अजूबा कुदरत काः उम्र 72 की जोश जवां, इनके सामने 'दहकता सूरज' भी कुछ नहीं
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चित्रांश कुलदीप ने कहा कि योगासन के जरिए उन्होंने यह शक्ति प्राप्त की है। बताया कि साल 1979 में कई दिनों तक वह अपने कर्नलगंज स्थित घर पर एक ही कमरे में बंद रहे। उन दिनों उनकी नजर काफी कमजोर थी जिसकी वजह से चश्मा लग गया था। एक दिन उन्होंने कुछ ऐसा महसूस किया कि कोई प्राकृतिक शक्ति उनके भीतर पहुंच चुकी है।
आगे की स्लाड में पढ़ेंः- योगक्रिया लगातार करते हैं कुलदीप....
चित्रांश कुलदीप की योगक्रिया लगातार जारी रही। गर्मियों के सीजन में एक दिन दोपहर के समय उन्होंने सूरज को एक टक देखा। काफी देर तक वह सूरज को देखते रहे लेकिन उनकी पलक नहीं झपकी। इसको उन्होंने अगले दिन फिर से किया तो एक घंटे तक बिना पलक झपकाये वह दहकते सूरज को देखते रहे।
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- किसी को उनकी बातों पर नहीं हुआ विश्वास...
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- डीएम और मेयर ने दिया प्रशस्ति पत्र....
तत्कालीन कानपुर के डीएम और मेयर ने उन्हें इस प्रतिभा के लिए प्रशस्ति पत्र भी दिया। आज करीब 72 साल की उम्र में भी चित्रांश कुलदीप को उनकी इसी शक्ति ने काफी मशहूर कर दिया है। अब गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में कुलदीप अपना नाम दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं।
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