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UP: यमराज बनकर सड़कों पर दौड़ रहीं महोबा में फर्जी तरीके से दर्ज 79 बसें, जांच में चौंकाने वाला खुलासा
Sat, 13 Jul 2024 05:57 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महोबा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महोबा
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 13 Jul 2024 05:57 PM IST
सार
उन्नाव हादसे में शिकार महोबा में दर्ज बस की जांच के बाद चौंकाने वाली बात सामने आई है। जिनके नाम केयर ऑफ में दर्ज कराईं बसें उन्हें जानकारी ही नहीं है। बस माफिया का बड़ा सिंडीकेट सामने आने की आशंका जताई जा रही है।
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महोबा का सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आपके ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के लिए एड्रेस के प्रूफ के लिए तमाम तरह के कागज मांगने वाले परिवहन विभाग को यह नहीं मालूम कि यमराज बनकर दौड़ रहीं इन स्लीपर बसों का असली मालिक कौन है। बस माफिया के सिंडीकेट ने अफसरों की आंखों में धूल झोंककर केयर ऑफ में पंजीयन करा दिया। बसें पूरे देश में दौड़ने लगीं। सिर्फ महोबा में केयर ऑफ में दर्ज 79 बसें एआरटीओ में पंजीकृत हैं। यह कभी उन्नाव नहीं आईं। उन्नाव में हादसे में 18 लोगों की जान न जाती तो यह खेल भी न खुलता।
एआरटीओ कार्यालय में तीन दिन से चल रही जांच के दौरान इस बात का खुलासा हुआ है कि जो बसें महोबा में केयर ऑफ में दर्ज हैं, वह कभी महोबा आई ही नहीं। ऐसे में इन बसों की फिटनेस कैसे जांची गई। उन्हें फिटनेस प्रमाण पत्र देने में नियमों का पालन क्यों नहीं किया गया, यह बड़ा सवाल है। बस माफियाओं का सिंडीकेट बड़ा है और दूर तक इसके तार जुड़े हैं। जनपद उन्नाव में जिस बस से हादसा हुआ वह राजस्थान के केसी जैन ट्रैवल्स के नाम से संचालित है जबकि बस मालिक की कोरोना के दौरान मौत हो चुकी है। बिहार का एक व्यक्ति बस को ठेके पर लेकर दिल्ली से संचालित करता है। यह बस कभी महोबा नहीं आई लेकिन देश के विभिन्न राज्यों में दौड़ती रही।
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एआरटीओ कार्यालय में तीन दिन से चल रही जांच के दौरान इस बात का खुलासा हुआ है कि जो बसें महोबा में केयर ऑफ में दर्ज हैं, वह कभी महोबा आई ही नहीं। ऐसे में इन बसों की फिटनेस कैसे जांची गई। उन्हें फिटनेस प्रमाण पत्र देने में नियमों का पालन क्यों नहीं किया गया, यह बड़ा सवाल है। बस माफियाओं का सिंडीकेट बड़ा है और दूर तक इसके तार जुड़े हैं। जनपद उन्नाव में जिस बस से हादसा हुआ वह राजस्थान के केसी जैन ट्रैवल्स के नाम से संचालित है जबकि बस मालिक की कोरोना के दौरान मौत हो चुकी है। बिहार का एक व्यक्ति बस को ठेके पर लेकर दिल्ली से संचालित करता है। यह बस कभी महोबा नहीं आई लेकिन देश के विभिन्न राज्यों में दौड़ती रही।
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केयर ऑफ में मिलीं 40 अन्य बसों के ढूंढे जा रहे मालिक
दो दिन पहले उन्नाव में सड़क हादसे में 18 लोगों की मौत व 19 लोगों के घायल होने के बाद महोबा के एआरटीओ कार्यालय के अधिकारियों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। उन्नाव में हादसे की शिकार बस महोबा में केयर ऑफ में खन्ना थाना क्षेत्र के मवईखुर्द गांव निवासी पुष्पेंद्र के नाम दर्ज है। शासन की ओर से नमित की गई जांच टीम की पड़ताल के दौरान गुरुवार को यह बात सामने आई थी कि पुष्पेंद्र और कबरई निवासी सत्यम अग्निहोत्री के नाम 39 बसें केयर ऑफ में दर्ज हैं। इन दोनों को पता ही नहीं ये बसें कब उनके नाम पर दौड़ रही हैं। इस बीच, शुक्रवार को भी एआरटीओ कार्यालय में बसों के पंजीयन से जुड़े दस्तावेजों की जांच पड़ताल का सिलसिला चला। 40 अन्य बसें जो केयर ऑफ में दर्ज हैं। उसकी पड़ताल जारी है।
दो दिन पहले उन्नाव में सड़क हादसे में 18 लोगों की मौत व 19 लोगों के घायल होने के बाद महोबा के एआरटीओ कार्यालय के अधिकारियों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। उन्नाव में हादसे की शिकार बस महोबा में केयर ऑफ में खन्ना थाना क्षेत्र के मवईखुर्द गांव निवासी पुष्पेंद्र के नाम दर्ज है। शासन की ओर से नमित की गई जांच टीम की पड़ताल के दौरान गुरुवार को यह बात सामने आई थी कि पुष्पेंद्र और कबरई निवासी सत्यम अग्निहोत्री के नाम 39 बसें केयर ऑफ में दर्ज हैं। इन दोनों को पता ही नहीं ये बसें कब उनके नाम पर दौड़ रही हैं। इस बीच, शुक्रवार को भी एआरटीओ कार्यालय में बसों के पंजीयन से जुड़े दस्तावेजों की जांच पड़ताल का सिलसिला चला। 40 अन्य बसें जो केयर ऑफ में दर्ज हैं। उसकी पड़ताल जारी है।
जनप्रतिनिधियों ने दबाव बनाकर कराए थे पंजीयन
पिछले पांच साल से महोबा एआरटीओ कार्यालय में जनप्रतिनिधियों का दखल रहा। इन्हीं जनप्रतिनिधियों का आशीर्वाद होने के चलते बस संचालक माफिया एआरटीओ कार्यालय महोबा के अधिकारियों पर अपनी धौंस जमाकर मनचाहा काम करवाते रहे। इस तरह 79 बसें महोबा एआरटीओ कार्यालय में केयर ऑफ पर दर्ज हुईं। एआरटीओ कार्यालय में पूर्व में तैनात रहे एक अधिकारी ने नाम छापने की शर्त पर बताया कि जनप्रतिनिधियों के दबाव के कारण यहां अधिकतम केयर ऑफ के पते पर बसें दर्ज हुई हैं।
पिछले पांच साल से महोबा एआरटीओ कार्यालय में जनप्रतिनिधियों का दखल रहा। इन्हीं जनप्रतिनिधियों का आशीर्वाद होने के चलते बस संचालक माफिया एआरटीओ कार्यालय महोबा के अधिकारियों पर अपनी धौंस जमाकर मनचाहा काम करवाते रहे। इस तरह 79 बसें महोबा एआरटीओ कार्यालय में केयर ऑफ पर दर्ज हुईं। एआरटीओ कार्यालय में पूर्व में तैनात रहे एक अधिकारी ने नाम छापने की शर्त पर बताया कि जनप्रतिनिधियों के दबाव के कारण यहां अधिकतम केयर ऑफ के पते पर बसें दर्ज हुई हैं।
35 गाड़ियों के पंजीयन निलंबित
कबरई क्षेत्र के व्यक्तियों के नाम केयर आफ में दर्ज 39 बसें में 35 बसों के फिटनेस और परमिट समाप्त हो चुके हैं। इन 35 बसों के पंजीयन निलंबित कर दिए गए हैं जबकि केयर ऑफ में दर्ज चार बसों के फिटनेस व परमिट अभी वैध हैं। इन बसों के मालिक को एआरटीओ महोबा की ओर से पत्र भेजा गया है। बसों के पंजीयन में किए गए केयर ऑफ के खेल की परतें अब खुलने लगी हैं।
केयर ऑफ पर पूरी तरह से रोक
केयर ऑफ में 35 बसों का परमिट और फिटनेस समाप्त कर दिया गया है। इन बसों का पंजीकरण भी निलंबित कर दिया गया है। जांच अभी जारी है। पूर्व के अधिकारियों ने इन्हें केयर ऑफ में दर्ज कर लिया था। हालांकि, यह होना नहीं चाहिए। पूर्व के अधिकारी के खिलाफ शासन से अनुशासनिक कार्रवाई की संस्तुति की गई है। फिलहाल इस तरह के काम पर पूरी तरह रोक है। - दयाशंकर, एआरटीओ महोबा
कबरई क्षेत्र के व्यक्तियों के नाम केयर आफ में दर्ज 39 बसें में 35 बसों के फिटनेस और परमिट समाप्त हो चुके हैं। इन 35 बसों के पंजीयन निलंबित कर दिए गए हैं जबकि केयर ऑफ में दर्ज चार बसों के फिटनेस व परमिट अभी वैध हैं। इन बसों के मालिक को एआरटीओ महोबा की ओर से पत्र भेजा गया है। बसों के पंजीयन में किए गए केयर ऑफ के खेल की परतें अब खुलने लगी हैं।
केयर ऑफ पर पूरी तरह से रोक
केयर ऑफ में 35 बसों का परमिट और फिटनेस समाप्त कर दिया गया है। इन बसों का पंजीकरण भी निलंबित कर दिया गया है। जांच अभी जारी है। पूर्व के अधिकारियों ने इन्हें केयर ऑफ में दर्ज कर लिया था। हालांकि, यह होना नहीं चाहिए। पूर्व के अधिकारी के खिलाफ शासन से अनुशासनिक कार्रवाई की संस्तुति की गई है। फिलहाल इस तरह के काम पर पूरी तरह रोक है। - दयाशंकर, एआरटीओ महोबा