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‘भगवान’ के दर पर निकल गई जान

Tue, 23 Dec 2014 02:46 AM IST
अमर उजाला कानपुर
अमर उजाला कानपुर Updated Tue, 23 Dec 2014 02:46 AM IST
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two injured man suffering for 25 minutes out of halit emergency
कानपुर। हैलट इमरजेंसी के बाहर 25 मिनट तक स्ट्रेचर न मिलने से लोडर में घायल युवक तड़पते रहे। न तो धरती के भगवान (डॉक्टरों) का दिल पसीजा और न किसी अधिकारी का। लोगों ने भागदौड़ और हंगामा किया तो एक स्ट्रेचर मिला। किसी तरह युवकों को डॉक्टरों के पास पहुंचाया गया, लेकिन उनमें से एक को मृत घोषित कर दिया गया। दोनों युवक सोमवार को बिठूर थाने के नारामऊ के पास हादसे में घायल हुए थे।
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ये हालात तब थे जब कुछ देर पहले ही जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉक्टरों और स्टाफ को तत्काल इलाज और मरीजों व तीमारदारों से प्यार से पेश आने की नसीहत देकर वार्डों की ओर गए थे। सोमवार दोपहर बाद 1.15 बजे बिठूर थाने का सिपाही यशवंत सिंह लोडर में हादसे में जख्मी नानकारी निवासी मुकेश पुत्र पूरनलाल और अजय पुत्र राकेश को लेकर इमरजेंसी में पहुंचा। तब युवकों की सांसें चल रही थीं। सिपाही ने डॉक्टरों से युवकों को देखने की गुहार लगाई। डॉक्टरों ने उसे ईएमओ के पास भेज दिया। ईएमओ ने खाली स्ट्रेचर देखने को कहा। काफी देर तक सिपाही इधर-उधर भटकता रहा। लोडर में युवकों की स्थिति देखकर इमरजेंसी के बाहर खड़े लोगों ने हंगामा शुरू किया तो दो युवकों को एक स्ट्रेचर लेकर भेजा गया। 25 मिनट बाद किसी तरह युवकों को इमरजेंसी में लाया गया। तब तक डॉक्टरों ने मुकेश को मृत घोषित कर दिया।
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रिक्शा लेकर इमरजेंसी में पहुंचा तब मिला स्ट्रेचर
युवकों को देर से इमरजेंसी में पहुंचाने वाले कर्मचारी 45 मिनट तक नौबस्ता निवासी रिक्शा चालक मुन्नूलाल और उसके बेटे की गुहार को भी अनसुना करते रहे। मुन्नूलाल अपनी 15 साल की बीमार बेटी मोहिनी को लेकर इमरजेंसी आया था। काफी देर तक जब स्ट्रेचर नहीं आया तो वह रिक्शा लेकर इमरजेंसी में घुसने लगा। सामने मीडिया कर्मियों को देखकर आनन-फानन में स्ट्रेचर मंगाया गया। इमरजेंसी में देखने के बाद डॉक्टरों ने किशोरी को बाल रोग विभाग रेफर कर दिया।
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खुद ही स्ट्रेचर खींचने की मजबूरी
बाल रोग विभाग की इमरजेंसी में भर्ती जितेेंद्र (आठ माह) पुत्र रामखेलावन निवासी सिकंदरा कानपुर देहात को डॉक्टरों ने एक्सरे कराने को भेजा था। निमोनिया से पीड़ित जितेंद्र को ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ स्ट्रेचर से भेजा गया। काफी देर तक रामखेलावन कर्मचारियों का इंतजार करता रहा लेकिन जब कोई नहीं आया तो खुद ही स्ट्रेचर खींचते हुए एक्सरे कराने पहुंचा और फिर बाल रोग विभाग आया।



बोले, जिम्मेदार
एसआईसी डॉ. आरसी गुप्ता ने मामले को गंभीर बताया और आउटसोर्सिंग पर कर्मचारी भेजने वाले ठेकेदार को तलब किया। उन्होंने पीआरओ को भी चेतावनी दी। पीआरओ ने कर्मचारियों के काम न करने की जानकारी दी तो एसआईसी ने लिखित में पूरी जानकारी देने को कहा।
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