Umesh Pal Hatyakand: जफर के मकानों पर चल सकता है बुलडोजर, 40 साल पहले बने थे दोनों घर, इन बातों पर है संशय
उमेश पाल हत्याकांड में पुलिस जफर अहमद के बांदा स्थित मकानों की प्रमाणिकता खंगाल रही है। इसके लिए नगर पालिका और विकास प्राधिकरण के दस्तावेज जांचे जा रहे हैं।
विस्तार
बांदा जिले में उमेशपाल हत्याकांड में आरोपी और पूर्व सांसद व गैंगेस्टर अतीक अहमद के करीबी जफर अहमद के बांदा स्थित दोनों मकानों पर भी बुलडोजर चल सकता है। गुरुवार से नगर पालिका और विकास प्राधिकरण ने उसकी प्रापर्टी के दस्तावेज खंगालने शुरू कर दिए हैं।
बुधवार को प्रयागराज में उनके घर को ढहाने के बाद देर शाम बांदा में भी उनके शहर के गूलर नाका स्थिति मकान पर स्थानीय पुलिस पहुंची थी। जहां पर जफर नहीं मिला था। एक मकान में रह रही उसकी बहन से पुलिस ने काफी देर पूछताछ की थी।
प्रयागराज में जफर का घर ढहाने के बाद बुधवार को देर शाम एसपी अभिनंदन के निर्देश पर स्थानीय पुलिस शहर कोतवाली के मोहल्ला गूलर नाका पहुंची थी। यहां पर उसके दो मकान बने हैं, दोनों ही जगह वह नहीं मिला था। यहां पर एक मकान में रह रही उसकी बहन शहनाज परवीन से काफी देर पूछताछ की थी।
मोबाइल स्विच ऑफ रखा था
इसी मोहल्ला में बने दूसरे मकान में रह रहीं, दूसरी बहन अजरा नहीं मिलीं थी। पुलिस को जफर भी दोनों घरों में नहीं मिला था। बुधवार को उसका मोबाइल भी स्विच ऑफ था। बताया जा रहा है कि उसका एक काफी हाउस भी है, जो बंद मिला था। इस दौरान पुलिस ने मोहल्ला के आसपास के लोगों से भी पूछताछ की थी।
मकानों की प्रमाणिकता जांच शुरू
प्रकरण को लेकर गुरुवार को भी जिला पुलिस अलर्ट रही। एसपी अभिनंदन ने बताया कि जफर अहमद की प्रापर्टी के दस्तावेजों की जांच नगर पालिका और विकास प्राधिकरण से कराई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई के बारे में कुछ बता सकूंगा।
पुराने घर, नक्शा पास होने पर संशय
मोहल्ला के बुजुर्गों का कहना है कि जफर अहमद के दोनों मकान काफी पुराने बने हैं। ऐसे में दोनों मकानों के भवनों का नक्शा पास कराने को लेकर संशय की स्थिति है। ऐसे में यदि दोनों भवन के निर्माण को लेकर खामियां मिलीं, तो जिला प्रशासन इन पर भी बुलडोजर चलवा सकता है।
मंगलवार को मोहल्ले में जफर के दिखने की चर्चा
जफर के यहां छापामारी को लेकर मोहल्लावासियों में तमाम तरह की चर्चा है। मोहल्ला के लोगों का कहना है कि पिछले माह की 25 फरवरी के बाद से कई दिन नहीं दिखा था। पुलिस की छापामारी से एक दिन पहले मंगलवार को कुछ लोगों ने मोहल्ला में घूमते हुए उसे देखा था। बुधवार सुबह से वह नहीं दिखा।
जौनपुर स्थित ससुराल में होने की अटकलें
जफर अहमद के जौनपुर स्थित ससुराल में होने की दिनभर चर्चा रही। गुरुवार को सोशल मीडिया के एक ग्रुप पर एक पोस्ट शेयर की गई थी, जिसे जफर अहमद द्वारा किए जाने की चर्चा रही। इस पोस्ट में वह प्रयागराज के मकान को लेकर अनभिज्ञता जा रहा है।
40 साल पहले बने थे दोनों घर
मोहल्ला के कुछ बुजुर्गों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि दोनों मकान करीब 40 वर्ष पहले बने थे। जफर के पिता स्व. मोहम्मद हबीब खां मूलतः प्रताप गढ़ जनपद के रहने वाले थे। वह यहीं आकर बस गए थे। उनके नौ बेटियां और तीन पुत्र हैं। इनमें से दो बेटियां और छोटा पुत्र जफर यहीं पर रहता था।
नगर पालिका और विकास प्राधिकरण के अफसरों से जफर अहमद की बांदा की प्रापर्टी की जांच में सहयोग लिया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई के बारे में बता सकूंगा। -अभिनंदन, एसपी, बांदा