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कानपुर: यूपीसीडा के प्रधान महाप्रबंधक जबरिया रिटायर, सपा-बसपा शासन में सरकार से कम नहीं थी अरुण मिश्रा की हनक

Wed, 18 Aug 2021 11:58 AM IST
शाहरुख खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 18 Aug 2021 11:58 AM IST
सार

1986 में नौकरी शुरू करने वाला घोटाले बाज अरुण मिश्रा अपने कार्यकाल में सात बार निलंबित हो चुका है। उसे प्राधिकरण का सुपर एमडी कहा जाता था। 
 

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UPSIDA Chief GM Forcibly Retired Principal General Manager Arun Mishra forcibly retires by up government
अरुण मिश्रा - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

योगी सरकार के ऑपरेशन क्लीन के तहत भ्रष्ट अफसरों पर कार्रवाई लगातार जारी है। प्रदेश सरकार ने अब यूपीसीडा के प्रधान महाप्रबंधक अरुण मिश्रा को जबरिया रिटायर कर दिया है। हालांकि सपा-बसपा शासन में अरुण मिश्रा की हनक किसी सरकार से कम नहीं थी। 
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भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे, लेकिन कार्रवाई होने के बजाए उसका कद और बढ़ता गया। 2009 में उसने पाली गांव में बगैर सड़क बनवाए दो करोड़ का भुगतान करा लिया। 2012 में शिकायत भी हुई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद 2018 में अरुण को इस मामले में निलंबित किया गया। हालांकि हाईकोर्ट के आदेश के बाद बहाल हो गया था, लेकिन सारे विभागीय अधिकार छीन लिए गए थे। इसके बाद अक्तूबर 2020 में अरुण मिश्रा की गिरफ्तारी हुई।
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1986 में नौकरी शुरू करने वाला घोटाले बाज अरुण मिश्रा अपने कार्यकाल में सात बार निलंबित हो चुका है। उसे प्राधिकरण का सुपर एमडी कहा जाता था। 1998 में अधिशासी अभियंता और 2003 में मुख्य अभियंता बन गया।

वर्ष 2007 में यूपीसीडा के असीमित अधिकार मिलने के बाद गाजियाबाद स्थित ट्रोनिका सिटी में 400 से ज्यादा औद्योगिक प्लाट बेचने और कई बड़े गंभीर आरोप लगे थे। इसके बावजूद उसे पकड़ नहीं गया था। वर्ष 2009 में प्रयागराज हाईवे से पाली गांव होकर चकेरी औद्योगिक क्षेत्र में यूपीसीडा ने तीन किलोमीटर सड़क बनवाई थी। 

करीब दो किमी सड़क पीडब्ल्यू ने बनवाई थी। कागजों में घालमेल कर अरुण ने यह सड़क भी यूपीसीडा द्वारा निर्मित दिखाकर दो करोड़ का भुगतान करा लिया था। मामला खुलने के बाद तत्कालीन प्रबंध निदेशक इफ्तिखारुद्दीन ने वर्ष 2012 में अजीत सिंह, नागेंद्र सिंह, एसके वर्मा और फर्म प्रोपराइटर के खिलाफ चकेरी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। छह साल बाद इस मामले में कार्रवाई हुई थी। 

बिना काम के कर दिया था करोड़ों का भुगतान
अरुण मिश्रा ने गाजियाबाद स्थित ट्रोनिका सिटी में चार एमएलडी क्षमता के सीईटीपी एवं कन्वेंस सिस्टम के रखरखाव के लिए वर्ष 2014 से 2017 के बीच 5.54 करोड़ का भुगतान किया था। इसी औद्योगिक क्षेत्र में सड़कों के निर्माण पर सात करोड़ का भुगतान किया था।

वहीं लखनऊ के अमौसी औद्योगिक क्षेत्र में 2500 वर्ग मीटर के कैंप कार्यालय की स्थापना होनी थी, लेकिन सपा शासन में अरुण ने मनमानी की और 18 हजार वर्ग मीटर में पांच मंजिला भवन एवं एक्जीविशन सेंटर बनाने का प्रोजेक्ट तैयार करा लिया था।  
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