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मुसीबत बनकर टूट रही खाद की किल्लत
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर देहात
Updated Thu, 05 Feb 2015 01:52 AM IST
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फसल की पैदावार और अधिक शानदार मिले इसके लिए किसान यूरिया आदि का उपयोग करता। जिले में जनवरी बीत गई और फरवरी की शुरुआत हो गई, बावजूद इसके किसान एक बोरी यूरिया खाद के लिए दर दर भटकने को मजबूर है।
स्थानीय प्रशासन की लापरवाही का नतीजा है कि किसान निजी दुकानों पर खाद के लिए निर्भर हैं। आर्थिक रूप से कमजोर किसानों के लिए खाद का संकट आफत बनकर आया है।
सुबह होते ही जिले के अलग अलग कसबों में बनी समितियों के बाहर यूरिया खाद के लिए किसानों की कतार लग जाती है और चिकचिक होना आम बात हो गई है।
भीड़ जब ज्यादा होती तो नौबत मारपीट तक की आ रही है। जिला प्रशासन के प्रयास सोसाइटी से यूरिया खाद की पर्याप्त उपलब्धता नहीं दे पा रहे हैं। देहात के किसान खासे नाराज है।
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दूसरी ओर सोसाइटियों में डीएपी, एनपीके, एमओपी के भंडार पर्याप्त मात्रा में भरे पड़े हैं। बुधवार को अमर उजाला के प्रतिनिधि ने जिले के अलग अलग समितियों का दौरा कर खाद वितरण के हालात देखे।
राजकुमार श्रीवास्तव ( मुख्य विकास अधिकारी कानपुर देहात) ने बताया कि देहात में खाद की रैक उतरने की कोई व्यवस्था नहीं है। जिसके चलते कानपुर नगर में खाद रैक उतरने के बाद देहात में भेजी जाती है। जिससे खाद पहुंचने में कई लग जाते हैं। फिलहाल सभी सोसाइटियों में यूरिया की उपलब्धता कराई जा रही है।
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स्थानीय प्रशासन की लापरवाही का नतीजा है कि किसान निजी दुकानों पर खाद के लिए निर्भर हैं। आर्थिक रूप से कमजोर किसानों के लिए खाद का संकट आफत बनकर आया है।
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सुबह होते ही जिले के अलग अलग कसबों में बनी समितियों के बाहर यूरिया खाद के लिए किसानों की कतार लग जाती है और चिकचिक होना आम बात हो गई है।
भीड़ जब ज्यादा होती तो नौबत मारपीट तक की आ रही है। जिला प्रशासन के प्रयास सोसाइटी से यूरिया खाद की पर्याप्त उपलब्धता नहीं दे पा रहे हैं। देहात के किसान खासे नाराज है।
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दूसरी ओर सोसाइटियों में डीएपी, एनपीके, एमओपी के भंडार पर्याप्त मात्रा में भरे पड़े हैं। बुधवार को अमर उजाला के प्रतिनिधि ने जिले के अलग अलग समितियों का दौरा कर खाद वितरण के हालात देखे।
राजकुमार श्रीवास्तव ( मुख्य विकास अधिकारी कानपुर देहात) ने बताया कि देहात में खाद की रैक उतरने की कोई व्यवस्था नहीं है। जिसके चलते कानपुर नगर में खाद रैक उतरने के बाद देहात में भेजी जाती है। जिससे खाद पहुंचने में कई लग जाते हैं। फिलहाल सभी सोसाइटियों में यूरिया की उपलब्धता कराई जा रही है।