फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   UP News Banda Accused Amit Becomes Prisoner No. 702, Lodged in Barrack 9-A

'रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस': बांदा के दुष्कर्मी को सजा-ए-मौत, ऐतिहासिक फैसले के पीछे शासकीय अधिवक्ताओं की अथक मेहनत

Thu, 08 Jan 2026 03:57 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, बांदा
अमर उजाला नेटवर्क, बांदा Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 08 Jan 2026 03:57 PM IST
सार

बांदा दुष्कर्म कांड में मजबूत पैरवी और सटीक रणनीति से इंसाफ मिला है। मामले को आरोप पत्र की खामियां दूर कर ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ साबित किया। दोषी अमित रैकवार फांसी की सजा के बाद अब नाम नहीं एक नंबर से जाना जाएगा।

विज्ञापन
UP News Banda Accused Amit Becomes Prisoner No. 702, Lodged in Barrack 9-A
बांदा का दुष्कर्मी अमित अब कैदी नंबर 702 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बांदा में छह वर्षीय मासूम से दुष्कर्म के जघन्य मामले में आए ऐतिहासिक फैसले के पीछे शासकीय अधिवक्ताओं की अथक मेहनत, संवेदनशील सोच और मजबूत कानूनी रणनीति का महत्वपूर्ण योगदान रहा। पॉक्सो मामलों के शासकीय अधिवक्ता कमल सिंह गौतम ने इस प्रकरण को केवल एक केस के रूप में नहीं, बल्कि हर उस पिता के दर्द से जोड़ा जिसकी बेटी है। उन्होंने घटना को हृदय विदारक बताते हुए कहा कि इसे हल्के में लेने की कोई गुंजाइश नहीं थी।
विज्ञापन


अक्तूबर में केस सौंपे जाने के बाद से ही कमल सिंह गौतम ने दिन-रात इस पर काम किया। गहन अध्ययन के दौरान यह पाया गया कि पुलिस द्वारा चार्जशीट में दो गंभीर धाराओं को शामिल नहीं किया गया था। इनमें हाथ तोड़ने की धारा 117(2) और दुष्कर्मी की पहचान छुपाने के उद्देश्य से पीड़िता की जीभ काटने की धारा 118(2) शामिल थीं।
विज्ञापन


अधिवक्ता ने विवेचक के साथ मिलकर इन खामियों को दूर कराया और अतिरिक्त चार्जशीट दाखिल करवाई, जिससे आरोपी को बचने का कोई अवसर न मिले। इसी सुदृढ़ कानूनी आधार पर मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी में रखकर मौत की सजा सुनिश्चित की जा सकी।
विज्ञापन
विज्ञापन

 

प्रकरण की मॉनिटरिंग कर रहे शासकीय अधिवक्ता विजय बहादुर सिंह परिहार ने बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में आते ही वे भीतर तक हिल गए थे। ट्रायल के दौरान बच्ची की मानसिक स्थिति ठीक न होने और बोल न पाने जैसी व्यावहारिक कठिनाइयों के बावजूद, गवाहों और साक्ष्यों की सशक्त प्रस्तुति से आरोप सिद्ध किए गए।

उन्होंने इस फैसले के सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे निर्णय समाज में कानून के प्रति विश्वास स्थापित करते हैं। यह अपराधियों को एक स्पष्ट संदेश देता है कि बुरे कर्मों का परिणाम अत्यंत कठोर होता है, जिससे वे अपराध करने से पूर्व सौ बार सोचें। इस ऐतिहासिक निर्णय ने न्याय व्यवस्था की दृढ़ता को साबित किया है। साथ ही समाज में यह संदेश जाता है कि जुर्म करने से पहले परिणाम को लेकर भी सचेत रहना जरूरी है।

अमित अब कैदी नंबर 702 बैरक नंबर 9-ए में रहेगा
बांदा में दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध के लिए मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद अमित रैकवार की दुनिया पूरी तरह बदल गई है। एक समय अपने नाम से पहचाना जाने वाला अमित अब जेल में कैदी नंबर-2621702 के रूप में जाना जाएगा। बेहद दरिंदगी से मासूमियत को कुचलने वाले इस दुष्कर्मी की पहचान सलाखों के पीछे एक संख्या और एक बैरक तक सिमट गई है।
 

अदालत से जिला जेल लाए जाने के बाद अमित रैकवार के व्यवहार में साफ बदलाव देखा गया। जेल सूत्रों के अनुसार, वह पूरी तरह गुमसुम रहा और किसी से कोई बात नहीं की। उसने रात का खाना भी नहीं खाया। जेल अधीक्षक अनिल कुमार ने बताया कि मृत्युदंड की सजा पाए कैदियों की मानसिक स्थिति अत्यंत संवेदनशील होती है।

इसी कारण, अमित रैकवार को अन्य बंदियों से अलग रखा गया है। सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए उसे सामान्य बैरक नंबर पांच से हटाकर बैरक नंबर-9 ए भेज दिया गया है। यह बैरक विशेष निगरानी के तहत उन कैदियों के लिए आरक्षित है, जिन्हें मृत्युदंड की सजा मिली है। यहां कैदी की हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जाती है। जेल डॉक्टरों की एक टीम उसकी मानसिक और शारीरिक स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
 

मृत्युदंड की सजा प्राप्त कैदी को समाज से अलग कर एक विशेष व्यवस्था के तहत रखा जाता है। अमित रैकवार को भी इसी कड़ी निगरानी में रखा गया है। उसकी बैरक को विशेष रूप से सुरक्षित किया गया है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके। कैदी की मानसिक स्थिरता बनाए रखना है।
 

पीड़ित परिवार को डेमो चेक तो मिला पर धनराशि का इंतजार
छह वर्षीय मासूम के माता-पिता ने बताया कि उनकी आर्थिक स्थित सही नहीं है। उन्हें सरकारी मदद का इंतजार अभी भी है। पीड़ित परिवार अपने रिश्तेदार के यहां रहकर बच्ची का इलाज कानपुर में करा रहे हैं। हैवानियत की शिकार हुई बच्ची के पिता ने बताया कि घटना के बाद उन्हें डेमो चेक तो मिली पर धनराशि अभी तक नहीं मिली है।

हालांकि जज ने जिलाधिकारी के माध्यम से प्रमुख सचिव को आदेश दिए हैं कि बच्ची के इलाज का खर्च सरकार की ओर से दिया जाए। जिससे कुछ राहत मिली है। वहीं पिता ने बताया कि दुष्कर्मी के पिता द्वारा लगातार धमकी दी जा रही है। जिससे अब उनका गांव में रहना भी खतरों से भरा है। सरकार से नौकरी की दरकार है ताकि जीवन यापन कर सकें और बच्ची का इलाज करा सकें।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed