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श्री लक्ष्मी काटसिन के टेकओवर के लिए आगे आईं दो कंपनियां, वेलस्पन ने नहीं दिया विलय का प्रस्ताव
Sun, 03 Jan 2021 02:19 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 03 Jan 2021 02:19 PM IST
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बैंक धोखाधड़ी
- फोटो : pixabay
टेक्सटाइल और प्रतिरक्षा उत्पाद बनाने वाली शहर की श्री लक्ष्मी काटसिन मिल को टेकओवर करने के लिए वेलस्पन ने अब तक प्रस्ताव नहीं दिया है। इन सब के बीच लुधियाना की मशहूर ट्राईडेंट और मुंबई की सुमाया अपेरल ने कंपनी में रुचि दिखाई है। ट्राईटेंड वैश्विक कंपनी है। इसके उत्पाद विश्व के तमाम देशों को निर्यात किए जाते हैं।
कंपनी के स्टॉक होल्डरों ने इन दोनों कंपनियों को चार जनवरी तक प्रस्ताव देने के लिए भी कहा है। सूत्रों ने बताया कि लक्ष्मी काटसिन को वेलस्पन ने टेकओवर करने की इच्छा जताई थी। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएटी) ने अक्तूबर महीने में इस पर मंजूरी दी थी। काफी समय होने के बावजूद भी वेलस्पन ने विलय का प्रस्ताव नहीं दिया।
सूत्रों ने बताया कि दो महीने पहले वेलस्पन कंपनी के प्रतिनिधियों ने अभयपुर स्थित टॉवेल प्लांट और मलवा स्थित डेनिम प्लांट का निरीक्षण किया था। कप्यूटरीराइज्ड प्लांट में बड़े पैमाने पर उपकरण चोरी होने की बात उन्हें पता चली थी। इनकी अनुमानित कीमत 150 करोड़ थी। संबंधित थाने में रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी। माना जा रहा है कि इंफ्रास्टक्चर में बड़ी कमी दिखने पर वेलस्पन ने प्रस्ताव न दिया हो।
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यह है मामला
लक्ष्मी काटसिन के मालिक एमपी अग्रवाल पर अलग-अलग बैंकों का 5200 करोड़ का कर्ज है। लक्ष्मी काटसिन ने कारोबार विस्तार के तहत 2013 तक अलग-अलग बैंकों से 2650 करोड़ का कर्जा लिया था। मलवा के पास अलग-अलग उत्पादों के प्लांट भी लगाए गए थे लेकिन कारोबार में तेजी न आने और बड़े आर्डर न मिलने से कंपनी की हालत खस्ता हो गई। कंपनी में 2019 तक उत्पादन किया गया था। जुलाई 2019 में कंपनी लिक्विडेशन में चली गई थी। बैंकों से लिया गया लोन एनपीए होने और पेनाल्टी व ब्याज के चलते लोन की रकम बढ़कर दोगुना से अधिक हो गई है।
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कंपनी के स्टॉक होल्डरों ने इन दोनों कंपनियों को चार जनवरी तक प्रस्ताव देने के लिए भी कहा है। सूत्रों ने बताया कि लक्ष्मी काटसिन को वेलस्पन ने टेकओवर करने की इच्छा जताई थी। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएटी) ने अक्तूबर महीने में इस पर मंजूरी दी थी। काफी समय होने के बावजूद भी वेलस्पन ने विलय का प्रस्ताव नहीं दिया।
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सूत्रों ने बताया कि दो महीने पहले वेलस्पन कंपनी के प्रतिनिधियों ने अभयपुर स्थित टॉवेल प्लांट और मलवा स्थित डेनिम प्लांट का निरीक्षण किया था। कप्यूटरीराइज्ड प्लांट में बड़े पैमाने पर उपकरण चोरी होने की बात उन्हें पता चली थी। इनकी अनुमानित कीमत 150 करोड़ थी। संबंधित थाने में रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी। माना जा रहा है कि इंफ्रास्टक्चर में बड़ी कमी दिखने पर वेलस्पन ने प्रस्ताव न दिया हो।
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यह है मामला
लक्ष्मी काटसिन के मालिक एमपी अग्रवाल पर अलग-अलग बैंकों का 5200 करोड़ का कर्ज है। लक्ष्मी काटसिन ने कारोबार विस्तार के तहत 2013 तक अलग-अलग बैंकों से 2650 करोड़ का कर्जा लिया था। मलवा के पास अलग-अलग उत्पादों के प्लांट भी लगाए गए थे लेकिन कारोबार में तेजी न आने और बड़े आर्डर न मिलने से कंपनी की हालत खस्ता हो गई। कंपनी में 2019 तक उत्पादन किया गया था। जुलाई 2019 में कंपनी लिक्विडेशन में चली गई थी। बैंकों से लिया गया लोन एनपीए होने और पेनाल्टी व ब्याज के चलते लोन की रकम बढ़कर दोगुना से अधिक हो गई है।