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नारी निकेतन से दो लड़कियां गायब

Thu, 19 Nov 2015 02:04 AM IST
अनीता वर्मा, कानपुर
अनीता वर्मा, कानपुर Updated Thu, 19 Nov 2015 02:04 AM IST
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Two girls missing from Nari Niketan

राणा प्रताप नगर में प्रगति सेवा संस्थान के नाम से चल रहे नारी निकेतन से 17 सितंबर से दो लड़कियां लक्ष्मी और आरती गायब हैं। घटना को दो महीने बीत चुके हैं।

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लेकिन संस्थान और पुलिस ने इनको खोजने के लिए रत्ती भर भी प्रयास नहीं किया। लक्ष्मी की मां कई दिनों से संस्थान के चक्कर लगा रही हैं अब तो उन्हें देखकर गेट भी नहीं खोला जाता।
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लापरवाही ऐसी कि लड़कियाें के गायब होने की सूचना न तो डीएम को दी गई, न ही जिला प्रोबेशन अधिकारी को, जबकि डीएम की ओर से संस्था को हर साल 12 लाख रुपये दिए जाते हैं।
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संगीत टाकीज के पास रहने वाली लक्ष्मी की मां मंजू ने अपनी पीड़ा ‘अमर उजाला’ को बताई तो ‘अमर उजाला’ टीम सेवा संस्थान पहुंची। रिहायशी एरिया में बने इस संस्थान में न तो नारी निकेतन या संस्थान का कोई बोर्ड लगा है न ही मकान नंबर की प्लेट। बस दीवारों पर नुकीली कीलें लगी हैं।

पहले मंजू ने खटखटाया गेट
संस्थान का गेट पहले मंजू ने खटखटाया। उनकी आवाज सुन गेट खोला नहीं गया। इसके बाद टीम ने परिचय देकर लक्ष्मी के बारे में जानकारी मांगी तो काउंसलर करुणा और प्रतिमा ने गेट के अंदर से ही संस्थान की सचिव कल्पना सिंह को फोन पर सूचना दी।

गेट न खोलने पर टीम ने आसपास के लोगों से पूछताछ की और लौटने लगी तभी कल्पना सिंह ने टीम को फोन कर मिलने को कहा, शास्त्रीगर में मिलकर बताया कि लक्ष्मी संस्थान में 25 अगस्त 2014 से रह रही थी। उसे रखने के कोई मजिस्ट्रेट या पुलिस के आर्डर नहीं थे। उसे डूडा कमेटी की सदस्य मुन्नी सहित चार महिलाएं संस्था में रख गई थीं।

उनके पास डॉक्यूमेंट नहीं हैं पर, लक्ष्मी 18 जुलाई 2015 को बालिग हो गई थी। वह घर जाना चाहती थी। किसी कारण मां उसे नहीं ले गई। आरती अलीगढ़ से मजिस्ट्रेट आर्डर पर आई थी। 17 सितंबर की रात लक्ष्मी और आरती गायब हो गईं।


मां के पास आया था लक्ष्मी का फोन

मंजू के अनुसार 17 नवंबर की रात किसी अंजान नंबर से बेटी का फोन आया था। वह घबराई थी, रो रही थी। उसने बताया वह दिल्ली से बोल रही है, पर कहां, किस गली-मोहल्ले में है उसे मालूम नहीं चल रहा है। इसके बाद फोन कट गया, तब से बंद है।

दीवार फांदना गले से नहीं उतरा ः मंजू के अनुसार लक्ष्मी का कद चार फीट से भी कम है। संस्थान की दीवार छह फुट ऊंची है। इसलिए उसे फांदना संभव नहीं है।

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