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अनूठा केस: पीड़िता और आरोपी दोनों गैर भारतीय, भारत में अपराध होने से लागू हुआ भारतीय कानून, पढ़ें पूरा मामला

Sat, 27 Feb 2021 03:13 PM IST
शिखा पांडेय आशीष अग्रवाल, अमर उजाला, कानपुर
आशीष अग्रवाल, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Sat, 27 Feb 2021 03:13 PM IST
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Unique case: victim and the accused are non-Indians, Hearing of the case under Indian law
सांकेतिक तस्वीर
न तो पीड़िता भारत की है और न ही आरोपी लेकिन अपराध भारत में हुआ है, इसलिए भारतीय कानून के तहत ही मामले की सुनवाई हुई और दो मार्च को कोर्ट अपना फैसला सुनाएगी। अपर जिला जज सप्तम अभिषेक उपाध्याय की अदालत में चल रहे अपनी तरह के इस अनूठे मुकदमे की सुनवाई आरोप तय होने के बाद सिर्फ 42 दिन में पूरी कर दी गई।
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जीआरपी ने 27 अगस्त 2019 को सेंट्रल स्टेशन से एक बांग्लादेशी किशोरी को दो रोहिंग्या मुसलमानों के चंगुल से छुड़ाया था। पीड़िता ने बताया था कि बिना पासपोर्ट-वीजा के नाव के सहारे सीमा पार कराकर मानव तस्करी में लिप्त गिरोह के लोग उसे भारत लाए और यहां वेश्यावृत्ति के धंधे में उतारना चाहते थे।
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दोनों आरोपी अब्दुल रज्जाक व मो.अयास को जेल भेजने के साथ ही पीड़िता को राजकीय बालिका गृह भेज दिया गया था। पुलिस ने 18 फरवरी 2020 को चार्जशीट दाखिल कर दी थी लेकिन कोरोना काल के चलते न्यायिक कार्यवाही में रुकावट आई।
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16 जनवरी 2021 को कोर्ट में दोनों के खिलाफ आरोप तय हुए, 19 जनवरी को पीड़िता के बयान दर्ज कराए गए और 23 फरवरी को आठवां गवाह पेश कर लगभग एक माह में ही अभियोजन ने गवाही खत्म कर दी। अगले दिन अभियुक्तों के बयान दर्ज हुए और शुक्रवार को दोनों पक्षों ने कोर्ट में अपनी बहस सुनाकर न्यायिक कार्यवाही को अंजाम तक पहुंचा दिया।

न्यायमित्र ने आरोपियों की ओर से कोर्ट में की बहस
मुकदमे के दोनों आरोपी भारत के नहीं थे। हालांकि आरोपियों की जमानत अर्जी निजी वकील द्वारा दाखिल की गई थी लेकिन अर्जी खारिज होने के बाद कोई अधिवक्ता नहीं आया। इस पर अदालत ने आरोपियों की ओर से उनका पक्ष रखने के लिए अधिवक्ता महेंद्र कुमार दुबे को न्याय मित्र के रूप में नियुक्त किया। महेंद्र ने ही सभी गवाहों से जिरह की और शुक्रवार को अदालत में आरोपियों में पक्ष में बहस की।

कानपुर के न्यायिक इतिहास में शायद शहर की किसी अदालत में पहली बार इस तरह के मुकदमे की सुनवाई हुई। मुकदमे में पीड़िता बांग्लादेश की है तो आरोपियों में से भी एक बांग्लादेशी और दूसरा शरणार्थी है। दोनों ही पक्षों का भारत से कोई लेनादेना नहीं लेकिन भारतीय सीमा के अंदर अपराध होने के कारण इस मामले में भारतीय कानून लागू हुआ। कानपुर सेंट्रल पर गिरफ्तारी के चलते कानपुर की अदालत में मुकदमे की सुनवाई की गई। - जितेंद्र कुमार पांडे, एडीजीसी

दूसरे देश की पीड़िता हमारे शहर के राजकीय बालिका गृह में पिछले डेढ़ साल से रह रही थी। मुकदमे के निस्तारण के साथ ही जल्द ही उसकी बांग्लादेश वापसी के रास्ते खुल सकेंगे। कानपुर की अदालत में चलने वाले अपनी तरह के इस पहले मुकदमे को विशेष मुकदमों की श्रेणी में रखा गया। अदालती आदेश पर पैरोकारों के विशेष प्रयास से गैर जिले के गवाहों को भी समय पर कोर्ट में हाजिर कर बयान दर्ज कराए गए हैं।- विवेक शुक्ला, एडीजीसी

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