UPPCB की बड़ी कार्रवाई: गंगा में अवैध पुल बनाकर धारा मोड़ने का मामला, फर्म पर लगा 4.29 करोड़ का जुर्माना
यूपीपीसीबी ने पर्यावरण नुकसान की पुष्टि के बाद 30 दिन में जुर्माना जमा करने के आदेश दिए हैं। बता दें कि रिपोर्ट के आधार पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी ने जुर्माना लगाने की संस्तुति की थी।
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कानपुर में अवैध तरीके से अस्थायी पुल बनाकर गंगा की धारा मोड़ने के आरोप में फंसे बालू खनन पट्टा धारक मेसर्स वैष्णवी इंटरप्राइजेज के मालिक नागेंद्र सिंह पर उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने 4.29 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का जुर्माना लगाया है।
फर्म को इस जुर्माना राशि को 30 दिन के अंदर बोर्ड के पास जमा करने को कहा गया है। आरोप है कि फर्म मालिक ने पर्यावरणीय स्वीकृति मिलने के बाद जल एवं वायु अधिनियम के नियमों का उल्लंघन करते हुए खनन कार्य शुरू करने से पहले बोर्ड से बिना जल एवं वायु प्रदूषण नियंत्रण की अनुमति लिए खनन शुरू कर दिया था।
जांच के दौरान पता चला कि बिना अनुमति के फर्म मालिक ने 7 अप्रैल 2018 से 3 फरवरी 2021 तक कुल 1034 दिन तक 2.10 लाख घनमीटर प्रति वर्ष की दर से बालू का खनन किया। इसके बाद डीएम कानपुर ने खनन पर रोक लगा दी लेकिन फिर 13 दिसंबर को बालू खनन की अनुमति को रीस्टोर कर दिया।
इसके बाद फर्म मालिक ने 13 फरवरी 2021 से 2 अप्रैल 2022 तक 111 दिन और बालू का अवैध खनन किया। इस पूरी मियाद के दौरान पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए जाने पर अब एनजीटी के आदेश पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा निर्धारित सिस्टम के अनुसार 4.29 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है।
अवैध पुल के मामले में भी फंसी है गर्दन
अवैध पुल बनाकर गंगा की धार मोड़ने के मामले में भी फर्म मालिक नागेंद्र सिंह की गर्दन फंसी हुई है। इस मामले में एनजीटी में एक केस अभी लंबित है।
इस केस के दौरान एनजीटी ने कानपुर और उन्नाव के डीएम व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एक संयुक्त कमेटी को स्थलीय निरीक्षण कर एक्शन टेकन रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। इस रिपोर्ट को कमेटी ने सौंप दिया है और अब उसके आधार पर ट्रिब्यूनल फैसला ले सकता है।