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यूपी: पहियों की ऊष्मा से बनी बिजली से भी दौड़ेगी कानपुर मेट्रो, इमरजेंसी पर चालक से कर सकेंगे बात
Fri, 13 Aug 2021 06:54 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 13 Aug 2021 06:54 PM IST
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कानपुर में तैयार मेट्रो ट्रैक
- फोटो : amar ujala
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कानपुर की मेट्रो ट्रेनें लखनऊ से भी ज्यादा आधुनिक होंगी। कोचों में ऐसा उपकरण लगा होगा, जिसकी मदद से किसी इमरजेंसी पर यात्री सीधे चालक से बात कर सकेंगे। चालक मदद के लिए कंट्रोल रूम को सूचना दे देगा। इसके अलावा कोच यात्रियों की संख्या के हिसाब से कूलिंग करेंगे। ट्रेन के ब्रेक लगने पर पैदा होने वाली ऊष्मा से बिजली बनती रहेगी।
इससे ट्रेनों के संचालन में 30 प्रतिशत बिजली बचेगी। लिफ्ट से भी 25 प्रतिशत बिजली बचाई जाएगी। यह जानकारी गुरुवार को मोतीझील, हैलट, गीता नगर, गुरुदेव और आईआईटी मेट्रो स्टेशनों और डिपो में चल रहे कामों के निरीक्षण के दौरान यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक कुमार केशव और निदेशक (परिचालन) सुशील कुमार ने दी।
85 प्रतिशत सिविल निर्माण पूरा
पॉलिटेक्निक में चल रहे डिपो के कामों का जायजा ले रहे एमडी ने बताया कि आईआईटी से मोतीझील तक 85 प्रतिशत सिविल कार्य हो गया है। इलेक्ट्रिक, सिग्निलिंग, टेलीकॉम, ट्रैक और ट्रैक्शन का भी 50 प्रतिशत काम हो गया है। शेष कार्य भी नवंबर तक पूरा हो जाएगा।
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इतने कम समय में ट्रेन चलाने का एशिया में बनेगा रिकार्ड
एमडी ने बताया कि ट्रेन सितंबर के अंत तक आ जाएगी। डिपो भी इसी माह स्वागत के लिए तैयार हो जाएगा। आईआईटी से मोतीझील तक छह ट्रेनों की जरूरत है लेकिन आठ ट्रेनें मंगाई हैं। ट्रेनें तीन कोच की होंगी। नवंबर में ट्रायल के बाद जनवरी से ट्रेन चलने लगेगी। सबसे कम समय में मेट्रो चलाने का यह एशिया का रिकार्ड होगा।
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इससे ट्रेनों के संचालन में 30 प्रतिशत बिजली बचेगी। लिफ्ट से भी 25 प्रतिशत बिजली बचाई जाएगी। यह जानकारी गुरुवार को मोतीझील, हैलट, गीता नगर, गुरुदेव और आईआईटी मेट्रो स्टेशनों और डिपो में चल रहे कामों के निरीक्षण के दौरान यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक कुमार केशव और निदेशक (परिचालन) सुशील कुमार ने दी।
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85 प्रतिशत सिविल निर्माण पूरा
पॉलिटेक्निक में चल रहे डिपो के कामों का जायजा ले रहे एमडी ने बताया कि आईआईटी से मोतीझील तक 85 प्रतिशत सिविल कार्य हो गया है। इलेक्ट्रिक, सिग्निलिंग, टेलीकॉम, ट्रैक और ट्रैक्शन का भी 50 प्रतिशत काम हो गया है। शेष कार्य भी नवंबर तक पूरा हो जाएगा।
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इतने कम समय में ट्रेन चलाने का एशिया में बनेगा रिकार्ड
एमडी ने बताया कि ट्रेन सितंबर के अंत तक आ जाएगी। डिपो भी इसी माह स्वागत के लिए तैयार हो जाएगा। आईआईटी से मोतीझील तक छह ट्रेनों की जरूरत है लेकिन आठ ट्रेनें मंगाई हैं। ट्रेनें तीन कोच की होंगी। नवंबर में ट्रायल के बाद जनवरी से ट्रेन चलने लगेगी। सबसे कम समय में मेट्रो चलाने का यह एशिया का रिकार्ड होगा।
कामर्शियल कांप्लेक्स, फ्लैट बनाकर बढ़ाएंगे आय
एमडी के अनुसार सीटीएस बस्ती के पास समाज कल्याण विभाग से जमीन मिलनी है। उसमें कामर्शियल कांप्लेक्स और उसके ऊपर फ्लैट बनाकर आय बढ़ाई जाएगी।
टैक्सी में 25 प्रतिशत छूट
मेट्रो स्टेशन से ओला, उबर आदि टैक्सी बुक करने में यात्रियों को 25 प्रतिशत छूट मिलेगी। स्टेशनों पर इन टैक्सी एजेंसियों के काउंटर खुलेंगे। छात्रों को मेट्रो स्टेशनों पर पांच रुपये में साइकिल खड़ी करने की सुुविधा मिलेगी। व्हीलचेयर की भी सुविधा होगी।
भूमिगत मेट्रो निर्माण की तैयारियां
कॉरिडोर-वन के दूसरे चरण में चुन्नीगंज से नरौना चौराहे तक भूमिगत मेट्रो स्टेशनों के निर्माण की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसे पूूरा होने में करीब तीन साल लगेंगे। सीसामऊ नाले के पास से चुन्नीगंज तक की जमीन पर भूमिगत मेट्रो निर्माण के लिए बीआईसी से जल्द एनओसी मिलने की उम्मीद है।
एमडी के अनुसार सीटीएस बस्ती के पास समाज कल्याण विभाग से जमीन मिलनी है। उसमें कामर्शियल कांप्लेक्स और उसके ऊपर फ्लैट बनाकर आय बढ़ाई जाएगी।
टैक्सी में 25 प्रतिशत छूट
मेट्रो स्टेशन से ओला, उबर आदि टैक्सी बुक करने में यात्रियों को 25 प्रतिशत छूट मिलेगी। स्टेशनों पर इन टैक्सी एजेंसियों के काउंटर खुलेंगे। छात्रों को मेट्रो स्टेशनों पर पांच रुपये में साइकिल खड़ी करने की सुुविधा मिलेगी। व्हीलचेयर की भी सुविधा होगी।
भूमिगत मेट्रो निर्माण की तैयारियां
कॉरिडोर-वन के दूसरे चरण में चुन्नीगंज से नरौना चौराहे तक भूमिगत मेट्रो स्टेशनों के निर्माण की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसे पूूरा होने में करीब तीन साल लगेंगे। सीसामऊ नाले के पास से चुन्नीगंज तक की जमीन पर भूमिगत मेट्रो निर्माण के लिए बीआईसी से जल्द एनओसी मिलने की उम्मीद है।