ठंड का कहर: ब्रेन और हार्ट अटैक से पांच रोगियों की मौत, फेफड़ों के संक्रमण का खतरा बढ़ा
शहर के तापमान में लगातार गिरावट से हार्ट और ब्रेन के रोगियों की सांसे थम रही हैं। इसके अलावा इंफ्लुइंजा के रोगियों के फेफड़ों में संक्रमण हो रहा है। सीनियर चेस्ट फिजीशियन डॉ. एसके कटियार का कहना है कि सांस, हृदय और गुर्दा रोगी एहतियात बरतें। ठंड में बेवजह बाहर न निकलें।
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शहर का तापमान 2.6 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाने से माहौल में गलन बढ़ गई है। इसका बुरा असर पुराने रोगियों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। इस गलन से नसों के रोगियों की जान पर बन आई है। रोगियों की उंगलियां नीली पड़ने से गैंगरीन का खतरा बढ़ गया है। इसके अलावा इंफ्लुइंजा के रोगियों के फेफड़ों में संक्रमण हो रहा है। नसों में खून का बहाव धीमा होने से ब्रेन अटैक और हार्ट अटैक के केस बढ़े हैं। मंगलवार को पांच लोगों की मौत हो गई।
बेकनगंज के रहने वाले रुस्तम (60) की हार्ट अटैक से मौत हुई है। परिजनों ने बताया कि वह ब्लड प्रेशर के रोगी रहे हैं। अचानक सांस फूलने लगी और दम तोड़ दिया। आर्यनगर की मालती (55) की भी हार्ट अटैक पड़ा। परिजन कार्डियोलॉजी लेकर भागे लेकिन रास्ते में ही दम तोड़ दिया। वहीं, काकादेव में रमेश (55) की ब्रेन अटैक से मौत हो गई।
कल्याणपुर की दमा रोगी सावित्री (60) की मौत हो गई। उनका इलाज चेस्ट हॉस्पिटल में ओपीडी स्तर पर चल रहा था। इसी तरह नवाबगंज के बाबूराम (59) को सुबह अस्थमा का अटैक पड़ा। परिजन चेस्ट हॉस्पिटल लेकर आए थे। सीनियर चेस्ट फिजीशियन डॉ. एसके कटियार का कहना है कि सांस, हृदय और गुर्दा रोगी एहतियात बरतें। ठंड में बेवजह बाहर न निकलें।