61) और बिठूर रोड की देवकुमारी (60) की भी हार्ट अटैक से मौत हो गई। क्षेत्रीय डॉक्टरों ने इन मरीजों को कार्डियोलॉजी रेफर किया था।
वहीं बेकनगंज के गुड्डा (42), फजलगंज के पुनीत (51) और स्वरूपनगर के राजेंद्र पाल (62) की ब्रेन अटैक से जान चली गई। इन्हें हैलट लाया गया, लेकिन नहीं बचाए जा सके। हैलट के मेडिसिन विभाग के डॉ. कुणाल सहाय का कहना है कि तापमान के उतार-चढ़ाव का बीपी पर असर पड़ता है। इससे खून का थक्का जमने का खतरा रहता है।