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Kanpur News: चंदा लेने के विवाद में कपड़ा कमेटी की बैठक में हंगामा
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कानपुर। कानपुर कपड़ा कमेटी की मासिक बैठक मंगलवार को जनरलगंज स्थित कमेटी कार्यालय में हुई। बैठक में चंदा लेने को लेकर विवाद फिर गरमा गया और जमकर हंगामा हुआ। नौ निदेशकों की ओर से कमेटी अध्यक्ष पर धन उगाही का आरोप लगाने और पूर्व कोषाध्यक्ष ज्योति प्रकाश नेवटिया के आरोप पत्र पर चर्चा का एजेंडा रखा गया था। बैठक शुरू होते ही कमेटी को बिना जानकारी दिए चंदा लेने का मुद्दा उठ गया।
निदेशकों ने कहा कि कमेटी कंपनी एक्ट के प्रावधानों और निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित होती है। उनका आरोप था कि चेक लिए जाने के बाद भी प्रधान महासचिव और कोषाध्यक्ष को इसकी जानकारी नहीं दी गई। कमेटी के नाम पर प्राप्त सभी चेक पहले कमेटी कार्यालय में जमा होने चाहिए। किसी पदाधिकारी को चेक अपने पास नहीं रखना चाहिए। इस मुद्दे पर काफी देर तक बहस और हंगामा चलता रहा।
कमेटी अध्यक्ष वीरेंद्र गुलाटी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बैठक में चुनाव अधिकारियों ने भी माना कि सभी लोगों ने स्वेच्छा से चेक दिए थे। चेक कमेटी के नाम पर ही लिए गए हैं और जल्द ही सभी चेक कार्यालय में जमा करा दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि आमसभा पहले पड़ जाने के कारण त्रुटिवश कमेटी को इसकी जानकारी नहीं दी जा सकी। बाजार हित में कार्य किया जा रहा है और आगे भी जारी रहेगा।बैठक में काशी प्रसाद शर्मा, श्रीकृष्ण गुप्ता, अमित दोसर, रुमित सिंह सागरी, अशोक माहेश्वरी, नवीन नेवटिया और राकेश कपूर समेत अन्य पदाधिकारी व निदेशक मौजूद रहे।
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ये था मामला
कमेटी के कोषाध्यक्ष अशोक माहेश्वरी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष नवीन कुमार नेवटिया समेत निदेशक रुमित सिंह सागरी, अमित दोसर, श्यामजी गुप्ता, अभिषेक चावला, राम प्रकाश गुप्ता, राकेश कपूर और सुनील अग्रवाल ने कमेटी कार्यालय को पत्र भेजकर अध्यक्ष पर नियमों की अनदेखी और धन उगाही के आरोप लगाए थे। हालांकि एक दिन बाद ही चंदा देने वाले कुछ व्यापारी अध्यक्ष के समर्थन में उतर आए। उन्होंने पत्र भेजकर आरोपों को गलत बताया और कहा कि कुछ लोग अच्छे कार्यों को गलत रूप दे रहे हैं। व्यापारियों के अनुसार अध्यक्ष के साथ बैठक में शव वाहन, ठंडे पानी की मशीन और बाहर से आने वाले व्यापारियों के ठहरने की बेहतर व्यवस्था के लिए सहमति बनी थी। इन कार्यों के लिए व्यापारियों ने स्वेच्छा से चंदा दिया था। इसकी जानकारी भी कमेटी को दी गई थी।
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निदेशकों ने कहा कि कमेटी कंपनी एक्ट के प्रावधानों और निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित होती है। उनका आरोप था कि चेक लिए जाने के बाद भी प्रधान महासचिव और कोषाध्यक्ष को इसकी जानकारी नहीं दी गई। कमेटी के नाम पर प्राप्त सभी चेक पहले कमेटी कार्यालय में जमा होने चाहिए। किसी पदाधिकारी को चेक अपने पास नहीं रखना चाहिए। इस मुद्दे पर काफी देर तक बहस और हंगामा चलता रहा।
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कमेटी अध्यक्ष वीरेंद्र गुलाटी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बैठक में चुनाव अधिकारियों ने भी माना कि सभी लोगों ने स्वेच्छा से चेक दिए थे। चेक कमेटी के नाम पर ही लिए गए हैं और जल्द ही सभी चेक कार्यालय में जमा करा दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि आमसभा पहले पड़ जाने के कारण त्रुटिवश कमेटी को इसकी जानकारी नहीं दी जा सकी। बाजार हित में कार्य किया जा रहा है और आगे भी जारी रहेगा।बैठक में काशी प्रसाद शर्मा, श्रीकृष्ण गुप्ता, अमित दोसर, रुमित सिंह सागरी, अशोक माहेश्वरी, नवीन नेवटिया और राकेश कपूर समेत अन्य पदाधिकारी व निदेशक मौजूद रहे।
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ये था मामला
कमेटी के कोषाध्यक्ष अशोक माहेश्वरी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष नवीन कुमार नेवटिया समेत निदेशक रुमित सिंह सागरी, अमित दोसर, श्यामजी गुप्ता, अभिषेक चावला, राम प्रकाश गुप्ता, राकेश कपूर और सुनील अग्रवाल ने कमेटी कार्यालय को पत्र भेजकर अध्यक्ष पर नियमों की अनदेखी और धन उगाही के आरोप लगाए थे। हालांकि एक दिन बाद ही चंदा देने वाले कुछ व्यापारी अध्यक्ष के समर्थन में उतर आए। उन्होंने पत्र भेजकर आरोपों को गलत बताया और कहा कि कुछ लोग अच्छे कार्यों को गलत रूप दे रहे हैं। व्यापारियों के अनुसार अध्यक्ष के साथ बैठक में शव वाहन, ठंडे पानी की मशीन और बाहर से आने वाले व्यापारियों के ठहरने की बेहतर व्यवस्था के लिए सहमति बनी थी। इन कार्यों के लिए व्यापारियों ने स्वेच्छा से चंदा दिया था। इसकी जानकारी भी कमेटी को दी गई थी।