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UP election 2022: अपहरण की खबर से चर्चा में आए भाजपा विधायक विनय शाक्य सपा की नाव में हुए सवार
Fri, 14 Jan 2022 08:47 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 14 Jan 2022 08:47 PM IST
सार
चार दिन पूर्व अपहरण की खबर से सुर्खियाें में आए भाजपा विधायक विनय शाक्य ने आखिरकार बीजेपी से इस्तीफा देने के बाद सपा का दामन थाम ही लिया।
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अखिलेश यादव के साथ विनय शाक्य
- फोटो : amar ujala
विस्तार
भाजपा से बिधूना के विधायक विनय शाक्य सपा में शामिल हो गए हैं। उन्होंने भाजपा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। कभी सपा के खिलाफ राजनीति शुरू करके नेता बने विनय शाक्य ने अब सपा का ही दामन थाम लिया है। स्वामी प्रसाद के साथ शुक्रवार को वो सपा में चले गए। विधायक विनय की बेटी रिया शाक्य ने चाचा देवेश के ऊपर दबाव दिलाकर पिता से इस्तीफा दिलाने का आरोप लगाया है।
कांग्रेस के भी हो चुके हैं विनय
विनय शाक्य सबसे पहले कांग्रेस में हुआ करते थे। इसके बाद वो बसपा में शामिल हुए। वो सपा से कई बार विधायक और विधानसभा अध्यक्ष धनीराम वर्मा के खिलाफ 2002 में विधानसभा का चुनाव लड़े। सपा के दिग्गज धनीराम वर्मा को हराकर वो विधायक बन गए। बसपा की सरकार बनी और विनय का कद बढ़ा। उनको राज्यमंत्री बना दिया गया। इसके बाद विनय शाक्य की राजनीति सपा के खिलाफ ही चली। 2007 के चुनाव में धनीराम वर्मा चुनाव जीते और विनय हार गए। इसके बाद बसपा ने 2009 में विनय को एमएलसी मनोनीत कर राज्यमंत्री का दर्जा दे दिया।
2017 में विनय ने पाला बदल भाजपा से लड़ा था चुनाव
विनय शाक्य पिछड़े वर्ग के बड़े नेता के रूप में उभरे। 2012 में एमएलसी रहते हुए विनय ने अपने भाई देवेश को चुनाव लड़ाया, लेकिन सपा से मुलायम के साढ़ू प्रमोद गुप्ता चुनाव जीते और देवेश हार गए। 2017 में विनय ने पाला बदल भाजपा से चुनाव लड़ा और जीत गए। 2018 के अंत मे विनय शाक्य को पैरालिसिस अटैक पड़ा। जिसके बाद विनय के घर विरासत लेने की होड़ लग गई। 2022 में स्वामी प्रसाद के भाजपा छोड़ने पर घर की रार बाहर आ गई।
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बेटी ने चाचा पर लगाए थे पिता को अगवा करने के आरोप
बेटी रिया शाक्य ने अपने चाचा देवेश पर पिता को अगवा करने का आरोप लगाया। जिसका दूसरे दिन विनय ने इटावा आवास पर खंडन किया। अब विधायक विनय शाक्य ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को पत्र भेजकर भाजपा कार्यकाल में दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के नेताओं और जनप्रतिनिधियों को तवज्जो न देने का आरोप लगाया है।
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कांग्रेस के भी हो चुके हैं विनय
विनय शाक्य सबसे पहले कांग्रेस में हुआ करते थे। इसके बाद वो बसपा में शामिल हुए। वो सपा से कई बार विधायक और विधानसभा अध्यक्ष धनीराम वर्मा के खिलाफ 2002 में विधानसभा का चुनाव लड़े। सपा के दिग्गज धनीराम वर्मा को हराकर वो विधायक बन गए। बसपा की सरकार बनी और विनय का कद बढ़ा। उनको राज्यमंत्री बना दिया गया। इसके बाद विनय शाक्य की राजनीति सपा के खिलाफ ही चली। 2007 के चुनाव में धनीराम वर्मा चुनाव जीते और विनय हार गए। इसके बाद बसपा ने 2009 में विनय को एमएलसी मनोनीत कर राज्यमंत्री का दर्जा दे दिया।
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2017 में विनय ने पाला बदल भाजपा से लड़ा था चुनाव
विनय शाक्य पिछड़े वर्ग के बड़े नेता के रूप में उभरे। 2012 में एमएलसी रहते हुए विनय ने अपने भाई देवेश को चुनाव लड़ाया, लेकिन सपा से मुलायम के साढ़ू प्रमोद गुप्ता चुनाव जीते और देवेश हार गए। 2017 में विनय ने पाला बदल भाजपा से चुनाव लड़ा और जीत गए। 2018 के अंत मे विनय शाक्य को पैरालिसिस अटैक पड़ा। जिसके बाद विनय के घर विरासत लेने की होड़ लग गई। 2022 में स्वामी प्रसाद के भाजपा छोड़ने पर घर की रार बाहर आ गई।
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बेटी ने चाचा पर लगाए थे पिता को अगवा करने के आरोप
बेटी रिया शाक्य ने अपने चाचा देवेश पर पिता को अगवा करने का आरोप लगाया। जिसका दूसरे दिन विनय ने इटावा आवास पर खंडन किया। अब विधायक विनय शाक्य ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को पत्र भेजकर भाजपा कार्यकाल में दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के नेताओं और जनप्रतिनिधियों को तवज्जो न देने का आरोप लगाया है।