फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   UP's biggest fake license scam case

फर्जी असलहा लाइसेंस मामला: डीएम के साइन स्कैन कर हुआ फर्जीवाड़ा, फंसी इन दोनों अफसरों की कलम

Fri, 23 Aug 2019 01:50 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Fri, 23 Aug 2019 01:50 PM IST
विज्ञापन
UP's biggest fake license scam case
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
फर्जी असलहा लाइसेंस जारी करने के मामले में नोटशीट पर दो अफसरों की कलम फंस रही है। अभी तक की जांच में पता चला है कि नोटशीट पर इन अफसरों के साइन होने के बाद ही फर्जी असलहा लाइसेंस जारी किए गए हैं।
विज्ञापन


इन दोनों अफसरों के सामने पुलिस और तहसील की रिपोर्ट लगी फाइल रखते हुए बताया गया कि जिलाधिकारी ने यह फाइलें पुट अप (लाइसेंस जारी करने के लिए फाइलें मंगाना) की हैं। यह भी आशंका है कि डीएम के साइन स्कैन कर और कुछ पर फर्जी साइन कर लाइसेंस जारी करने के आदेश बनाए गए।
विज्ञापन

असलहा लाइसेंस के आवेदन पर तहसील और पुलिस की रिपोर्ट लगने के बाद फाइल तैयार होती है। हर फाइल पर एक नोटशीट बनती है। इस नोटशीट में फाइल का पूरा ब्योरा लिखते हुए लाइसेंस जारी करने का प्रस्ताव तैयार कर संबंधित अफसर की संस्तुति होती है। इस नोटशीट पर सहायक बाबू और फिर असलहा बाबू अपने साइन करते हैं। इसके बाद संबंधित अफसर साइन करते हैं।

ये होती लाइसेंस देने की प्रक्रिया
असलहा लाइसेंस लेने के लिए सबसे पहले आवेदक फार्म भरकर असलहा विभाग में जमा करता है। फार्म के साथ निवास, उम्र के प्रमाणपत्र, स्वास्थ्य प्रमाणपत्र, आधार कार्ड और अन्य कागजात लगाने होते हैं। असलहा विभाग फार्म की एक प्रति तहसील और एक प्रति पुलिस रिपोर्ट के लिए संबंधित थाने को भेजता है।

 

तहसील से सत्यापन रिपोर्ट लगाई जाती है। पुलिस आवेदक के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने या न होने की रिपोर्ट लगाती है। एलआईयू आवेदक के चाल-चलन की रिपोर्ट लगाती है। सभी रिपोर्ट लगने के बाद आवेदन वापस असलहा विभाग जाता है। इसके बाद लाइसेंस देने के लिए सिटी मजिस्ट्रेट और एडीएम प्रस्तावक के रूप में नोटशीट पर साइन कर संस्तुति के साथ जिलाधिकारी के पास फाइल भेजते हैं।

इसके बाद जिलाधिकारी लाइसेंस जारी करने या न करने का आदेश देते हैं। लाइसेंस जारी करने का आदेश मिलने के बाद किताब (लाइसेंस बुक) जारी होती है। यही प्रक्रिया वरासत के लाइसेंस जारी करने पर लागू होती है। लाइसेंस बुक पर सिटी मजिस्ट्रेट या एडीएम के साइन होते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed