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यूपी कैटेट: भाई टॉपर, बहन की 183वीं रैंक, जानिए सफलता की कहानी टॉपर्स की जुबानी
Fri, 04 Sep 2020 12:05 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Fri, 04 Sep 2020 12:05 AM IST
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दीपांकर अपनी बहन रानी के साथ
- फोटो : अमर उजाला
यूपी कैटेट परास्नातक की परीक्षा में ओवरऑल दूसरी और परास्नातक (एग्रीकल्चर) में पहली रैंक हासिल करने वाले दीपांकर तिवारी की बहन रानी तिवारी को 183वीं रैंक मिली है। बहन जहां भाई की सफलता पर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रही है वही भाई भी बहन के लिए खुश है।
काकादेव निवासी दीपांकर और रानी के पिता देवी प्रसाद तिवारी बीएसएनल से रिटायर है। मां अवधेश कुमार गृहिणी हैं। दीपांकर ने ग्रेजुएशन सीएसएसए विवि से किया है। स्नातक की प्रवेश परीक्षा में भी वह अव्वल रहे थे। उनका शुरू से ही रुझान कृषि क्षेत्र की ओर है।
उनका कहना है कि कृषि के क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं। इंजीनियरिंग और मेडिकल ही केवल सफलता के आयाम को तय नहीं करती है। हालांकि वह सिविल सर्विसेज की तैयारी करके देश सेवा में समर्पित होना चाहते हैं।
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बहन रानी तिवारी ने ग्रेजुएशन विश्वविद्यालय से किया था। वह स्कूलों में कराटे ट्रेनर भी हैं। रानी कहती हैं कि कराटे सिखाने के साथ ही उन्होंने पढ़ाई की इस कारण रैंक पिछड़ गई। रानी कहती हैं कि भाई से रात में खाने के दौरान ही पढ़ाई को लेकर डिस्कशन होता था। वह जितना पढ़ाई को लेकर फोकस था मैं उतना ही फोकस अपने कराटे में थी। भाई की सफलता पर बेहद खुश हूं।
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काकादेव निवासी दीपांकर और रानी के पिता देवी प्रसाद तिवारी बीएसएनल से रिटायर है। मां अवधेश कुमार गृहिणी हैं। दीपांकर ने ग्रेजुएशन सीएसएसए विवि से किया है। स्नातक की प्रवेश परीक्षा में भी वह अव्वल रहे थे। उनका शुरू से ही रुझान कृषि क्षेत्र की ओर है।
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उनका कहना है कि कृषि के क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं। इंजीनियरिंग और मेडिकल ही केवल सफलता के आयाम को तय नहीं करती है। हालांकि वह सिविल सर्विसेज की तैयारी करके देश सेवा में समर्पित होना चाहते हैं।
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बहन रानी तिवारी ने ग्रेजुएशन विश्वविद्यालय से किया था। वह स्कूलों में कराटे ट्रेनर भी हैं। रानी कहती हैं कि कराटे सिखाने के साथ ही उन्होंने पढ़ाई की इस कारण रैंक पिछड़ गई। रानी कहती हैं कि भाई से रात में खाने के दौरान ही पढ़ाई को लेकर डिस्कशन होता था। वह जितना पढ़ाई को लेकर फोकस था मैं उतना ही फोकस अपने कराटे में थी। भाई की सफलता पर बेहद खुश हूं।
वैज्ञानिक बनकर किसानों की समस्या दूर करूंगा
किसान का बेटा हूं। किसानी करूंगा लेकिन वैज्ञानिक तरह से। वैज्ञानिक बनकर किसानों की समस्याओं को दूर करूंगा क्योंकि उन समस्याओं को नजदीक से जाना है। यह बात कानपुर के छोटे से गांव रौतेपुर के रहने वाले किसान बृजेश कुमार के बेटे सौरभ कुमार ने कही। सौरभ ने यूपी कैटेट की पीएचडी परीक्षा की ग्रुप कैटेगिरी में टॉप किया है। इनका विषय पादप रहा। इस विषय में इन्हें ओवरऑल दूसरी रैंक मिली है। सौरभ ने बताया कि वह पादप विभाग में पीएचडी कर किसानों के लिए ऐसी तकनीक खोजना चाहते हैं ताकि प्रतिकूल मौसम में किसानों को नुकसान न हो। सौरभ की मां रानी देवी गृहिणी हैं। सौरभ ने बीएससी (एग्रीकल्चर) की पढ़ाई सीएसए और एमएससी (एग्रीकल्चर) की पढ़ाई बीएचयू से की है।
गांव की दुर्दशा सुधारना चाहता हूं
स्नातक (एग्रीकल्चर) में टॉप करने वाले कुलदीप विश्वकर्मा गांव की दुर्दशा को सुधारना चाहते हैं। कुलदीप के पिता मुरारी विश्वकर्मा किसान हैं। मूलता: मिर्जापुर के रहने वाले कुलदीप गीता नगर के आदर्श एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट में रहकर तैयारी कर रहे थे। कुलदीप ने बताया कि संस्थान ने पूरा सहयोग किया।
किसानी करना किसी आईएएस से कम नहीं
किसानी करना किसी आईएएस की नौकरी से कम नहीं है। आईएएस की तरह किसान भी देश सेवा के लिए तन मन से तत्पर रहते हैं। इसी वजह से कृषि क्षेत्र में भविष्य संवारने का सपना संजोया। यह कहना है यूपी कैटेट की स्नातक की परीक्षा में 39वीं रैंक हासिल करने वाली किदवईनगर निवासी दिव्यांशी अवस्थी का। कहती हैं कि 75 फीसदी से अधिक आबादी खेती किसानी पर निर्भर है ऐसे में इससे बेहतर कोई क्षेत्र हो ही नहीं सकता। शिक्षक पिता राम प्रकाश और विद्योतमा की बेटी दिव्यांशी ने 2019 में विनती शिक्षा निकेतन से 12वीं की परीक्षा पास की थी।
किसान का बेटा हूं। किसानी करूंगा लेकिन वैज्ञानिक तरह से। वैज्ञानिक बनकर किसानों की समस्याओं को दूर करूंगा क्योंकि उन समस्याओं को नजदीक से जाना है। यह बात कानपुर के छोटे से गांव रौतेपुर के रहने वाले किसान बृजेश कुमार के बेटे सौरभ कुमार ने कही। सौरभ ने यूपी कैटेट की पीएचडी परीक्षा की ग्रुप कैटेगिरी में टॉप किया है। इनका विषय पादप रहा। इस विषय में इन्हें ओवरऑल दूसरी रैंक मिली है। सौरभ ने बताया कि वह पादप विभाग में पीएचडी कर किसानों के लिए ऐसी तकनीक खोजना चाहते हैं ताकि प्रतिकूल मौसम में किसानों को नुकसान न हो। सौरभ की मां रानी देवी गृहिणी हैं। सौरभ ने बीएससी (एग्रीकल्चर) की पढ़ाई सीएसए और एमएससी (एग्रीकल्चर) की पढ़ाई बीएचयू से की है।
गांव की दुर्दशा सुधारना चाहता हूं
स्नातक (एग्रीकल्चर) में टॉप करने वाले कुलदीप विश्वकर्मा गांव की दुर्दशा को सुधारना चाहते हैं। कुलदीप के पिता मुरारी विश्वकर्मा किसान हैं। मूलता: मिर्जापुर के रहने वाले कुलदीप गीता नगर के आदर्श एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट में रहकर तैयारी कर रहे थे। कुलदीप ने बताया कि संस्थान ने पूरा सहयोग किया।
किसानी करना किसी आईएएस से कम नहीं
किसानी करना किसी आईएएस की नौकरी से कम नहीं है। आईएएस की तरह किसान भी देश सेवा के लिए तन मन से तत्पर रहते हैं। इसी वजह से कृषि क्षेत्र में भविष्य संवारने का सपना संजोया। यह कहना है यूपी कैटेट की स्नातक की परीक्षा में 39वीं रैंक हासिल करने वाली किदवईनगर निवासी दिव्यांशी अवस्थी का। कहती हैं कि 75 फीसदी से अधिक आबादी खेती किसानी पर निर्भर है ऐसे में इससे बेहतर कोई क्षेत्र हो ही नहीं सकता। शिक्षक पिता राम प्रकाश और विद्योतमा की बेटी दिव्यांशी ने 2019 में विनती शिक्षा निकेतन से 12वीं की परीक्षा पास की थी।