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आखिरी विदाई: लावारिस शवों को अपनों की तरह मिलता है कंधा, अंतिम संस्कार के बिना नहीं रहता कोई भी शव
Fri, 28 May 2021 01:34 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
अनिल कनौजिया, अमर उजाला, कानपुर
अनिल कनौजिया, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 28 May 2021 01:34 PM IST
सार
कोरोना महामारी के दौरान जहां लोग लावारिस शवों को छूने से भी कतराते हैं वहीं कन्नौज के तालग्राम कस्बे में कोई भी शव बिना अंतिम संस्कार के नहीं रहता है। जानिए क्यों...
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लावारिस शव बिना अंतिम संस्कार के नहीं रहते
- फोटो : amar ujala
विस्तार
कन्नौज जिले के तालग्राम कस्बे में कोई भी लावारिस शव बिना अंतिम संस्कार के नहीं रहता है। लावारिस शवों को अपनों की तरह कंधा मिलता है। समाजसेवी शेर सिंह कफन से लेकर लकड़ी तक का इंतजाम करते हैं। वाहन की व्यवस्था न होने पर ट्रैक्टर उपलब्ध करवाते हैं। खुद गंगाघाट पहुंचकर पूरी मदद करते हैं।
अंतिम संस्कार के बाद खाने के लिए लइया, चना व गुड़ का इंतजाम भी करवाते हैं। कस्बे के मोहल्ला तालाब कला निवासी शेर सिंह कई दशक से शवों के अंतिम संस्कार में सहयोग कर रहे हैं। शेर सिंह ने बताया कि वह वर्ष 1991 में एक मौत पर श्रृंगीरामपुर में अंतिम संस्कार में शामिल होने गए थे।
चिता को लगवाने से लेकर जलवाने तक में सहयोग किया। इससे मन को शांति मिली। इसी के बाद इस कार्य को अपना धर्म समझने लगे। कस्बा समेत आसपास के इलाके में किसी की मौत होने पर गंगा घाट जरूर जाते हैं। वाहन की व्यवस्था न होने पर अपना ट्रैक्टर मुफ्त में ले जाते हैं।
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गरीबों के लिए कफन और लकड़ी अपने पास से खरीद कर देते हैं। शेर सिंह के बड़े भाई भारत सिंह सेना में सूबेदार हैं। तीसरे भाई ब्रजेश सिंह खेतीबाड़ी करते हैं। चौथे भाई दिनेश यादव पूर्व चेयरमैन हैं। शेर सिंह बताते हैं कि वह अब तक 700 से अधिक लोगों के अंतिम संस्कार में सहयोग कर चुके हैं।
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अंतिम संस्कार के बाद खाने के लिए लइया, चना व गुड़ का इंतजाम भी करवाते हैं। कस्बे के मोहल्ला तालाब कला निवासी शेर सिंह कई दशक से शवों के अंतिम संस्कार में सहयोग कर रहे हैं। शेर सिंह ने बताया कि वह वर्ष 1991 में एक मौत पर श्रृंगीरामपुर में अंतिम संस्कार में शामिल होने गए थे।
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चिता को लगवाने से लेकर जलवाने तक में सहयोग किया। इससे मन को शांति मिली। इसी के बाद इस कार्य को अपना धर्म समझने लगे। कस्बा समेत आसपास के इलाके में किसी की मौत होने पर गंगा घाट जरूर जाते हैं। वाहन की व्यवस्था न होने पर अपना ट्रैक्टर मुफ्त में ले जाते हैं।
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गरीबों के लिए कफन और लकड़ी अपने पास से खरीद कर देते हैं। शेर सिंह के बड़े भाई भारत सिंह सेना में सूबेदार हैं। तीसरे भाई ब्रजेश सिंह खेतीबाड़ी करते हैं। चौथे भाई दिनेश यादव पूर्व चेयरमैन हैं। शेर सिंह बताते हैं कि वह अब तक 700 से अधिक लोगों के अंतिम संस्कार में सहयोग कर चुके हैं।