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उन्नाव दुष्कर्म कांड: विधायक के कारनामों पर पर्दा डालने में पुलिस भी सलाखों के पीछे
Tue, 17 Dec 2019 05:26 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 17 Dec 2019 05:26 PM IST
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कुलदीप सेंगर प्रकरण
- फोटो : अमर उजाला
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उन्नाव में विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के रसूख के आगे पुलिस भी हमेशा नतमस्तक रही। जितनी बार पीड़िता व उसका परिवार न्याय मांगने थाना और पुलिस के उच्चाधिकारियों की चौखट पर पहुंचा, पुलिस ने उसे चलता कर दिया। इसी का नतीजा है कि विधायक के साथ उनके गुनाहों में शामिल पुलिस कर्मियों को अपनी करनी का फल भुगतना पड़ा।
तीन अप्रैल 2018 को पीड़िता के पिता की पिटाई और 8 अप्रैल को हुई मौत के मामले में सीओ सफीपुर कुंवर बहादुर सिंह, एसओ अशोक सिंह भदौरिया, उपनिरीक्षक कामता प्रसाद हेड कांस्टेबल रामराज शुक्ला, सिपाही लक्ष्य कुमार शुक्ला, मोहित कुमार, सिपाही आमिर समेत छह पुलिस कर्मियों को निलंबित किया गया।
बाद में सीबीआई ने जांच में एसओ अशोक भदौरिया, दरोगा कामता प्रसाद व सिपाही आमिर को दोषी पाया और उनके खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज की गई थी। बाद में तीनों को जेल भेज दिया गया था। कुछ माह बाद जमानत पर तीनों बाहर आ गए। रायबरेली में कार हादसे के बाद सुप्रीम कोर्ट के मामला संज्ञान लेकर फिर से तीनों पुलिस कर्मियों को कोर्ट में तलब कर तिहाड़ जेल भेज दिया।
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वहीं रायबरेली हादसे में पीड़िता की सुरक्षा में तैनात गनर सुदेश कुमार, कांस्टेबल रूबी पटेल और सुनीता को घटना के समय उसके साथ न होने पर निलंबित कर विभागीय जांच भी बैठा दी गई थी। विधायक कुलदीप सिंह सेंगर उनके भाई अतुल सेंगर व अन्य सहयोगियों के साथ तीनों पुलिस कर्मी अभी भी तिहाड़ जेल में हैं। तीस हजारी कोर्ट द्वारा विधायक को दोषी करार देने के बाद इन पुलिस कर्मियों की भी मुश्किलें और बढ़ गईं हैं।
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तीन अप्रैल 2018 को पीड़िता के पिता की पिटाई और 8 अप्रैल को हुई मौत के मामले में सीओ सफीपुर कुंवर बहादुर सिंह, एसओ अशोक सिंह भदौरिया, उपनिरीक्षक कामता प्रसाद हेड कांस्टेबल रामराज शुक्ला, सिपाही लक्ष्य कुमार शुक्ला, मोहित कुमार, सिपाही आमिर समेत छह पुलिस कर्मियों को निलंबित किया गया।
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बाद में सीबीआई ने जांच में एसओ अशोक भदौरिया, दरोगा कामता प्रसाद व सिपाही आमिर को दोषी पाया और उनके खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज की गई थी। बाद में तीनों को जेल भेज दिया गया था। कुछ माह बाद जमानत पर तीनों बाहर आ गए। रायबरेली में कार हादसे के बाद सुप्रीम कोर्ट के मामला संज्ञान लेकर फिर से तीनों पुलिस कर्मियों को कोर्ट में तलब कर तिहाड़ जेल भेज दिया।
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वहीं रायबरेली हादसे में पीड़िता की सुरक्षा में तैनात गनर सुदेश कुमार, कांस्टेबल रूबी पटेल और सुनीता को घटना के समय उसके साथ न होने पर निलंबित कर विभागीय जांच भी बैठा दी गई थी। विधायक कुलदीप सिंह सेंगर उनके भाई अतुल सेंगर व अन्य सहयोगियों के साथ तीनों पुलिस कर्मी अभी भी तिहाड़ जेल में हैं। तीस हजारी कोर्ट द्वारा विधायक को दोषी करार देने के बाद इन पुलिस कर्मियों की भी मुश्किलें और बढ़ गईं हैं।
20 माह से पीड़िता के परिवार की सुरक्षा कर रही पुलिस
किशोरी और उसके परिवार की सुरक्षा में घटना के बाद से दो गनर और चार महिला कांस्टेबल तैनात हैं। इनमें एक गनर और दो महिला कांस्टबेल किशोरी के साथ और एक गनर व दो महिला कांस्टेबिल घर की सुरक्षा में लगाए गए थे। 28 जुलाई को रायबरेली में हुए रहस्यमय हादसे के बाद सुप्रीम कोर्ट के मामला संज्ञान लेने पर सारे मुकदमे दिल्ली तीस हजारी कोर्ट स्थानांतरित हो गए। रायबरेली की घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पीड़िता की सुरक्षा में सीआरपीएफ तैनात कर दी गई। जो अब तक पीड़िता के घर की निगरानी कर रही है।
वकील व पैरोकारों के साथ अन्य को भी मिली सुरक्षा
रायबरेली में हुए हादसे के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर लखनऊ की 93 बटालियन से एक प्लाटून सीआरपीएफ उन्नाव भेजी गई, जिसमें 8 जवानों को पीड़िता के घर, चार जवान पीड़िता की दूसरी चाची, चार जवान सीबीआई के प्रमुख गवाह देवेंद्र सिंह, चार-चार सीआरपीएफ जवान वकील महेंद्र व चार दूसरे वकील अजेंद्र अवस्थी की सुरक्षा में लगाए गए हैं। 9 जवानों को पीड़िता की मौसी के घर भेजा गया है। इसके साथ एक पत्रकार के साथ दुष्कर्म पीड़िता के चाचा के पैरोकार को भी सुरक्षा के तहत एक गनर मुहैया कराया गया। हाल ही में हाईवे पर साजिशन कार में टक्कर मारने का आरोप लगाने वाले नवाबगंज के पूर्व ब्लॉक प्रमुख अवधेश सिंह को भी एक गनर उपलब्ध कराया गया।
किशोरी और उसके परिवार की सुरक्षा में घटना के बाद से दो गनर और चार महिला कांस्टेबल तैनात हैं। इनमें एक गनर और दो महिला कांस्टबेल किशोरी के साथ और एक गनर व दो महिला कांस्टेबिल घर की सुरक्षा में लगाए गए थे। 28 जुलाई को रायबरेली में हुए रहस्यमय हादसे के बाद सुप्रीम कोर्ट के मामला संज्ञान लेने पर सारे मुकदमे दिल्ली तीस हजारी कोर्ट स्थानांतरित हो गए। रायबरेली की घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पीड़िता की सुरक्षा में सीआरपीएफ तैनात कर दी गई। जो अब तक पीड़िता के घर की निगरानी कर रही है।
वकील व पैरोकारों के साथ अन्य को भी मिली सुरक्षा
रायबरेली में हुए हादसे के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर लखनऊ की 93 बटालियन से एक प्लाटून सीआरपीएफ उन्नाव भेजी गई, जिसमें 8 जवानों को पीड़िता के घर, चार जवान पीड़िता की दूसरी चाची, चार जवान सीबीआई के प्रमुख गवाह देवेंद्र सिंह, चार-चार सीआरपीएफ जवान वकील महेंद्र व चार दूसरे वकील अजेंद्र अवस्थी की सुरक्षा में लगाए गए हैं। 9 जवानों को पीड़िता की मौसी के घर भेजा गया है। इसके साथ एक पत्रकार के साथ दुष्कर्म पीड़िता के चाचा के पैरोकार को भी सुरक्षा के तहत एक गनर मुहैया कराया गया। हाल ही में हाईवे पर साजिशन कार में टक्कर मारने का आरोप लगाने वाले नवाबगंज के पूर्व ब्लॉक प्रमुख अवधेश सिंह को भी एक गनर उपलब्ध कराया गया।
मुकदमा हुआ, जेल गए, फिर भी नहीं सुधरे
पुलिस की इसी मनमानी ने एक किशोरी का जीवन ही बर्बाद नहीं किया बल्कि उसके परिवार को भी तबाह कर दिया। न्याय के लिए कानून का दरवाजा खटखटाया तो ‘सिस्टम’ ने उसे इस मोड़ पर पहुंचा दिया कि उसे जिंदगी और मौत के बीच कई दिनों तक जूझना पड़ा। जबकि झूठा मुकदमा दर्ज कर पीड़िता के पिता को जेल भेजने वाले एसओ अशोक भदौरिया व कामता प्रसाद पर मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा गया।
40 से अधिक पुलिस कर्मियों से सीबीआई कर चुकी पूछताछ
रायबरेली के गुरुबख्शगंज में हुए रहस्यमय हादसे की जांच कर रही सीबीआई ने पीड़िता और उसके परिवार की सुरक्षा में लगाए गए पुलिस कर्मियों को बुलाकर बारी-बारी से पूछताछ की। इससे पहले विधायक प्रकरण की शुरुआत से लेकर पीड़िता के पिता की मौत तक माखी में तैनात रहे एसओ व बीट प्रभारियों से पूछताछ हुई। यहां तक कि तत्कालीन एसपी नेहा पांडेय व पुष्पांजलि को भी सीबीआई ने लखनऊ बुलाकर पूछताछ की।
पुलिस की इसी मनमानी ने एक किशोरी का जीवन ही बर्बाद नहीं किया बल्कि उसके परिवार को भी तबाह कर दिया। न्याय के लिए कानून का दरवाजा खटखटाया तो ‘सिस्टम’ ने उसे इस मोड़ पर पहुंचा दिया कि उसे जिंदगी और मौत के बीच कई दिनों तक जूझना पड़ा। जबकि झूठा मुकदमा दर्ज कर पीड़िता के पिता को जेल भेजने वाले एसओ अशोक भदौरिया व कामता प्रसाद पर मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा गया।
40 से अधिक पुलिस कर्मियों से सीबीआई कर चुकी पूछताछ
रायबरेली के गुरुबख्शगंज में हुए रहस्यमय हादसे की जांच कर रही सीबीआई ने पीड़िता और उसके परिवार की सुरक्षा में लगाए गए पुलिस कर्मियों को बुलाकर बारी-बारी से पूछताछ की। इससे पहले विधायक प्रकरण की शुरुआत से लेकर पीड़िता के पिता की मौत तक माखी में तैनात रहे एसओ व बीट प्रभारियों से पूछताछ हुई। यहां तक कि तत्कालीन एसपी नेहा पांडेय व पुष्पांजलि को भी सीबीआई ने लखनऊ बुलाकर पूछताछ की।
विधायक के घर लगे सीसीटीवी से सीबीआई ने जुटाए थे अहम सुराग
विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के जेल जाने के कुछ माह बाद ही दुष्कर्म पीड़िता और उसके परिवार को मिली सुरक्षा में की गई मनमानी का सच जानने के लिए सीबीआई को विधायक के घर लगे सीसीटीवी कैमरों से अहम सुराग मिले। सीबीआई ने कई चक्रों में सीसीटीवी की फुटेज चेक की।
विधायक के भाई ने एएसपी को भी मारी थी गोली
दुष्कर्म के आरोप में जेल में बंद विधायक के भाई पर 18 जुलाई 2004 में तत्कालीन एएसपी रामलाल वर्मा को गोली मारने का आरोप लगा था। एएसपी की तहरीर पर गंगाघाट थाने में विधायक के भाई समेत 20 लोगों पर जानलेवा हमला, 7 क्रिमिनल एक्ट में रिपोर्ट भी दर्ज हुई थी। हालांकि चार्जशीट लगने के बाद मुकदमे की फाइल ही गायब हो गई। केस डायरी न मिलने पर उन्होंने जब जानकारी मांगी तो उन्हें जवाब नहीं मिला। इस पर उन्हें आरटीआई की मदद लेनी पड़ी थी। दुष्कर्म के आरोप की जांच के दौरान सीबीआई ने एएसपी को गोली मारने के प्रकरण की भी जांच की थी।
विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के जेल जाने के कुछ माह बाद ही दुष्कर्म पीड़िता और उसके परिवार को मिली सुरक्षा में की गई मनमानी का सच जानने के लिए सीबीआई को विधायक के घर लगे सीसीटीवी कैमरों से अहम सुराग मिले। सीबीआई ने कई चक्रों में सीसीटीवी की फुटेज चेक की।
विधायक के भाई ने एएसपी को भी मारी थी गोली
दुष्कर्म के आरोप में जेल में बंद विधायक के भाई पर 18 जुलाई 2004 में तत्कालीन एएसपी रामलाल वर्मा को गोली मारने का आरोप लगा था। एएसपी की तहरीर पर गंगाघाट थाने में विधायक के भाई समेत 20 लोगों पर जानलेवा हमला, 7 क्रिमिनल एक्ट में रिपोर्ट भी दर्ज हुई थी। हालांकि चार्जशीट लगने के बाद मुकदमे की फाइल ही गायब हो गई। केस डायरी न मिलने पर उन्होंने जब जानकारी मांगी तो उन्हें जवाब नहीं मिला। इस पर उन्हें आरटीआई की मदद लेनी पड़ी थी। दुष्कर्म के आरोप की जांच के दौरान सीबीआई ने एएसपी को गोली मारने के प्रकरण की भी जांच की थी।